हरियाणा के समालखा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अ

समरस, संगठित समाज का निर्माण ही देश की मजबूती का आधार

संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन दिवसीय बैठक शुरू

समाज की एकता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर समरस और संगठित समाज का निर्माण करना ही देश की मजबूती का आधार है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का उद्देश्य भी समाज की सज्जन शक्ति को एकजुट कर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है।

उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह सीआर मुकुंद ने शुक्रवार को संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि बैठक के शुभारंभ के पश्चात् पत्रकारों से चर्चा के दौरान व्यक्त किए। पानीपत स्थित समालखा में पट्टीकल्याणा स्थित माधव सृष्टि में बैठक प्रारंभ हुई। बैठक का शुभारंभसंघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। सभा में देशभर से 1487 प्रतिनिधि सम्मिलित हुए। श्री मुकुंद ने बताया कि इस वर्ष संघ का शताब्दी वर्ष चल रहा है, जिसके कारण इस बार की प्रतिनिधि सभा का विशेष महत्व है। शताब्दी वर्ष में किए गए प्रयासों से एक वर्ष में 3,943 नए स्थान जुड़े हैं और शाखाओं की संख्या 5,820 की वृद्धि हुई है। गृह संपर्क अभियान के तहत संघ के स्वयंसेवक 10 करोड़ परिवारों तक पहुंचे हैं। तीन लाख से अधिक गांव में संघ के स्वयंसेवक पहुंचे हैं।

केरल का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां संघ के कार्यकर्ता साम्यवादी विचारधारा, मुसलमानों और ईसाई परिवारों से भी मिले हैं। अकेले केरल में 55 हजार से अधिक मुस्लिम और 54 हजार से अधिक ईसाई परिवारों में संघ के स्वयंसेवक संघ और समाज से जुड़े विषय लेकर गए हैं।

36 हजार से अधिक स्थानों पर हुए हिंदू सम्मेलन

पत्रकार वार्ता में बताया कि शताब्दी वर्ष में 36 हजार से अधिक स्थानों पर हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए हैं। इसमें अरुणाचल के एक दुर्गम क्षेत्र में आयोजित हिंदू सम्मेलन का उदाहरण उल्लेखनीय है। संघ के शताब्दी वर्ष में दो प्रकार के कार्यक्रमों की योजना की गई, जिनमें एक संगठन विस्तार और दूसरा समाज की सज्जन शक्ति को सद्भाव, समरसता के लिए संगठित करने का उद्देश्य रखा गया।उन्होंने बताया कि संघ का शताब्दी वर्ष कार्यक्रम अक्टूबर 2026 तक विभिन्न गतिविधियों के साथ जारी रहेगा। पत्रकार वार्ता के दौरान संघ के राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर, राष्ट्रीय सह प्रचार प्रमुख प्रदीप जोशी, नरेंद्र ठाकुर सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। 

सरसंघचालक ने एक हजार से अधिक प्रश्नों के जवाब दिए

संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी इन विषयों पर समाज के साथ सीधा संवाद स्थापित करने के लिए चारों महानगरों सहित राज्यों की राजधानियों कार्यक्रमों में सहभाग कर रहे हैं। सरसंघचालक ने केवल चार महानगरों में आयोजित कार्यक्रमों में नागरिकों के साथ संवाद करते हुए एक हजार से अधिक प्रश्नों के जवाब दिए तथा इस प्रश्नोत्तर में 20 घंटे से अधिक का समय लगा।

संघ कार्य का विस्तार

प्रतिवेदन में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष 51,740 स्थानों पर 83, 129 शाखाएं संचालित थीं जो अब बढ़कर 55,683 स्थानों पर 88,949 शाखाओं का आंकड़ा हो गया है। इस प्रकार एक वर्ष में 3943 नए स्थान जुड़े हैं और शाखाओं की संख्या 5820 की वृद्धि हुई है।

दिवंगत विभूतियों को दी श्रद्धांजलि-बैठक की शुरुआत में दिवंगत हुए विभिन्न प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इनमें प्रमुख रूप से शिवकथाकार सतगुरुदास महाराज, पर्यावरणविद डॉ. माधव गाडगिल, पर्यावरण के लिए समर्पित सालुमरदा थिमक्का, पुरातत्वविद केएन दीक्षित, अभिनेता धर्मेंद्र देओल, पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एवं लोकसभा अध्यक्ष शिवराज पाटिल, महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजीत पवार, तमिल फिल्म निर्माता एवीएम सरवनन, मिजोरम के पूर्व राज्यपाल स्वराज कौशल, शिक्षाविद विनय हेगड़े, वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक प्रफुल्ल गोविंद बरुआ के नाम सम्मिलित हैं।

यूजीसी विवाद पर कहा समाज और सरकार दोनों को मिलकर करने होंगे प्रयास - पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए श्री मुकुंद ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से जुड़े विवाद पर कहा कि समाज की एकता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर समरस और संगठित समाज का निर्माण करना ही देश की मजबूती का आधार है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में समाज और सरकार दोनों को मिलकर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में समाज के विभिन्न वर्गों और देशों के बीच संवाद और संपर्क बनाए रखना आवश्यक है, ताकि शांति, स्थिरता और राष्ट्रीय एकता को मजबूती मिल सके।

खाड़ी विवाद पर भारत सरकार का अधिकारिक रुख ही सर्वोपरि - खाड़ी देशों में चल रहे तनाव और युद्ध जैसी स्थिति को लेकर उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत सरकार का जो भी आधिकारिक रुख होगा, वही देशहित में सर्वोपरि होगा। उन्होंने बताया कि भारत के प्रधानमंत्री द्वारा ईरान के शीर्ष नेतृत्व से की गई बातचीत भी शांति और कूटनीतिक समाधान की दिशा में प्रयासों का हिस्सा है।