रुलाएगा प्याज! जल्द 60 रुपए किलो तक पहुंच सकते हैं दाम, जानिए क्यों बढ़ रही महंगाई
रसोई का सबसे जरूरी सामान प्याज एक बार फिर महंगा होने की राह पर है। कारोबारियों का अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में मंडियों में प्याज का थोक भाव 40 रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकता है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत 60 रुपए प्रति किलो तक जा सकती है। इसकी सबसे बड़ी वजह मानसून में देरी, खरीफ फसल की रोपाई प्रभावित होना और निर्यात मांग में बढ़ोतरी बताई जा रही है।
मानसून की देरी से फसल पर असर
महाराष्ट्र के प्याज कारोबारी विजय बाफना के मुताबिक मानसून समय पर नहीं पहुंचने से खरीफ सीजन की प्याज की रोपाई प्रभावित हुई है। इससे नई फसल बाजार में देर से आएगी और सप्लाई कम रहने की आशंका है। यही कारण है कि बाजार में तेजी का माहौल बना हुआ है।
मंडी से लेकर रिटेल तक बढ़ेंगे दाम
कारोबारियों का कहना है कि यदि मंडियों में प्याज का भाव 35 से 40 रुपए प्रति किलो तक पहुंचता है तो खुदरा बाजार में इसकी कीमत 60 रुपए प्रति किलो तक जा सकती है। बारिश के मौसम में आमतौर पर प्याज की सप्लाई प्रभावित होती है, जिससे हर साल कीमतों में उछाल देखने को मिलता है।
सरकारी खरीद कीमत बढ़ने का भी असर
प्याज की कीमतों में तेजी की एक और वजह नेफेड द्वारा खरीद मूल्य बढ़ाना है। सरकारी एजेंसी ने प्याज की खरीद कीमत करीब 13 प्रतिशत बढ़ाकर 2,125 रुपए प्रति क्विंटल कर दी है, जो पहले 1,875 रुपए प्रति क्विंटल थी। कारोबारियों का मानना है कि इससे खुले बाजार में भी कीमतों को समर्थन मिलेगा।
एक महीने में 40% तक महंगा हुआ प्याज
देश की प्रमुख मंडियों में पिछले एक महीने के दौरान प्याज के दाम में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
-
लासलगांव मंडी (महाराष्ट्र): 750–2,000 से बढ़कर 800–2,700 रुपए प्रति क्विंटल।
-
आजादपुर मंडी (दिल्ली): 500–1,500 से बढ़कर 750–2,000 रुपए प्रति क्विंटल।
-
बेंगलुरु मंडी: 1,000–1,600 से बढ़कर 1,500–2,200 रुपए प्रति क्विंटल।
वहीं केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार देशभर में प्याज की औसत खुदरा कीमत 25 रुपए से बढ़कर 35 रुपए प्रति किलो हो गई है। दिल्ली में जो प्याज एक महीने पहले 25–30 रुपए किलो बिक रही थी, अब उसकी कीमत 40–45 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है।
अच्छी गुणवत्ता वाली प्याज के कारण भी बढ़े दाम
व्यापारियों के अनुसार मार्च और अप्रैल में हुई बेमौसम बारिश से प्याज की फसल प्रभावित हुई थी। इसके कारण बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली प्याज की उपलब्धता कम हो गई। अब बेहतर गुणवत्ता की प्याज बाजार में आ रही है, जिसकी कीमत पहले की तुलना में अधिक है।