प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान, संसद में बोले- 256 साल पुराना है भारत का रिश्ता
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन' से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही उनके नाम दुनिया के 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दर्ज हो गया। यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रयासों के लिए दिया गया।
सम्मान समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित किया। ऐसा करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। अपने भाषण में उन्होंने दोनों देशों के संबंधों को सिर्फ राजनयिक नहीं बल्कि 256 साल पुराने ऐतिहासिक जुड़ाव से जोड़ते हुए कहा कि सेशेल्स में भारत की मौजूदगी की शुरुआत वर्ष 1770 में पहुंचे पांच भारतीयों से हुई थी।
भारत-सेशेल्स रिश्तों को मिला नया संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के लिए सेशेल्स केवल द्वीपों का समूह नहीं बल्कि हिंद महासागर का अहम साझेदार है। उन्होंने दोनों देशों के बीच विश्वास, लोकतांत्रिक मूल्यों और लोगों के आपसी जुड़ाव को रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत बताया। उनका कहना था कि यह साझेदारी भविष्य में समुद्री सुरक्षा, विकास और क्षेत्रीय स्थिरता को नई दिशा देगी।
सम्मान के साथ रणनीतिक सहयोग भी मजबूत
दौरे के दौरान भारत ने सेशेल्स को 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर के विकास पैकेज की घोषणा की। इसके साथ भारत में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल 'पीएस लेस्पवार' भी सेशेल्स को सौंपा गया, जिससे उसकी समुद्री निगरानी और विशेष आर्थिक क्षेत्र में गश्त की क्षमता बढ़ेगी। दोनों देशों ने प्रत्यर्पण, स्वास्थ्य, कृषि और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए।
पर्यावरण क्षेत्र में मिला एक और बड़ा सम्मान
'गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन' सम्मान प्रधानमंत्री मोदी को पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से मुकाबले और सतत विकास की दिशा में किए गए कार्यों के लिए दिया गया। इससे पहले उन्हें संयुक्त राष्ट्र का 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' पुरस्कार और संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) का 'एग्रीकोला मेडल' भी मिल चुका है। इससे पर्यावरण के मुद्दों पर भारत की वैश्विक भूमिका को भी नई पहचान मिली है।
256 साल पुराने रिश्ते का ऐतिहासिक संदर्भ
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि भारत और सेशेल्स का रिश्ता केवल पिछले 50 वर्षों का नहीं है। उन्होंने कहा कि अगस्त 1770 में 'थेलेमाक' जहाज से पहुंचे पांच भारतीय इस द्वीप की पहली स्थायी बसाहट का हिस्सा बने थे। आज भी सेशेल्स में भारतीय मूल के लोग देश के सामाजिक और आर्थिक जीवन में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की मजबूत कड़ी माने जाते हैं।
गोल्डन जुबली समारोह में भारत की अहम मौजूदगी
सेशेल्स की आजादी के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। समारोह में भारतीय सशस्त्र बलों की टुकड़ी के साथ भारतीय नौसेना के युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी हिस्सा लेंगे। इस भागीदारी को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक मौजूदगी और दोनों देशों के रक्षा सहयोग के महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है।