NFHS-6 के फेक्टशीट से एनीमिया, कैंसर और HIV से जुड

NFHS-6 रिपोर्ट से हटे अहम हेल्थ डेटा, एनीमिया और कैंसर संकेतकों पर उठा सवाल

भारत के सबसे बड़े स्वास्थ्य सर्वे NFHS-6 की नई फेक्टशीट सामने आने के बाद एक नई बहस शुरू हो गई है। रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संकेतकों को हटाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर एनीमिया, कैंसर स्क्रीनिंग और HIV/AIDS जैसे डेटा की अनुपस्थिति को लेकर।  स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी इस फेक्टशीट में कुल 43 संकेतक हटाए गए हैं, जबकि 13 नए जोड़े गए हैं। लेकिन  सबसे ज्यादा चर्चा उन सात एनीमिया संकेतकों को लेकर हो रही है जिन्हें पूरी तरह “ड्रॉप” कैटेगरी में डाल दिया गया है।

एनीमिया डेटा गायब होने पर क्यों उठे सवाल?

दरअसल, पिछले NFHS-5 में सामने आया था कि भारत में बच्चों और महिलाओं में एनीमिया की स्थिति काफी गंभीर है। 5 साल से कम उम्र के बच्चों में एनीमिया का स्तर 60% से अधिक दर्ज किया गया था।  अब समझिए, NFHS-6 की फेक्टशीट में एनीमिया से जुड़े सभी संकेतकों को हटा देना विशेषज्ञों के बीच चिंता का विषय बन गया है। आलोचकों का कहना है कि जब बीमारी के आंकड़े ही  नहीं होंगे, तो नीति की प्रभावशीलता का आकलन कैसे होगा।

कैंसर और HIV स्क्रीनिंग डेटा भी गायब

सिर्फ एनीमिया ही नहीं, कैंसर स्क्रीनिंग और HIV जागरूकता से जुड़े संकेतक भी इस बार की रिपोर्ट से हटा दिए गए हैं पिछले सर्वे में महिलाओं और पुरुषों में कैंसर स्क्रीनिंग (सर्वाइकल, ब्रेस्ट और ओरल कैंसर) से जुड़े आंकड़े शामिल थे, जो देश में शुरुआती पहचान और रोकथाम नीति के लिए बेहद अहम माने जाते थे। इसी तरह HIV/AIDS जागरूकता और रोकथाम से जुड़े संकेतक भी हटाए गए हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चिंता और बढ़ गई है।

43 संकेतक हटे, 13 नए जोड़े गए

NFHS-6 फेक्टशीट में कुल 101 संकेतक ही जारी किए गए हैं, जबकि NFHS-5 में यह संख्या 131 थी। यानी बड़ी संख्या में संकेतकों को हटाया गया है. हटाए गए संकेतकों में जन्म और मृत्यु पंजीकरण, स्वच्छ ईंधन उपयोग, साक्षरता, परिवार नियोजन के कई पहलू और बाल मृत्यु दर जैसे महत्वपूर्ण डेटा भी शामिल हैं, वहीं दूसरी तरफ, सरकार ने कुछ नए संकेतक जोड़े हैं जैसे बैंक खाते, डिजिटल पहुंच, बुजुर्ग आबादी और टीकाकरण से जुड़े अपडेटेड डेटा।

डेटा नहीं तो नीति कैसे तय होगी?

अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर बीमारी और स्वास्थ्य परिणामों से जुड़े डेटा ही कम हो जाएंगे, तो नीतियां कितनी प्रभावी होंगी।  विशेषज्ञों का मानना है कि केवल योजनाओं के इनपुट (जैसे दवा वितरण या टीकाकरण) को मापना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके परिणाम (health outcomes) को भी ट्रैक करना जरूरी है। यही वजह है कि एनीमिया और कैंसर जैसे संकेतकों की अनुपस्थिति को गंभीर माना जा रहा है।