ईरान जंग पर मोदी सरकार अलर्ट: 27 मार्च को सभी मुख्यमंत्रियों से बैठक, LPG और ऊर्जा सप्लाई पर बड़ा अपडेट
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच केंद्र सरकार ने हालात पर नजर रखते हुए उच्च स्तर की तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 27 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश के मुख्यमंत्रियों के साथ अहम बैठक करेंगे। इस बैठक में ईरान युद्ध के बाद वैश्विक हालात और भारत पर उसके संभावित असर पर चर्चा होने की संभावना है।
संसद में दी थी चेतावनी, ‘कोरोना जैसी चुनौती’ बताया
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में संसद में कहा था कि यदि ईरान से जुड़ा संघर्ष लंबा चलता है, तो इसका असर व्यापक हो सकता है। उन्होंने इसे “कोरोनाकाल जैसी परीक्षा” बताते हुए केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया था। सरकार ने देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की कमी की खबरों को खारिज किया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार भारत के पास करीब 60 दिनों का पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर फैल रही किल्लत की खबरें भ्रामक हैं और बाजार में ‘पैनिक बाइंग’ फैलाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे मामलों में कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
होर्मुज संकट से बढ़ी चिंता
ईरान से जुड़े तनाव का असर Strait of Hormuz पर साफ दिख रहा है। यह दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग माना जाता है, जहां से वैश्विक पेट्रोलियम का करीब 20% गुजरता है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा—करीब 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी—इसी रास्ते से आयात करता है। वर्तमान हालात में इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे सप्लाई को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है।
LPG संकट पर सरकार के कदम
सरकार ने हाल के दिनों में एलपीजी वितरण को लेकर कई नए नियम लागू किए हैं
- एक सिलेंडर के बाद दूसरा बुक करने के लिए 21 दिन का लॉक-इन पीरियड
- शहरी क्षेत्रों में इसे बढ़ाकर 25 दिन किया गया
- ग्रामीण इलाकों में बुकिंग गैप 45 दिन तक
- PNG (पाइप गैस) उपभोक्ताओं के लिए LPG सिलेंडर रखना प्रतिबंधित
इन कदमों का मकसद सीमित संसाधनों का संतुलित वितरण और आपूर्ति बनाए रखना है।
विदेश नीति पर भी स्पष्ट रुख
सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साफ कहा कि भारत किसी भी देश की तरह मध्यस्थता नहीं करता और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलता है। सरकार लगातार वैश्विक हालात की समीक्षा कर रही है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में भी उच्चस्तरीय बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक आपूर्ति पर चर्चा हुई।