महाकाल मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब: अब तक 1 लाख दर्शन, 44 घंटे खुले रहेंगे पट
उज्जैन में महाशिवरात्रि की शुरुआत के साथ ही बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। तड़के से ही मंदिर परिसर में हर-हर महादेव के जयकारे गूंजने लगे। सुबह 7 बजे तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, और रविवार होने के चलते भीड़ हर घंटे तेज होती जा रही है.महाकाल मंदिर समिति के मुताबिक, आज पूरे दिन में करीब 10 लाख श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है। होटल, लॉज और होम-स्टे पहले ही फुल हो चुके हैं, वहीं स्टेशन और बस स्टैंड पर भी भारी चहल-पहल नजर आ रही है।
महाकालेश्वर मंदिर में तड़के 2:30 बजे खुले पट
महाशिवरात्रि की परंपरा के अनुसार मध्य रात्रि 2:30 बजे मंदिर के पट खोले गए। प्रथम घंटाल बजने के साथ ही पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में प्रवेश किया। मंत्रोच्चार के बीच सभी प्रतिमाओं का पूजन हुआ और हरिओम का जल अर्पित किया गया।कपूर आरती के बाद जलाभिषेक किया गया। फिर दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से बने पंचामृत से भगवान महाकाल का विशेष पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद भांग, चंदन और त्रिपुंड अर्पित कर राजा स्वरूप में श्रृंगार किया गया।
भस्म रमाई, रजत मुकुट और फूलों से सजा बाबा का दरबार
भस्म आरती के दौरान ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढांककर भस्म रमाई गई। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत की मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और मोगरा-गुलाब से बनी पुष्पमालाएं अर्पित की गईं। तड़के हुई इस भस्म आरती में पासधारी श्रद्धालुओं के साथ चलित भस्म आरती के दर्शन भी कराए गए.मंदिर समिति का दावा है कि पर्व के दौरान औसतन 40 मिनट में दर्शन कराए जा रहे हैं, जबकि शीघ्र दर्शन पासधारियों को महज 25 मिनट में बाबा के दर्शन मिल रहे हैं।
आज महाशिवरात्रि पर पूजन का पूरा क्रम
भस्म आरती के बाद सुबह 7:30 से 8:15 बजे तक दधोदक आरती होगी। 10:30 से 11:15 बजे तक भोग आरती, दोपहर 12 से 1 बजे तक तहसील की ओर से अभिषेक-पूजन किया जाएगा।इसके बाद होलकर और सिंधिया परिवार द्वारा वंशानुसार अभिषेक पं. घनश्याम पुजारी करेंगे। शाम 6 बजे आरती होगी, जबकि रात 7 से 10 बजे तक कोटितीर्थ कुंड स्थित कोटेश्वर महादेव का पंचामृत पूजन और पुष्प मुकुट श्रृंगार आरती संपन्न होगी।
रात 11 बजे से गर्भगृह में महापूजा
महाशिवरात्रि की रात 11 बजे से गर्भगृह में महापूजा और विशेष अभिषेक होगा। इसमें भस्म धूलन, रुद्राक्ष धारण, भू-शुद्धि, भूत-शुद्धि, महान्यास, लघुन्यास, रुद्र पूजन और पंचवक्र पूजन शामिल हैं। बाबा को शिव सहस्त्र नामावली से बिल्वपत्र अर्पित किए जाएंगे।परंपरा के अनुसार महाकाल को दिनभर जल अर्पित किया जाएगा और चार प्रहर की पूजा के चलते मंदिर रात भर खुला रहेगा। 16 फरवरी की रात शयन आरती के बाद करीब 10:45 बजे मंदिर के पट बंद होंगे, यानी करीब 44 घंटे लगातार दर्शन होंगे।
व्यवस्थाएं और सुरक्षा इंतजाम
भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति ने आठ कतारों से दर्शन की व्यवस्था की है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 10 निःशुल्क बसें चलाई जा रही हैं। सुरक्षा के लिए 2000 पुलिसकर्मी, 2000 मंदिर कर्मचारी और 150 से ज्यादा अधिकारी 24 घंटे तैनात हैं। पूरे परिसर पर सीसीटीवी से नजर रखी जा रही है।
सप्तधान्य मुखौटा और 400 क्विंटल लड्डू प्रसादी
सोमवार तड़के बाबा महाकाल को सप्तधान्य का मुखौटा धारण कराया जाएगा। दूल्हे के स्वरूप में सजे बाबा के लिए करीब 3 क्विंटल फूलों का इस्तेमाल किया गया है। वहीं महाशिवरात्रि पर श्रद्धालुओं के लिए 400 क्विंटल लड्डू प्रसादी तैयार की गई है, जिसे 20 काउंटरों से वितरित किया जाएगा।अब निगाहें देर रात होने वाली महापूजा और सोमवार को होने वाली विशेष भस्म आरती पर टिकी हैं, जब बाबा महाकाल अपने भक्तों को एक बार फिर दुर्लभ दर्शन देंगे।