केरल का नाम बदलने के फैसले के बाद पश्चिम बंगाल के

केरल का नाम बदलने के बाद फिर उठी पश्चिम बंगाल की मांग, जानें क्यों नहीं बदलेगा नाम

PM Modi

नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेवा तीर्थ में हुई मीटिंग के बाद केरल का नाम बदलकर 'केरलम्' करने के फैसले ने एक बार फिर राज्यों के नाम परिवर्तन की बहस को तेज कर दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले आए इस निर्णय को राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। इसी कड़ी में ममता बैनर्जी ने केंद्र को याद दिलाया कि पश्चिम बंगाल का नाम 'बांग्ला' करने का प्रस्ताव जुलाई 2018 से लंबित है। लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

केरल के फैसले पर बंगाल की प्रतिक्रिया

ममता बनर्जी ने केरल के नाम परिवर्तन का स्वागत किया, लेकिन साथ ही केंद्र सरकार पर सवाल भी उठाए। उनका कहना है कि राज्य विधानसभा का प्रस्ताव लंबे समय से केंद्र के पास विचाराधीन है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर इस मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया और भाजपा को बंगाल विरोधी बताया।

केंद्र सरकार की आपत्तियां

सरकारी सूत्रों के अनुसार, केंद्र पश्चिम बंगाल का नाम बदलने के पक्ष में नहीं है। सबसे बड़ी दलील यह दी जाती है कि “बांग्ला” नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बांग्लादेश से मिलता-जुलता है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इस विषय पर विदेश मंत्रालय ने भी अपनी चिंता जताई थी।

पहले भी खारिज हो चुके हैं प्रस्ताव

2016 में राज्य सरकार ने तीन अलग-अलग भाषाओं में तीन नामों बांग्ला (बंगाली), बेंगाल (अंग्रेजी) और बंगाल (हिंदी) का सुझाव दिया था। केंद्र ने यह कहते हुए प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया कि एक राज्य के अलग-अलग भाषाओं में अलग नाम नहीं हो सकते। 2011 में सत्ता संभालने के बाद ममता बनर्जी ने 'पश्चिम बंगा' या 'पश्चिम बंगो' जैसे विकल्प सुझाए थे, लेकिन उन्हें मामूली बदलाव बताकर खारिज कर दिया गया।

कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया

किसी राज्य का नाम बदलना आसान नहीं होता। इसके लिए संसद में साधारण बहुमत से विधेयक पारित करना पड़ता है। साथ ही रेलवे, डाक विभाग, उड्डयन मंत्रालय सहित कई विभागों के रिकॉर्ड में संशोधन करना पड़ता है। इसलिए प्रक्रिया लंबी और जटिल मानी जाती है।

राजनीतिक और ऐतिहासिक पहलू

1947 के विभाजन के बाद बंगाल दो हिस्सों में बंट गया था-पूर्वी और पश्चिमी। पूर्वी हिस्सा पहले पाकिस्तान में गया और 1971 में अलग होकर बांग्लादेश बना। भारत में 'पश्चिम बंगाल' नाम बनाए रखने के पीछे तर्क यह था कि विभाजन की ऐतिहासिक स्मृति बनी रहे। ममता बनर्जी का तर्क है कि अब जब पूर्वी बंगाल बांग्लादेश बन चुका है, तो 'पश्चिम' शब्द का औचित्य नहीं रह जाता। उनका यह भी कहना है कि अंग्रेजी वर्णमाला में डब्ल्यू (W) से शुरू होने के कारण राज्य का नाम कई आधिकारिक सूचियों में अंत में आता है।