आईपीएस अधिकारियों को वेतन निर्धारण का विकल्प चुनने

IPS अधिकारियों को बड़ी राहत: वेतन निर्धारण का विकल्प चुनने के लिए मिला आखिरी मौका, 3 महीने में पूरी करनी होगी प्रक्रिया

नई दिल्ली। देशभर के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों के लिए राहत भरी खबर है। 'आईपीएस (वेतन) संशोधन नियम, 2023' के तहत वेतन निर्धारण (Pay Fixation) का विकल्प चुनने की समयसीमा चूक जाने वाले अधिकारियों को अब एक और अवसर दिया गया है। केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने एक बारगी छूट देते हुए सभी पात्र आईपीएस अधिकारियों को तीन महीने के भीतर विकल्प चुनने या दोबारा चुनने की अनुमति प्रदान की है।

बड़ी संख्या में अधिकारियों ने लगाई थी गुहार

जानकारी के अनुसार, देशभर के कई आईपीएस अधिकारियों ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को आवेदन देकर बताया था कि वे विभिन्न प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से निर्धारित समय में वेतन निर्धारण का विकल्प नहीं चुन पाए। अधिकारियों ने देरी को माफ करते हुए एक अंतिम अवसर देने की मांग की थी। इन अनुरोधों के बाद गृह मंत्रालय ने 19 मई को DoPT को प्रस्ताव भेजकर समयसीमा बढ़ाने और विशेष छूट देने का अनुरोध किया था।

गृह मंत्रालय ने राज्यों को भेजा निर्देश

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 15 जून को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और केंद्रीय पुलिस संगठनों (CPO) को पत्र जारी कर इस फैसले की जानकारी दी है। मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि सभी आईपीएस अधिकारियों को इस निर्णय से तत्काल अवगत कराया जाए ताकि वे निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी कर सकें।

DoPT ने दी ‘एक बारगी छूट’

DoPT ने गृह मंत्रालय द्वारा बताए गए कारणों पर विचार करने के बाद इस मामले में विशेष राहत देने का फैसला किया। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह केवल ‘वन-टाइम रिलैक्सेशन’  है। आदेश के अनुसार, 8 जून 2026 से तीन महीने की अवधि के भीतर अधिकारी वेतन निर्धारण का विकल्प चुन सकेंगे या आवश्यक होने पर पुनः विकल्प का चयन कर सकेंगे। 

तीन महीने बाद नहीं मिलेगी कोई राहत

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि यह आखिरी अवसर होगा। निर्धारित तीन माह की अवधि समाप्त होने के बाद किसी भी परिस्थिति में समयसीमा बढ़ाने, शर्तों में छूट देने या नया अवसर उपलब्ध कराने संबंधी कोई अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।

क्या है वेतन निर्धारण का मामला?

'आईपीएस (वेतन) संशोधन नियम, 2023' लागू होने के बाद अधिकारियों को संशोधित वेतनमान के अनुसार अपना वेतन निर्धारण कराने के लिए निर्धारित प्रारूप में विकल्प देना था। इस विकल्प के आधार पर उनकी सैलरी, एरियर और भविष्य के वेतन लाभ तय होने हैं। समयसीमा चूकने के कारण कई अधिकारियों को संभावित वित्तीय नुकसान की आशंका थी।

प्रशासनिक स्तर पर बढ़ी हलचल

केंद्र के फैसले के बाद अब राज्य सरकारों, सीएपीएफ और विभिन्न पुलिस संगठनों में संबंधित अधिकारियों को समय रहते प्रक्रिया पूरी कराने के लिए निर्देश जारी किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि अगले तीन महीनों में बड़ी संख्या में अधिकारी इस प्रक्रिया को पूरा करेंगे।