भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लेते हुए एसी फर्स्ट और

रेलवे का बड़ा फैसला: फर्स्ट-सेकेंड AC में स्टाफ बर्थ खत्म, वेटिंग वाले यात्रियों को राहत

train birth allotment for waiting passangers

नई दिल्लीः ट्रेन से सफर करने वालों के लिए राहत भरी खबर है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए ऑन-बोर्ड स्टाफ के लिए आरक्षित बर्थ व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। रेलवे ने 2016 और 2018 में जारी अपने पुराने सर्कुलर रद्द कर दिए हैं और नई गाइडलाइन को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

रेलवे बोर्ड के ताजा आदेश के मुताबिक अब एसी फर्स्ट और एसी सेकेंड क्लास में स्टाफ के नाम पर ब्लॉक की जाने वाली सीटें सामान्य यात्रियों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका मकसद सीटों का बेहतर उपयोग और यात्रियों को अधिक कंफर्म टिकट दिलाना है।

पहले क्या था नियम?

अब तक लंबी दूरी की ट्रेनों में एसी कोच के प्रवेश द्वार के पास या बीच की कुछ बर्थ सफाईकर्मियों, एसी मैकेनिक और वेंडिंग स्टाफ जैसे ऑन-बोर्ड कर्मचारियों के लिए सुरक्षित रखी जाती थीं।

इस व्यवस्था से कई बार सीटें खाली रह जाती थीं, जिससे रेलवे को राजस्व का नुकसान होता था। साथ ही, इन बर्थ के दुरुपयोग की शिकायतें भी सामने आती रही थीं।

नई व्यवस्था में क्या बदला? नई प्रणाली के तहत अब एसी फर्स्ट और एसी सेकेंड क्लास में स्टाफ के लिए कोई भी बर्थ आरक्षित नहीं रहेगी। पूरी एसी ट्रेन में कर्मचारियों को केवल थर्ड एसी में अधिकतम दो सीटें ही दी जाएंगी। यदि किसी ट्रेन में स्लीपर कोच मौजूद है, तो एसी मेंटेनेंस स्टाफ को स्लीपर क्लास में शिफ्ट किया जाएगा।

 

वेटिंग लिस्ट पर पड़ेगा असर इस बदलाव के बाद प्रत्येक ट्रेन में औसतन चार से छह अतिरिक्त प्रीमियम सीटें यात्रियों के लिए उपलब्ध होंगी। इससे वेटिंग लिस्ट घटने और कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। खासकर व्यस्त रूटों पर यात्रा करने वालों को इसका सीधा फायदा मिलेगा।

हाउसकीपिंग स्टाफ के लिए ‘स्प्रेड मॉडल’ ऑन-बोर्ड हाउसकीपिंग स्टाफ (OBHS) के लिए अब ‘स्प्रेड मॉडल’ लागू किया गया है। इसके तहत कर्मचारियों को एक ही कोच में रखने के बजाय अलग-अलग कोचों में साइड लोअर बर्थ दी जाएगी।

कोचों के बीच न्यूनतम दूरी का ध्यान रखा जाएगा, ताकि पूरे रेक में सफाई व्यवस्था की प्रभावी निगरानी हो सके और यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिलें।

वेंडिंग स्टाफ के लिए सख्त निर्देश

खाद्य सामग्री बेचने वाले वेंडिंग स्टाफ के लिए नियम और कड़े किए गए हैं। जिन ट्रेनों में पेंट्री कार उपलब्ध है, वहां वेंडिंग स्टाफ को यात्री कोच में कोई सीट नहीं मिलेगी और उन्हें पेंट्री कार में ही रहना होगा। वहीं, जिन ट्रेनों में पेंट्री कार नहीं है, वहां उन्हें स्लीपर क्लास में अधिकतम दो बर्थ दी जाएंगी।

रेलवे के इस फैसले से प्रीमियम कोचों की सीटों का बेहतर उपयोग होगा और यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी। कुल मिलाकर, यह कदम वेटिंग टिकट वालों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकता है।