भारतीय नौसेना को मिलेगी नई ताकत, नौसेना इस सप्ताह

भारतीय नौसेना को मिलेगी बड़ी ताकत: INS दुनागिरी, अग्रे और संशोधक होंगे कमीशन, समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना इस सप्ताह अपने बेड़े में तीन अत्याधुनिक युद्धपोतों को शामिल करने जा रही है। कोलकाता में आयोजित होने वाले विशेष समारोह में आईएनएस दुनागिरी, आईएनएस अग्रे और आईएनएस संशोधक को औपचारिक रूप से कमीशन किया जाएगा। यह भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण अभियान में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।  सूत्रों के मुताबिक, इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi भी शामिल हो सकते हैं। पिछले वर्ष मुंबई में एक साथ तीन नौसैनिक प्लेटफॉर्म के कमीशनिंग के बाद यह दूसरा बड़ा अवसर होगा।

INS दुनागिरी: ब्रह्मोस से लैस घातक फ्रिगेट

INS Dunagiri प्रोजेक्ट-17A का पांचवां स्टेल्थ फ्रिगेट है, जिसे Garden Reach Shipbuilders & Engineers (GRSE) ने तैयार किया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं

  • ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल से लैस
  • सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली
  • आधुनिक क्लोज-इन वेपन सिस्टम
  • CODOG (Combined Diesel or Gas) प्रणोदन प्रणाली
  • इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम

नौसेना के अनुसार, इसे रिकॉर्ड 80 महीनों में तैयार किया गया, जबकि इससे पहले बने फ्रिगेट को 93 महीने लगे थे।

INS अग्रे: दुश्मन पनडुब्बियों का शिकारी

INS Agre अर्नाला श्रेणी के पनडुब्बी रोधी उथले जलयान कार्यक्रम का पांचवां पोत है। इसकी प्रमुख खूबियां

  • हल्के टॉरपीडो से लैस
  • स्वदेशी एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर
  • अत्याधुनिक सोनार सिस्टम
  • तटीय और उथले समुद्री क्षेत्रों में संचालन की क्षमता

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा अपने पनडुब्बी बेड़े के विस्तार को देखते हुए यह पोत भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा।

INS संशोधक: समुद्र की गहराइयों का वैज्ञानिक प्रहरी

INS Sanshodhak संधायक श्रेणी के सर्वेक्षण पोत कार्यक्रम का चौथा और अंतिम जहाज है। इसकी प्रमुख विशेषताएं

  • लंबाई 110 मीटर
  • लगभग 3,300 टन भार क्षमता
  • स्वायत्त अंडरवाटर वाहन (AUV)
  • रिमोट ऑपरेटेड व्हीकल (ROV)
  • अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक सर्वे सिस्टम
  • समुद्र तल की मैपिंग और नौवहन चार्ट तैयार करने की क्षमता

यह पोत समुद्री सीमाओं की निगरानी, समुद्र तल के अध्ययन और नौवहन सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नौसेना की ताकत में होगा बड़ा इजाफा

इन तीनों प्लेटफॉर्म के शामिल होने से भारतीय नौसेना की

  • सतही युद्ध क्षमता
  • पनडुब्बी रोधी ऑपरेशन क्षमता
  • समुद्री निगरानी एवं सर्वेक्षण क्षमता

में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।  रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच ये युद्धपोत भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेंगे तथा नौसेना की ऑपरेशनल तैयारियों को नई ऊंचाई देंगे।