NFHS-6 सर्वे में भारत के मातृ और शिशु स्वास्थ्य मे

NFHS-6 रिपोर्ट में भारत को बड़ी सफलता, मातृ और शिशु स्वास्थ्य में ऐतिहासिक सुधार

भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी एक बड़ी और राहत देने वाली तस्वीर सामने आई है। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 29 मई 2026 को जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वे-6 (NFHS-6) में बताया गया है कि देश में मातृ स्वास्थ्य, शिशु पोषण और टीकाकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

यह सर्वे 2023-24 के दौरान करीब 6.79 लाख घरों में किया गया, जिसमें 715 जिलों के आंकड़े शामिल हैं। रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारत धीरे-धीरे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के मोर्चे पर मजबूत स्थिति की ओर बढ़ रहा है। हालांकि कुछ नई स्वास्थ्य चुनौतियां भी सामने आई हैं, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।

संस्थागत प्रसव और ANC में रिकॉर्ड सुधार

NFHS-6 के मुताबिक संस्थागत प्रसव दर बढ़कर 90.6% तक पहुंच गई है। यानी अब अधिकतर महिलाएं सुरक्षित स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव करवा रही हैं। यह आंकड़ा पिछले सर्वे की तुलना में बेहतर माना जा रहा है इसके साथ ही गर्भावस्था के दौरान देखभाल (ANC) में भी सुधार हुआ है। पहले तिमाही में जांच कराने वाली महिलाओं की संख्या बढ़ी है और कम से कम चार ANC विजिट का प्रतिशत भी ऊपर गया है। यह बदलाव ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत दर्शाता है  दरअसल, यह सुधार सरकारी योजनाओं और आशा-आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की जमीनी भूमिका का परिणाम माना जा रहा है।

टीकाकरण और शिशु स्वास्थ्य में मजबूती

अब समझिए, बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी तस्वीर काफी बेहतर हुई है। 12-23 महीने के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज बढ़कर 87.1% हो गया है। रोटावायरस वैक्सीन और मीजल्स की दूसरी डोज में भी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं बच्चों में डायरिया और श्वसन संक्रमण के मामलों में कमी आई है, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है.यह भी महत्वपूर्ण है कि लगभग 95% से अधिक टीकाकरण अब सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों के जरिए हो रहा है, जिससे लोगों का भरोसा सरकारी सिस्टम पर मजबूत हुआ है।

पोषण में सुधार, लेकिन चुनौतियां अब भी बाकी

NFHS-6 रिपोर्ट में सबसे बड़ी उपलब्धियों में बच्चों में स्टंटिंग और वेस्टिंग में कमी दर्ज की गई है। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में स्टंटिंग 35.5% से घटकर 29.3% पर आ गई है, हालांकि, यही रिपोर्ट यह भी बताती है कि सुधार की गति अभी संतुलित नहीं है। कुछ संकेतों में मामूली सुधार ही हुआ है, जो यह दर्शाता है कि पोषण के क्षेत्र में अभी लंबी लड़ाई बाकी है। 

महिलाओं की स्थिति और डिजिटल पहुंच ने बदला परिदृश्य

रिपोर्ट का एक अहम पहलू महिलाओं की बढ़ती डिजिटल और वित्तीय भागीदारी है। इंटरनेट उपयोग, बैंक खाते और मोबाइल फोन के स्वतंत्र उपयोग में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य निर्णयों पर भी पड़ा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब महिलाएं वित्तीय रूप से सशक्त होती हैं, तो मातृ और शिशु स्वास्थ्य के नतीजे भी बेहतर होते हैं हालांकि एक चिंता यह भी है कि शहरी जीवनशैली के साथ डायबिटीज और मोटापे जैसी बीमारियां भी तेजी से बढ़ रही हैं, जो आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती हैं।

उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियां

फिलहाल NFHS-6 यह साफ संकेत देता है कि भारत ने मातृ और शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में मजबूत प्रगति की है। लेकिन दूसरी तरफ गैर-संचारी रोगों (NCDs) का बढ़ता बोझ नई चुनौती बनकर सामने आ रहा है अब जरूरत इस बात की है कि स्वास्थ्य नीतियों में संतुलन रखा जाए। जहां एक तरफ पोषण और मातृ स्वास्थ्य को मजबूत किया जाए, वहीं दूसरी तरफ जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों पर भी नियंत्रण पाया जाए। यही संतुलन भारत को 2030 के SDG लक्ष्यों के करीब ले जा सकता है।