भारत-नेपाल बातचीत में 2 साल बाद नई शुरुआत, बोले मंत्री- हम एक ही नदियों की संतान
भारत-नेपाल संबंधों में एक बार फिर नई हलचल देखने को मिली है। करीब दो साल बाद दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय राजनीतिक बातचीत दोबारा शुरू हुई है। इस दौरान नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने दिल्ली में दिया गया बयान चर्चा में है। उन्होंने कहा कि दोनों देश सिर्फ नक्शे के पड़ोसी नहीं हैं, बल्कि 'एक ही नदियों की संतान हैं।'
दो साल बाद फिर शुरू हुई कूटनीतिक बातचीत
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल भारत के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद लगभग रुका हुआ था। इस यात्रा को रिश्तों में नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
दिल्ली में हुई अहम बैठकें
अपने दौरे के दौरान खनाल ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की। इन बैठकों में सीमा विवाद, व्यापार, ऊर्जा सहयोग, जल संसाधन और कनेक्टिविटी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने और पुराने मुद्दों को बातचीत के जरिए हल करने पर जोर दिया।
सीमा विवाद पर बातचीत का रास्ता खुला
नेपाल ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि दोनों देशों के बीच सीमा से जुड़े पुराने विवादों पर बातचीत का तंत्र फिर से सक्रिय किया जाए। शिशिर खनाल ने कहा कि ये मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं और इन्हें बातचीत से ही सुलझाना बेहतर होगा। उन्होंने यह भी माना कि जमीनी स्तर पर कुछ काम पहले से चल रहा है, जिसे सकारात्मक रूप में आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी पर फोकस
बैठक में दोनों देशों ने व्यापार और ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करने पर भी चर्चा की। साथ ही लोगों के बीच संपर्क और सीमा पार कनेक्टिविटी को बढ़ाने पर जोर दिया गया।
डिजिटल पेमेंट और रेल लिंक पर बड़ी चर्चा
इस दौरे का एक अहम पहलू डिजिटल सहयोग भी रहा। नेपाल के नेशनल क्लियरिंग हाउस लिमिटेड और भारत के नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के बीच समझौते के बाद अब सीमा पार UPI जैसे डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा जनकपुर-अयोध्या रेलवे लिंक को लेकर भी चर्चा हुई। नेपाल ने उम्मीद जताई है कि यह रेल सेवा जल्द शुरू होगी, जिससे दोनों देशों के बीच आवागमन और मजबूत होगा।
रिश्तों में नई ऊर्जा की उम्मीद
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह दौरा भारत-नेपाल संबंधों में नई ऊर्जा ला सकता है। दोनों देशों ने बातचीत और सहयोग के जरिए रिश्तों को आगे बढ़ाने की इच्छा जताई है।