गर्मी बढ़ी तो शहर जलने लगे? गाजियाबाद से कोटा तक भीषण आग की घटनाओं ने खड़े किए बड़े सवाल
नई दिल्ली। देश में बढ़ती गर्मी अब सिर्फ तापमान तक सीमित नहीं रही। बुधवार को उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में आग की कई घटनाओं ने हालात की गंभीरता दिखा दी। गाजियाबाद की एक सोसाइटी से लेकर कोटा के मॉल और उन्नाव की चलती बस तक अचानक हर जगह आग भड़कने से लोग घबराकर बाहर भागे।
राहत की बात यह रही कि समय रहते लोगों को बचा लिया गया। लेकिन सवाल उठता है कि क्या हीटवेव अब शहरी ढांचे के लिए भी खतरा बन रही है?
गाजियाबाद सोसाइटी में आग, 8 फ्लैट चपेट में
इंदिरापुरम की गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में आग अचानक भड़की और देखते ही देखते कई फ्लैटों तक फैल गई। करीब 17 फायर टेंडर मौके पर पहुंचे और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। SDRF टीम ने सर्च ऑपरेशन भी चलाया। हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन 8 फ्लैटों को नुकसान पहुंचा। इस घटना ने हाईराइज सोसाइटी की सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए।
कोटा मॉल में अफरातफरी, भीड़ में डर साफ दिखा
राजस्थान के कोटा में सिटी मॉल के पीछे एक शोरूम से आग शुरू हुई और तेजी से फैल गई। मॉल के अंदर मौजूद लोग घबराकर बाहर निकलने लगे। मौके पर पुलिस और प्रशासन को भीड़ संभालने में मशक्कत करनी पड़ी। इस तरह की घटनाएं यह दिखाती हैं कि पब्लिक प्लेस में फायर सेफ्टी ड्रिल कितनी जरूरी है, खासकर भीड़भाड़ वाले इलाकों में।
पंजाब वेयरहाउस में आग
पंजाब के बनूड़ इलाके में एक वेयरहाउस में लगी आग ने औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में ला खड़ा किया। दमकल विभाग ने काफी देर बाद आग पर काबू पाया। हालांकि नुकसान का आकलन अभी जारी है। ऐसी घटनाएं बार-बार बताती हैं कि इंडस्ट्रियल फायर सेफ्टी नियमों का पालन कितना जरूरी है, खासकर गर्मी के मौसम में।
उन्नाव में चलती बस बनी खतरा
उन्नाव में एक प्राइवेट बस अचानक आग का गोला बन गई। बस में श्रमिक सवार थे और वह औद्योगिक क्षेत्र की ओर जा रही थी। ड्राइवर और यात्रियों की सतर्कता से सभी लोग समय रहते बाहर निकल गए। वरना स्थिति गंभीर हो सकती थी। चलती बस में आग लगना सिर्फ तकनीकी फेलियर नहीं, बल्कि मेंटेनेंस और सेफ्टी चेक पर भी बड़ा सवाल है।
बढ़ती गर्मी और आग की घटनाएं: क्या है कनेक्शन?
लगातार बढ़ते तापमान के बीच इलेक्ट्रिकल लोड और ज्वलनशील सामग्री का जोखिम भी बढ़ता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि हीटवेव के दौरान आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, खासकर जहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी होती है। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि सिर्फ मौसम नहीं, सिस्टम की तैयारी भी उतनी ही जरूरी है। वरना छोटे हादसे बड़े संकट में बदल सकते हैं।