हरिद्वार और ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस, स्कर्ट

हरिद्वार-ऋषिकेश के मंदिरों में फटी जींस-स्कर्ट पर रोक: गेट पर लगे पोस्टर, “मर्यादित वस्त्र पहनकर आएं”

देहरादून। हरिद्वार और ऋषिकेश की गलियों में इन दिनों सिर्फ श्रद्धा की ही नहीं, एक नए नियम की भी चर्चा है। कई प्रमुख मंदिरों के प्रवेश द्वार पर बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए हैं। साफ लिखा है छोटे वस्त्र, हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट, कटी-फटी जींस पहनकर आने पर बाहर से ही दर्शन करें। तीर्थनगरी में आने वाले कुछ श्रद्धालु इन पोस्टरों को पढ़कर हैरान दिखे, तो कई ने इसे जरूरी कदम बताया

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मंदिर प्रबंधन का तर्क: गरिमा बनी रहे

मंदिर प्रबंधनों का कहना है कि यह फैसला किसी खास वर्ग को रोकने के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा बनाए रखने के लिए है पोस्टरों में महिलाओं और पुरुषों दोनों से पारंपरिक और मर्यादित वस्त्र पहनकर आने की अपील की गई है। जो लोग निर्धारित परिधान में नहीं होंगे, उनसे मंदिर परिसर के बाहर से ही दर्शन करने का अनुरोध किया गया है. कई मंदिरों में यह संदेश लगभग एक जैसे शब्दों में दिख रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि यह पहल व्यापक स्तर पर की गई है।

दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर में सख्ती

हरिद्वार स्थित दक्षेश्वर प्रजापति महादेव मंदिर के प्रवेश द्वार पर भी यही पोस्टर लगाए गए हैं महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव और मंदिर प्रबंधक श्रीमहंत स्वामी रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि मंदिर मनोरंजन का स्थल नहीं है।उन्होंने कहा यह आत्मरंजन का स्थान है यहां आने से पहले वेशभूषा, आचरण और भाव पवित्र होने चाहिए। कई बार युवा अनजाने में ऐसे कपड़े पहन लेते हैं जो धार्मिक मर्यादा के अनुरूप नहीं होते और बाद में विवाद का कारण बनते हैं। इसलिए पहले से स्पष्ट निर्देश देना बेहतर है। 

ऋषिकेश के इस्कॉन मंदिर में भी अपील

ऋषिकेश स्थित इस्कॉन मंदिर के बाहर भी इसी तरह का पोस्टर लगाया गया है संदेश में लिखा है हम ही हमारी भारतीय संस्कृति के रक्षक हैं। यहां भी छोटे वस्त्र, हाफ पैंट, बरमूडा, मिनी स्कर्ट, नाइट सूट और कटी-फटी जींस पहनकर आने वालों से बाहर से ही दर्शन करने को कहा गया है, मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह नियम सभी पर समान रूप से लागू होगा।

पहले भी चल चुका है अभियान

स्वामी रविंद्र पुरी महाराज ने बताया कि यह पहला अवसर नहीं है। पहले भी ड्रेस को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया था। उन्होंने सरकार द्वारा संचालित मंदिर बोर्डों और अन्य आश्रमों से भी इस दिशा में ध्यान देने की अपील की है.उनका कहना है यदि लोकाचार में मर्यादा नहीं रहेगी, तो धर्म भी सुरक्षित नहीं रहेगा। धर्म का अर्थ ही है धारण करना, और मर्यादा उसका हिस्सा है।

हरकी पैड़ी में 110 साल पुराने नियम की चर्चा

इधर, श्री गंगा सभा ने हरकी पैड़ी क्षेत्र में 10 से ज्यादा स्थानों पर अहिंदू प्रवेश निषेध के बोर्ड लगाए हैं। गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम के मुताबिक, यह कोई नया नियम नहीं बल्कि 1916 के नगर पालिका उपनियमों के तहत पहले से मौजूद प्रावधान है, 2027 के कुंभ से पहले इन नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग भी उठ रही है।

रील्स और ड्रोन पर भी सख्ती

हरकी पैड़ी क्षेत्र में फिल्मी गानों पर रील बनाने और बिना अनुमति ड्रोन उड़ाने पर भी पूर्ण प्रतिबंध की चेतावनी दी गई है। संतों का मानना है कि इससे धार्मिक वातावरण प्रभावित होता है घाटों पर अब पुलिस और स्वयंसेवकों की नजर भी कुछ ज्यादा सतर्क दिख रही है।

श्रद्धालुओं की राय बंटी हुई

कुछ श्रद्धालुओं का कहना है कि तीर्थ स्थान पर सादगी जरूरी है। वहीं कुछ युवाओं का मानना है कि कपड़ों के आधार पर रोक लगाने से संदेश गलत भी जा सकता है फिलहाल, मंदिरों के बाहर लगे पोस्टर साफ इशारा कर रहे हैं कि आने वाले समय में हरिद्वार और ऋषिकेश के धार्मिक स्थलों में ड्रेस को लेकर सख्ती बनी रहेगी. अब देखना है कि यह अपील कितनी सख्ती से लागू होती है, और श्रद्धालु इसे किस रूप में स्वीकार करते हैं।