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सरकार ने 23 नए आतंकियों को घोषित किया, अब सूची में 80 नाम; पाकिस्तान और पीओके से जुड़े कई चेहरे शामिल

नई दिल्ली। आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई लगातार और अधिक सख्त होती जा रही है। केंद्र सरकार ने शनिवार को 23 नए लोगों को आतंकवादी घोषित किया है। सरकार के अनुसार ये सभी जैश-ए-मोहम्मद (JeM), लश्कर-ए-तैयबा (LeT), द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) और जमात-उद-दावा (JuD) जैसे प्रतिबंधित आतंकी संगठनों से जुड़े हुए हैं। इस फैसले के बाद भारत सरकार द्वारा घोषित आतंकियों की कुल संख्या बढ़कर 80 हो गई है।

किस आधार पर घोषित किए गए आतंकी?

सरकार के मुताबिक सूची में शामिल लोगों की भूमिका आतंकियों की भर्ती, भारत में घुसपैठ कराने, आतंकी हमलों की साजिश रचने, आतंक के लिए धन जुटाने, हथियारों की आपूर्ति करने और आतंकवादी नेटवर्क को अन्य प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने में रही है। सुरक्षा एजेंसियों के इनपुट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन्हें आतंकवादी घोषित किया गया है।

17 पाकिस्तान से, 6 जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी

घोषित किए गए 23 आतंकियों में 17 पाकिस्तान के रहने वाले हैं, जबकि 6 जम्मू-कश्मीर के मूल निवासी बताए गए हैं। सरकारी जानकारी के अनुसार पाकिस्तान से जुड़े 17 आतंकियों में 7 पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में सक्रिय हैं। 10 पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रह रहे हैं। यह आंकड़ा सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क की सक्रियता को भी दर्शाता है।

नगरोटा और सुनजवां हमलों से जुड़े नाम भी शामिल

सरकार द्वारा जारी सूची में शामिल कुछ जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े आतंकियों का संबंध 2016 के नगरोटा आर्मी कैंप हमले और 2022 के सुनजवां आतंकी हमले से भी बताया गया है।

2016 नगरोटा आर्मी कैंप हमला

29 नवंबर 2016 को जम्मू के नगरोटा स्थित आर्मी कैंप पर सेना की वर्दी पहनकर आए तीन आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में 7 भारतीय जवान शहीद हुए थे। भारतीय सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में तीनों आतंकी मारे गए थे। जांच एजेंसियों ने इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद की भूमिका बताई थी।

2022 सुनजवां हमला

22 अप्रैल 2022 को जम्मू के सुनजवां इलाके में सीआईएसएफ जवानों को ले जा रही बस पर आतंकियों ने हमला किया था। इस हमले में एक जवान शहीद हुआ था, जबकि कई अन्य घायल हुए थे। हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी। बाद में जांच में सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क की भूमिका सामने आई थी।

प्रतिबंधित आतंकी संगठनों पर लगातार कार्रवाई

सरकार जिन संगठनों से इन आतंकियों के जुड़े होने की बात कह रही है, उनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा, द रेजिस्टेंस फ्रंट और जमात-उद-दावा शामिल हैं। ये संगठन लंबे समय से भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और भारत सहित कई देशों में प्रतिबंधित हैं।

आतंकी घोषित करने का क्या होता है प्रभाव?

किसी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित किए जाने के बाद उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई का दायरा और मजबूत हो जाता है। उसकी संपत्तियों को जब्त करने, वित्तीय नेटवर्क पर रोक लगाने, अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय बढ़ाने और उसके सहयोगियों पर कार्रवाई करने में सुरक्षा एजेंसियों को अतिरिक्त कानूनी आधार मिलता है।