CBSE के नए OSM सिस्टम पर गंभीर सवाल उठे हैं। 12वीं

OSM सिस्टम पर CBSE घिरा, 12वीं कॉपी चेकिंग में गड़बड़ी के आरोपों से मचा हड़कंप

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के नए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 12वीं बोर्ड की कॉपियों की डिजिटल जांच में गड़बड़ी के आरोपों ने सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठा दिए हैं। छात्रों से लेकर शिक्षकों तक का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी खामियों और प्रशिक्षण की कमी का असर सीधे अंकों पर पड़ा है। इसी वजह से लाखों छात्रों ने अपनी स्कैन की हुई आंसरशीट की मांग की है। मामला अब सिर्फ तकनीक का नहीं बल्कि छात्रों के भविष्य और कॉलेज एडमिशन से जुड़ी गंभीर चिंता का रूप ले चुका है।

बिना पायलट प्रोजेक्ट लागू हुआ OSM सिस्टम

रिपोर्ट्स के मुताबिक CBSE ने अपने ही गवर्निंग बॉडी के सुझावों को नजरअंदाज करते हुए OSM सिस्टम को बड़े स्तर पर लागू कर दिया। सदस्यों ने पहले इसे क्षेत्रीय स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाने की सलाह दी थी। जनवरी में दिल्ली के कुछ स्कूलों में सिर्फ 100 शिक्षकों के साथ इसका सीमित परीक्षण किया गया था। लेकिन इसे पर्याप्त नहीं माना गया और 9 फरवरी को सिस्टम लागू करने का फैसला कर लिया गया। 7 मार्च से असली मूल्यांकन शुरू हुआ, जिसके बाद समस्याएं सामने आने लगीं।

शिक्षकों ने उठाए सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल

मूल्यांकन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि उन्हें इस नए सॉफ्टवेयर की पूरी ट्रेनिंग नहीं दी गई थी। कई शिक्षक लाइव कॉपियों की जांच करते हुए ही सिस्टम को समझ रहे थे। शिक्षकों ने यह भी बताया कि स्क्रीन पर कॉपी चेक करने से लंबे समय तक काम करने के कारण थकान बढ़ी, जिससे स्टेप मार्किंग प्रभावित हुई। कुछ शिक्षकों का कहना है कि मैन्युअल जांच में जहां हर जवाब को ध्यान से देखा जा सकता था, वहीं डिजिटल स्क्रीन पर कई उत्तर छूट जाने की संभावना बढ़ गई।

स्कैनिंग और तकनीकी खामियों से बढ़ी परेशानी

OSM सिस्टम में स्कैनिंग क्वालिटी और लॉगिन समस्याओं को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आईं। कई आंसरशीट धुंधली दिखीं, जिससे मूल्यांकन प्रभावित हुआ। आंकड़ों के मुताबिक लाखों उत्तर पुस्तिकाओं में से हजारों को दोबारा स्कैन करना पड़ा और कुछ को मैन्युअल जांच से भी गुजरना पड़ा। अधिकारियों ने माना कि शुरुआती चरण में तकनीकी दिक्कतें आई थीं, लेकिन छात्रों और शिक्षकों का कहना है कि इसका सीधा असर मार्किंग पर पड़ा।

छात्रों और अभिभावकों की बढ़ती चिंता

सीबीएसई को स्कैन की गई आंसरशीट के लिए लाखों आवेदन मिले हैं, जो पिछले साल की तुलना में कई गुना अधिक हैं। छात्रों का आरोप है कि उन्हें सही मार्किंग पर भरोसा नहीं रहा। कई छात्रों ने सवाल उठाया कि ब्लर कॉपियों की जांच कैसे हुई और कुछ मामलों में उत्तर-पुस्तिकाएं बदलने या पन्ने गायब होने जैसी शिकायतें क्यों आईं। मार्क्स में गिरावट और सिस्टम की पारदर्शिता को लेकर छात्रों में असंतोष बढ़ता दिख रहा है।

CBSE के जवाब और आगे की स्थिति

सीबीएसई की ओर से कहा गया है कि डिजिटल सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए ट्रेनिंग और स्कैनिंग प्रक्रिया को मजबूत किया जा रहा है। हालांकि क्षेत्रीय पायलट प्रोजेक्ट न चलाने पर बोर्ड ने सीधा जवाब नहीं दिया। पूर्व अध्यक्षों और विशेषज्ञों ने इसे सकारात्मक कदम बताया है, लेकिन साथ ही यह भी माना है कि ट्रेनिंग, स्कैनिंग क्वालिटी और तकनीकी सुधार के बिना ऐसे सिस्टम पर पूरी तरह भरोसा करना मुश्किल है। फिलहाल OSM सिस्टम अगले सत्र में भी जारी रहेगा, लेकिन विवाद के बीच इसकी विश्वसनीयता पर बहस और तेज हो गई है।