भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीब

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट पीछे हटा, अब पटना High Court में होगी अगली लड़ाई

Bhojpur Bharat Tiwari Murder Case

भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। कथित फर्जी एनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई नहीं हुई। अदालत ने साफ किया कि इस मामले में पहले पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब मामले की कानूनी लड़ाई पटना हाईकोर्ट में आगे बढ़ेगी। याचिकाकर्ता ने भी संकेत दिया है कि वह जल्द ही हाईकोर्ट में नई याचिका दाखिल करेंगे। ऐसे में इस बहुचर्चित मामले की अगली सुनवाई अब राज्य के उच्च न्यायालय में होने की संभावना है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि इस मामले में पहले हाईकोर्ट का रुख क्यों नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों की निगरानी हाईकोर्ट प्रभावी ढंग से कर सकता है। इसी आधार पर सर्वोच्च अदालत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने की सलाह दी।

याचिका में क्या मांग की गई थी

अधिवक्ता विशाल तिवारी ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में दावा किया था कि 17 जून को भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में भरत भूषण तिवारी का एनकाउंटर फर्जी था। याचिका में इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने और कथित रूप से शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद याचिकाकर्ता ने कहा कि अब वह पटना हाईकोर्ट में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे।

राज्य सरकार पहले ही करा रही है जांच

मामले को लेकर बिहार सरकार पहले ही न्यायिक जांच आयोग का गठन कर चुकी है। आयोग की जिम्मेदारी हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश विनोद कुमार सिन्हा को सौंपी गई है। जांच के दौरान आयोग के अध्यक्ष बिलौटी गांव पहुंचकर परिजनों से मुलाकात भी कर चुके हैं। इस दौरान भरत तिवारी की मां ने दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई थी।

एनकाउंटर के बाद लगातार बना हुआ है विवाद

17 जून को पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद मामला लगातार विवादों में बना हुआ है। परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। इस घटना के बाद जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ और थाना प्रभारी पर भी कार्रवाई हुई थी। हालांकि परिवार का कहना है कि उन्हें पुलिस जांच पर भरोसा नहीं है और निष्पक्ष जांच के लिए वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे।

गांव से लेकर अदालत तक जारी है न्याय की मांग

भरत तिवारी एनकाउंटर के विरोध में बिलौटी गांव में महापंचायत भी आयोजित की गई थी, जिसमें बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। फिलहाल न्यायिक जांच जारी है। परिजनों का कहना है कि श्राद्ध कर्म पूरा होने के बाद वे न्याय की मांग को और तेज करेंगे, जबकि अब सबकी नजर पटना हाईकोर्ट में होने वाली अगली कानूनी कार्रवाई पर रहेगी।