ऑपरेशन सिंदूर: भारत ने ध्वस्त किया पाकिस्तान का परमाणु ब्लैकमेल
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय हमलों से पाकिस्तान को हुआ बड़ा नुकसान
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) यानी सिपरी की जून 2026 में जारी नई रिपोर्ट ने दक्षिण एशिया की रणनीतिक सुरक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के उस तथाकथित परमाणु सुरक्षा कवच के भ्रम को तोड़ दिया, जिसके पीछे वह दशकों से छिपता आया था।
इस सैन्य अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना और सेना ने पाकिस्तान के उन चुनिंदा एयरबेस और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया, जिन्हें उसके परमाणु हथियारों के बुनियादी ढांचे से जुड़ा माना जाता है। वैश्विक स्तर पर हथियारों और सैन्य सुरक्षा पर नजर रखने वाली संस्था सिपरी की इस आधिकारिक पुष्टि ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत ने पाकिस्तान की परमाणु ब्लैकमेलिंग की नीति को प्रभावी रूप से चुनौती दी है।
ऑपरेशन सिंदूर को बताया बड़ा सैन्य टकराव
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए भारत के ऑपरेशन सिंदूर को दशकों के सबसे बड़े सैन्य टकरावों में से एक माना गया है। सिपरी की ईयरबुक 2026 में दर्ज किया गया है कि भारत ने इस अभियान के दौरान पाकिस्तान के उन एयर और मिसाइल बेसों पर सटीक हमले किए, जिनके पास परमाणु अभियान संचालित करने की जिम्मेदारी थी।इन हमलों में पाकिस्तान के कुख्यात किराना पहाड़ी क्षेत्र को भी निशाना बनाया गया, जिसके बारे में माना जाता है कि वहां पाकिस्तान की गुप्त परमाणु हथियार और मिसाइल सुविधाएं मौजूद हैं।
भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के रणनीतिक नूर खान एयरबेस को भी निशाना बनाया, जिसे पाकिस्तान का प्रमुख परमाणु कमांड एवं कंट्रोल सेंटर माना जाता है। पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता रहा है कि भारत की किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई के जवाब में वह परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का विकल्प रखता है।
परमाणु हथियारों की होड़ में भारत आगे
सिपरी की रिपोर्ट में केवल सैन्य टकराव ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के परमाणु हथियारों की संख्या से जुड़े ताजा आंकड़े भी जारी किए गए हैं। जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, भारत का परमाणु हथियार भंडार बढ़कर 190 वॉरहेड्स तक पहुंच गया है, जबकि पाकिस्तान के पास 170 परमाणु हथियार हैं।रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने चीन और पाकिस्तान से उत्पन्न सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अपने परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम को गति दी है। इसी कारण पिछले एक वर्ष में भारत के भंडार में 10 नए परमाणु हथियार जुड़े हैं।हथियारों की संख्या में यह बढ़त भारत की रणनीतिक स्थिति को क्षेत्र में और अधिक मजबूत बनाती है तथा उसकी प्रतिरोधक क्षमता को भी सुदृढ़ करती है।