कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया कि TMC

अधीर रंजन का बड़ा दावा TMC बागी सांसद पूरा करेंगे मोदी का एजेंडा

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कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस में चल रहे सियासी तनाव के बीच कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि टीएमसी के बागी सांसदों के रुख से आने वाले समय में बीजेपी के कई अहम एजेंडे को संसद में बढ़त मिल सकती है। अधीर रंजन चौधरी के मुताबिक परिसीमन और वन नेशन वन इलेक्शन जैसे प्रस्तावित बिलों को लेकर अब राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी के कुछ बागी सांसद अप्रत्यक्ष रूप से बीजेपी की रणनीति को मजबूत कर सकते हैं।

बीजेपी के एजेंडे पर आगे बढ़ने का आरोप

अधीर रंजन ने कहा कि जिस तरह के राजनीतिक हालात बन रहे हैं, उससे बीजेपी को अपने लंबित विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने में फायदा मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जो नेता पार्टी लाइन से अलग हो रहे हैं, उन्हें अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उनका कहना था कि इस तरह के राजनीतिक बदलाव सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी दिख सकता है।

#WATCH | Delhi: On TMC’s internal rift, Congress leader Adhir Ranjan Chowdhury says, “Their (TMC) strategy was to poach everyone from our (Congress) MLAs down to our elected panchayat representatives, effectively destroying the Congress and absorbing its members. Back then, the… pic.twitter.com/eTHjkTInEq

— ANI (@ANI) June 9, 2026

टीएमसी और बीजेपी पर तीखा तंज

कांग्रेस नेता ने टीएमसी की पुरानी राजनीति का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में पहले भी सत्ता और संगठन के स्तर पर इसी तरह की राजनीतिक खींचतान देखी गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब वही पैटर्न राष्ट्रीय राजनीति में दिख रहा है, जहां दलों के भीतर टूट और नए गठजोड़ उभर रहे हैं। अधीर रंजन ने कहा कि राजनीतिक दलों में चल रहे इस तरह के बदलाव लोकतंत्र की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं और आने वाले चुनावों में इसका असर साफ दिखेगा।

चुनावी राजनीति पर भी टिप्पणी

बहरामपुर चुनाव का जिक्र करते हुए अधीर रंजन ने कहा कि वहां मुकाबला बेहद कठिन था और सभी दलों ने पूरी ताकत झोंकी थी। उन्होंने कहा कि चुनावी रणनीति में हर पार्टी अपने स्तर पर सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच असली मुद्दों पर चर्चा कम हो रही है, जो लोकतांत्रिक बहस के लिए ठीक नहीं है।

राष्ट्रीय एजेंडे पर बढ़ी बहस

वन नेशन वन इलेक्शन और परिसीमन जैसे मुद्दों को लेकर पहले से ही राजनीतिक बहस चल रही है। अधीर रंजन के इस बयान के बाद यह बहस और तेज हो गई है कि क्या मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम इन प्रस्तावों की दिशा को प्रभावित कर सकता है।