कनाडा और ब्रिटेन में सख्त PR नियमों के बीच छात्र ज

विदेश में पढ़ाई का ट्रेंड बदला: कनाडा-यूके से हटकर अब जर्मनी बना छात्रों की पहली पसंद

विदेश में उच्च शिक्षा के लिए भारतीय छात्रों का रुझान तेजी से बदल रहा है। हाल के वर्षों में कनाडा और ब्रिटेन में सख्त वीजा और पीआर नियमों के कारण अब छात्र यूरोप, खासकर जर्मनी की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में जर्मनी में विदेशी छात्रों की संख्या 4.20 लाख तक पहुंचने का अनुमान है। जर्मन अकादमिक विनिमय सेवा और उच्च शिक्षा अनुसंधान केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में यह संख्या 4.02 लाख थी, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर रहा।

इस वृद्धि में भारत की बड़ी भूमिका है। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 59 हजार भारतीय छात्र वर्तमान में जर्मनी में अध्ययन कर रहे हैं, जो पिछले एक साल में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र से आने वाले छात्रों की हिस्सेदारी कुल विदेशी छात्रों में 33 प्रतिशत है।

क्यों बढ़ रहा है जर्मनी का आकर्षण

जर्मनी में सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में पढ़ाई लगभग मुफ्त होती है। छात्रों को केवल 150 से 250 यूरो प्रति सेमेस्टर प्रशासनिक शुल्क देना पड़ता है। इसके अलावा 18 महीने का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा और सरकारी छात्रवृत्तियां भी छात्रों को आकर्षित कर रही हैं। इसके उलट कनाडा और ब्रिटेन में हाल के वर्षों में पीआर और वीजा नियमों को सख्त किया गया है, जिससे छात्रों के लिए वहां पढ़ाई और स्थायी निवास पाना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।

 इमीग्रेशन विशेषज्ञ पवन कुमार गुप्ता के अनुसार, जर्मनी फिलहाल आसान अवसर उपलब्ध करा रहा है, लेकिन कनाडा, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया अभी भी कई छात्रों की प्राथमिकता बने हुए हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में जर्मन संस्थान वीजा मेलों और प्रचार अभियानों के जरिए और अधिक छात्रों को आकर्षित करने की कोशिश करेंगे।