NEET-UG 2026 री-एग्जाम के दौरान देशभर में कड़ी सुर

NEET री-एग्जाम में सख्ती का असर, एक मिनट की देरी ने छीना परीक्षा का मौका

NEET Re Exam 2026

NEET-UG 2026 के री-एग्जाम ने एक बार फिर परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा प्रोटोकॉल को सुर्खियों में ला दिया है। लाखों छात्रों के लिए यह सिर्फ एक परीक्षा नहीं बल्कि भविष्य तय करने वाला दिन था, लेकिन कई जगहों पर सख्त नियमों ने अभ्यर्थियों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

देशभर के 551 शहरों और विदेश के 14 शहरों में आयोजित इस परीक्षा में 22.79 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए। पेपर लीक विवाद के बाद आयोजित री-एग्जाम में सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी रही कि कुछ छात्रों को मामूली देरी या ड्रेस कोड संबंधी कारणों से परेशानी का सामना करना पड़ा।

देर से पहुंचने वालों के लिए बंद हुए दरवाजे

परीक्षा केंद्रों पर दोपहर 1:30 बजे के बाद किसी भी अभ्यर्थी को प्रवेश नहीं दिया गया। मुंबई में दो और बेंगलुरु में चार छात्रों को सिर्फ कुछ मिनट की देरी के कारण परीक्षा से बाहर रहना पड़ा। बेंगलुरु में कुछ छात्राओं ने केंद्र में प्रवेश के लिए रेलिंग तक पार करने की कोशिश की, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद गेट नहीं खोले गए। इस घटना ने परीक्षा नियमों की कठोरता पर फिर बहस छेड़ दी है।

ड्रेस कोड और धार्मिक प्रतीकों पर बढ़ी सख्ती

कई राज्यों से सुरक्षा जांच के दौरान अलग-अलग घटनाएं सामने आईं। अजमेर में हिजाब पहनकर पहुंची एक छात्रा को शुरुआत में प्रवेश से रोका गया, हालांकि बाद में उसे अनुमति मिल गई। भोपाल में छात्रों के हाथों में बंधे कलावे हटवाए गए, जबकि उत्तर प्रदेश में कई छात्राओं को इयररिंग्स उतारने पड़े। उदयपुर में नोज पिन न निकलने पर छात्रा की नाक पर टेप लगाकर उसे परीक्षा कक्ष में भेजा गया। इन घटनाओं ने सुरक्षा और व्यक्तिगत आस्था के बीच संतुलन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

कपड़ों तक में हुई जांच

री-एग्जाम के दौरान सिर्फ दस्तावेजों की नहीं बल्कि कपड़ों की भी बारीकी से जांच की गई। राजस्थान के भीलवाड़ा में कुछ अभ्यर्थियों की टी-शर्ट से मेटल बटन हटाए गए। वहीं कोटा में एक छात्र की फुल स्लीव टी-शर्ट की बाजू काटकर उसे परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया गया। परीक्षा अधिकारियों का तर्क था कि किसी भी तरह की इलेक्ट्रॉनिक या संदिग्ध सामग्री की संभावना को पूरी तरह खत्म करना जरूरी था।

पेपर लीक के बाद अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था

मई में आयोजित परीक्षा रद्द होने के बाद इस बार NTA ने सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया। देशभर में दो लाख से अधिक सुरक्षाकर्मी, 674 सिटी कोऑर्डिनेटर और 6,669 ऑब्जर्वर तैनात किए गए। पहली बार प्रश्न पत्रों की सुरक्षित ढुलाई के लिए भारतीय वायुसेना के विमान और हेलिकॉप्टरों की मदद ली गई। 200 से ज्यादा उड़ानों के जरिए पेपर विभिन्न जोन तक पहुंचाए गए ताकि किसी तरह की लीक या छेड़छाड़ की आशंका न रहे।

तकनीक से निगरानी की गई मजबूत

री-एग्जाम की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर तकनीकी निगरानी का इस्तेमाल किया गया। NTA के अनुसार 95 हजार से अधिक परीक्षा केंद्रों पर CCTV व्यवस्था की गई और 1.38 लाख से ज्यादा कैमरे लगाए गए। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के दुरुपयोग को रोकने के लिए 51 हजार से अधिक जैमर सक्रिय किए गए। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर इन व्यवस्थाओं की लगातार मॉनिटरिंग की गई ताकि परीक्षा प्रक्रिया पर किसी तरह का सवाल न उठे।

दबाव के बीच सामने आई दुखद घटना

परीक्षा के दिन हैदराबाद से एक चिंताजनक खबर भी सामने आई। 19 वर्षीय छात्रा का शव उसके अपार्टमेंट में फंदे से लटका मिला। शुरुआती जांच में पुलिस को परीक्षा के दबाव की आशंका है। मौके से मिले नोट में छात्रा ने अपनी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया। यह घटना प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते मानसिक दबाव और उससे जुड़ी चुनौतियों की ओर भी ध्यान खींचती है।