सेंसेक्स 800 अंक चढ़कर 75,000 के पार पहुंचा, निफ्ट

बाजार की ग्रीन शुरुआत, सेंसेक्स 800 अंक चढ़ा, क्रूड ऑयल सस्ता होने से राहत

भारतीय शेयर बाजार में 20 मार्च को जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 800 अंक की बढ़त के साथ 75,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। वहीं निफ्टी में भी 240 अंकों की तेजी दर्ज की गई और यह 23,240 के स्तर पर पहुंच गया.बाजार में यह तेजी बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भारी खरीदारी के चलते देखने को मिली।

बाजार में तेजी की दो वजे

  1. क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है, जिससे ग्लोबल बाजार को राहत मिली है।
  2. वैल्यू बाइंग: पिछले सत्र में बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की, जिससे बाजार में तेजी आई।

एशियाई और अमेरिकी बाजारों का हाल

एशियाई बाजार

  • जापान का बाजार वर्नल इक्विनॉक्स के कारण बंद रहा
  • साउथ कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 0.74% चढ़ा
  • हांगकांग का हैंगसेंग 0.63% गिरा
  • चीन का शंघाई कंपोजिट इंडेक्स 0.16% बढ़ा

अमेरिकी बाजार

  • डाउ जोन्स 203 अंक गिरकर बंद
  • नैस्डैक 0.28% की गिरावट में रहा
  • S&P 500 भी 0.27% नीचे बंद हुआ  

क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट

क्रूड ऑयल की कीमतों में आज करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड अब 106–107 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है.हालांकि, हाल के दिनों में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। ईरान और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते पहले ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था।

रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर

विदेशी बाजार में दबाव के चलते भारतीय रुपया भी कमजोर बना हुआ है। डॉलर के मुकाबले रुपया 93.24 के स्तर पर पहुंच गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है.विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल अनिश्चितता और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय करेंसी पर पड़ रहा है।

पिछले सत्र में बड़ी गिरावट

इससे पहले 19 मार्च को शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई थी ,सेंसेक्स 2497 अंक (3.26%) गिरा,  निफ्टी 776 अंक (3.26%) नीचे आया, यह गिरावट पिछले करीब 22 महीनों की सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है।

आगे क्या…

20 मार्च का कारोबारी सत्र बाजार के लिए राहत भरा रहा। क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट और निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी। हालांकि, रुपया अभी भी दबाव में है और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव आगे भी बाजार को प्रभावित कर सकता है।