सेंसेक्स-निफ्टी में लगातार दबाव, वैश्विक तनाव से शेयर बाजार लाल निशान पर बंद
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में अस्थिरता का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखा। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, कमजोर रुपये और वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के चलते घरेलू शेयर बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों की चिंता बढ़ी
कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 852.49 अंक यानी 1.09 प्रतिशत गिरकर 77,664 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 205.05 अंक यानी 0.84 प्रतिशत टूटकर 24,173.05 पर आ गया। दिन के दौरान दोनों प्रमुख इंडेक्स में करीब 1 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। कारोबार की शुरुआत भी कमजोरी के साथ हुई थी और पूरे सत्र में बाजार दबाव में रहा।
दो दिनों में 1600 अंक टूटा सेंसेक्स
पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स लगभग 1600 अंक यानी करीब 2 प्रतिशत तक गिर चुका है। इसी अवधि में निफ्टी में भी करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। इससे निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर पड़ा है।
फार्मा को छोड़ अधिकांश सेक्टर कमजोर
बाजार में सेक्टरवार रुझान मिला-जुला रहा।
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निफ्टी फार्मा में 2.36 प्रतिशत की तेजी
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निफ्टी मीडिया में 0.90 प्रतिशत की बढ़त
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ऑटो सेक्टर में 2.35 प्रतिशत की गिरावट
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पीएसयू बैंक में 2.19 प्रतिशत की गिरावट
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रियल्टी और आईटी सेक्टर भी दबाव में रहे
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी कमजोरी के साथ बंद हुए।
रुपये पर दबाव, डॉलर के मुकाबले कमजोरी जारी
शेयर बाजार के साथ-साथ विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। भारतीय रुपया लगातार चौथे सत्र में कमजोर हुआ और एक महीने में दूसरी बार 94 के स्तर को पार कर गया। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी ने आयात लागत और महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
कच्चे तेल की कीमतों से बढ़ा दबाव
होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव और नाकाबंदी जैसी स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं। ब्रेंट क्रूड में भी तेजी जारी है, जो 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। तेल कीमतों में यह उछाल भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा कर रहा है।
अमेरिका-ईरान वार्ता में अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से वैश्विक निवेशक सतर्क हो गए हैं। इसी वजह से उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का दबाव देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है।