तेजी से बदलते बाजार में सेबी को मजबूत करने पर जोर, संसदीय समिति का समर्थन
भारत के पूंजी बाजार में तेज बदलाव के बीच संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति ने बड़ा संकेत दिया है। समिति ने माना कि बढ़ते निवेश और नई चुनौतियों के बीच सेबी को और अधिक सक्षम बनाना जरूरी है। भाजपा सांसद भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली इस समिति ने कहा कि बाजार में किसी भी संभावित संकट को पहले ही रोकने के लिए मजबूत नियामक ढांचा समय की जरूरत बन चुका है।
यह चर्चा प्रस्तावित प्रतिभूति बाजार संहिता 2025 को लेकर हुई। इसमें मौजूदा तीन कानूनों को मिलाकर एक सरल और मजबूत व्यवस्था बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
संसदीय समिति का रुख और समर्थन
संसदीय वित्त संबंधी स्थायी समिति ने साफ किया कि भारत के तेजी से बढ़ते प्रतिभूति बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए नियामक संस्था सेबी को अधिक शक्तियां मिलनी चाहिए। समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने कहा कि बाजार जितना तेज़ी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से जोखिम भी बदल रहे हैं और उन्हें नियंत्रित करने के लिए पहले से मजबूत व्यवस्था जरूरी है।
नए बाजार संहिता का ढांचा और उद्देश्य
प्रस्तावित प्रतिभूति बाजार संहिता 2025 का मकसद एक नियम-आधारित प्रणाली तैयार करना है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़े और व्यक्तिगत विवेक पर निर्भरता कम हो। इस विधेयक में तीन पुराने कानूनों को एक साथ जोड़कर एक आधुनिक ढांचा बनाने की कोशिश की गई है, जो तकनीक आधारित बाजार की जरूरतों को भी पूरा कर सके।
निवेशक सुरक्षा और नियामकीय बदलाव
समिति ने माना कि मध्यम वर्ग के बढ़ते निवेश को देखते हुए निवेशक सुरक्षा को प्राथमिकता देना जरूरी है। इसी दिशा में सेबी के बोर्ड में सदस्यों की संख्या 9 से बढ़ाकर 15 करने और हितों के टकराव को रोकने के लिए सख्त नियम लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संतुलित हो सके।
आगे की प्रक्रिया और रिपोर्ट टाइमलाइन
समिति को अब तक विभिन्न संस्थानों से 1,055 सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिन्हें सरकार के पास भेजा जा चुका है। महताब ने बताया कि समिति शुक्रवार को आर्थिक मामलों के सचिव के साथ चर्चा जारी रखेगी और अगले महीने तक रिपोर्ट तैयार कर मानसून सत्र के पहले सप्ताह में संसद में पेश करने का लक्ष्य रखा गया है।