RBI मीटिंग से पहले संकेत: ब्याज दर में राहत मुश्किल, तेल और ग्लोबल संकट बने बाधा
महंगाई और ग्लोबल तनाव के बीच होने जा रही इस बार की RBI बैठक से राहत की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को झटका लग सकता है। ताजा संकेत बता रहे हैं कि फिलहाल ब्याज दरों में कटौती आसान नहीं दिख रही।
6-8 अप्रैल की बैठक पर टिकी नजरें
भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 6 से 8 अप्रैल के बीच होने वाली है। बाजार में पहले उम्मीद थी कि इस बार रेपो रेट में कुछ कमी की जा सकती है, लेकिन हालात तेजी से बदले हैं। एसबीआई रिसर्च की नई रिपोर्ट साफ संकेत देती है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। मौजूदा रेपो रेट 5.25% पर ही बरकरार रह सकता है।
वेस्ट एशिया का तनाव बना बड़ा फैक्टर
ग्लोबल स्तर पर हालात तेजी से बदले हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, खासकर इजरायल और ईरान के बीच टकराव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर डाला है। तेल सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट में संकट की आशंका ने कच्चे तेल की कीमतों को $100 प्रति बैरल के ऊपर बनाए रखा है। इससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर सीधा दबाव पड़ रहा है।
रुपया कमजोर, बढ़ेगी महंगाई की मार
डॉलर के मुकाबले रुपया 93 के पार पहुंचना चिंता बढ़ाने वाला संकेत है। कमजोर रुपये का सीधा असर आयातित सामान की कीमतों पर पड़ता है, जिससे ‘इंपोर्टेड इन्फ्लेशन’ बढ़ती है। इसके साथ ही ‘सुपर एल नीनो’ जैसी जलवायु स्थितियां भी महंगाई को और बढ़ा सकती हैं। ऐसे में आम लोगों के लिए रोजमर्रा का खर्च और बढ़ने की आशंका है।
अगले महीनों में राहत की उम्मीद कम
रिपोर्ट के मुताबिक, कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित महंगाई अगले तीन तिमाहियों तक 4.5% से ऊपर रह सकती है। यानी RBI के लिए ब्याज दरों में कटौती करना फिलहाल जोखिम भरा फैसला होगा। यही वजह है कि फरवरी की तरह इस बार भी ‘वेट एंड वॉच’ रणनीति अपनाई जा सकती है।
लिक्विडिटी पर फोकस, ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ पर नजर
ब्याज दरों में बदलाव की बजाय RBI का ध्यान इस बार बाजार की लिक्विडिटी को संतुलित रखने पर रह सकता है। सरकारी बॉन्ड यील्ड को कंट्रोल करने के लिए ‘ऑपरेशन ट्विस्ट’ जैसे कदम उठाने की चर्चा है। इसमें लंबी अवधि के बॉन्ड खरीदे जाते हैं और छोटी अवधि के बॉन्ड बेचे जाते हैं, जिससे बाजार में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश होती है।