किसान क्रेडिट कार्ड लोन अब 6 साल में चुकाएं, RBI का नया ड्राफ्ट… मिट्टी जांच और ऑर्गेनिक खेती को भी फंड
नई दिल्ली। किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। अब किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का लोन 6 साल तक की अवधि में चुकाया जा सकेगा। इतना ही नहीं, खेती और पशुपालन के साथ-साथ मिट्टी की जांच, रियल टाइम वेदर फोरकास्ट और ऑर्गेनिक फार्मिंग जैसी आधुनिक जरूरतों के लिए भी फाइनेंशियल सपोर्ट मिलेगा। इसके लिए Reserve Bank of India (RBI) ने KCC स्कीम को ज्यादा लचीला और आधुनिक बनाने के लिए संशोधित गाइडलाइंस का ड्राफ्ट जारी किया है। 6 मार्च 2026 तक इस पर पब्लिक और स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक मांगा गया है।
KCC स्कीम क्या है और क्यों अहम है?
किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम का मकसद किसानों को समय पर और सस्ती दर पर लोन उपलब्ध कराना है। इसके तहत किसान खेती, हार्वेस्ट के बाद के खर्च, मार्केटिंग, घरेलू जरूरतें और फार्म एसेट्स की मेंटेनेंस के लिए क्रेडिट ले सकते हैं। 2019 में इस स्कीम का दायरा बढ़ाकर एनिमल हस्बेंड्री, डेयरी और फिशरीज को भी शामिल किया गया था।
RBI के ड्राफ्ट में क्या बड़े बदलाव?
RBI के प्रस्तावित बदलावों का मकसद स्कीम को ज्यादा पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनाना है।
1. फसल सीजन का स्टैंडर्डाइजेशन- कम अवधि की फसल के लिए 12 महीने और लंबी अवधि की फसल के लिए 18 महीने का साइकिल तय किया गया है। इससे सभी बैंकों में लोन सैंक्शन और रीपेमेंट शेड्यूल एक जैसा रहेगा।
2. लोन चुकाने की अवधि 6 साल- अब KCC लोन की अधिकतम अवधि 6 साल तक होगी। इससे खासकर लॉन्ग ड्यूरेशन क्रॉप्स उगाने वाले किसानों को राहत मिलेगी।
3. ड्रॉइंग लिमिट असल लागत से जुड़ी- हर फसल सीजन के स्केल ऑफ फाइनेंस के मुताबिक क्रेडिट लिमिट तय होगी, ताकि किसानों को जरूरत के अनुसार पर्याप्त फंड मिल सके।
4. मॉडर्न टेक्नोलॉजी खर्च भी शामिल- फार्म एसेट्स की रिपेयर और मेंटेनेंस के लिए 20% अतिरिक्त प्रावधान में अब टेक्नोलॉजी से जुड़े खर्च भी शामिल किए गए हैं।
अब ये खर्च भी होंगे कवर
ड्राफ्ट में 20% अतिरिक्त प्रावधान के तहत इन खर्चों को शामिल किया गया है मिट्टी की टेस्टिंग, रियल टाइम वेदर फोरकास्ट, ऑर्गेनिक फार्मिंग या गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज के लिए सर्टिफिकेशन। इससे किसानों को आधुनिक खेती अपनाने में आसानी होगी।
किसानों को क्या फायदा?
लंबी रीपेमेंट अवधि से कर्ज चुकाने का दबाव कम होगा। क्रेडिट लिमिट असली लागत से जुड़ने पर फंड की कमी नहीं रहेगी। टेक्नोलॉजी और ऑर्गेनिक फार्मिंग को सपोर्ट मिलने से खेती ज्यादा टिकाऊ और लाभदायक बन सकती है। साथ ही महंगे अनौपचारिक कर्ज पर निर्भरता भी घटेगी।