सरकार ने सोना-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई तो बाज

सोना ₹9 हजार उछला, बाजार में हलचल: ड्यूटी बढ़ते ही सेंसेक्स संभला, ज्वेलरी कारोबारियों की बढ़ी चिंता

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सरकार के एक फैसले ने बुधवार को सर्राफा बाजार और शेयर बाजार दोनों में हलचल बढ़ा दी। सोना-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ते ही गोल्ड की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया, जबकि शेयर बाजार सीमित बढ़त के साथ बंद हुआ। 10 ग्राम सोना एक झटके में ₹9,345 महंगा होकर ₹1,60,977 पर पहुंच गया। वहीं चांदी ₹22,853 उछलकर ₹2,87,720 प्रति किलो हो गई। बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों का रुख भी तेजी से बदला और बाजार में मेटल शेयरों में खरीदारी बढ़ गई।

सरकार इस फैसले को विदेशी मुद्रा बचाने और आयात कम करने की रणनीति बता रही है, लेकिन ज्वेलरी कारोबारियों और ट्रेड एक्सपर्ट्स को डर है कि इसका असर मांग, बाजार सप्लाई और स्मगलिंग तक पर दिख सकता है।

ड्यूटी बढ़ते ही गोल्ड मार्केट में मचा उछाल

केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर कुल प्रभावी इंपोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% कर दी है। इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस शामिल है। फैसले के कुछ घंटों के भीतर ही सर्राफा बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर चली गईं। कारोबारियों के मुताबिक अचानक बढ़ी लागत का सीधा असर ग्राहकों पर पड़ा है। शादी सीजन के बीच आई इस तेजी ने खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है। कई शहरों में ज्वेलरी शोरूम पर ग्राहक सिर्फ भाव पूछते नजर आए, खरीदारी कम हुई।

शेयर बाजार ने कैसे दिया रिएक्शन

सोने की कीमतों में भारी उछाल के बीच शेयर बाजार में मिला-जुला असर देखने को मिला। सेंसेक्स 50 अंक चढ़कर 74,609 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 33 अंक की बढ़त के साथ 23,413 तक पहुंच गया। मेटल सेक्टर में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। बाजार को उम्मीद है कि घरेलू मेटल और कमोडिटी कंपनियों को ऊंची कीमतों का फायदा मिल सकता है। हालांकि IT सेक्टर दबाव में रहा। निवेशकों की नजर अब डॉलर, कच्चे तेल और पश्चिम एशिया के तनाव पर बनी हुई है।

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड उपभोक्ता है। देश में मांग पूरी करने के लिए बड़ी मात्रा में सोना विदेश से आयात किया जाता है, जिससे डॉलर का भारी बहाव बाहर जाता है। सरकार का मानना है कि ऊंची ड्यूटी लगाने से आयात घटेगा और चालू खाता घाटा नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। ऐसे समय में यह फैसला आया है जब रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड कमजोरी पर पहुंच चुका है। अमेरिका-ईरान तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना चाहती है।

कारोबारियों को क्यों सता रहा स्मगलिंग का डर

ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने फैसले पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि ज्यादा टैक्स का सबसे बड़ा असर अवैध गोल्ड ट्रेड पर पड़ सकता है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता के मुताबिक सरकार का उद्देश्य भले आर्थिक संतुलन बनाना हो, लेकिन ऊंची कीमतों के बीच मांग कमजोर पड़ सकती है। कारोबारियों को यह भी डर है कि जब-जब ड्यूटी ज्यादा बढ़ी है, तब-तब गोल्ड स्मगलिंग में उछाल देखने को मिला है। 2024 में ड्यूटी घटने के बाद तस्करी में कमी आई थी, इसलिए अब पुरानी स्थिति लौटने की आशंका जताई जा रही है।

बैंक और आयातकों पर भी बढ़ा दबाव

हाल ही में 3% IGST नियमों में बदलाव के बाद बैंक पहले से ही टैक्स प्रक्रिया को लेकर उलझन में थे। कई बैंकों ने कुछ समय के लिए गोल्ड इंपोर्ट रोक दिया था। अब नई ड्यूटी लागू होने के बाद आयातकों की लागत और बढ़ गई है। अनुमान है कि अप्रैल में देश का गोल्ड इंपोर्ट सिर्फ 15 टन रहा, जो कोविड काल को छोड़कर पिछले तीन दशक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है। थोक कारोबारियों का कहना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो बाजार में सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है।