ATF कीमतों में बढ़ोतरी के बाद एयरलाइंस ने किराए बढ

हवाई किराया बढ़ा तो सरकार सख्त, एयरलाइंस के साथ जल्द बैठक

Flight Rate Hike

नई दिल्ली। एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के बाद देश में हवाई यात्रा महंगी हो गई है। बढ़ते किरायों को लेकर केंद्र सरकार अब सक्रिय हो गई है और एयरलाइंस के साथ जल्द बैठक करने की तैयारी में है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार एयरलाइंस से उनकी प्राइसिंग स्ट्रैटेजी पर स्पष्टीकरण मांग रही है, ताकि यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। हालांकि अभी तक कोई औपचारिक निर्देश जारी नहीं किया गया है।

ATF के दाम बढ़ने से बढ़ा किराया

हाल ही में ATF की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने एविएशन सेक्टर को सपोर्ट देने के लिए कुल 25% तक वृद्धि की अनुमति दी, लेकिन घरेलू उड़ानों के लिए प्रभावी बढ़ोतरी को करीब 8.5% तक सीमित रखा गया। वहीं, अंतरराष्ट्रीय और चार्टर्ड उड़ानों के लिए ATF के दाम लगभग दोगुने हो गए हैं-

इंटरनेशनल ATF: ₹96,638 से बढ़कर ₹2,07,341 प्रति किलोलीटर (+114%) डोमेस्टिक ATF: ₹96,638 से बढ़कर ₹1,04,927 प्रति किलोलीटर (+8.5%)

इंडिगो ने बदला फ्यूल सरचार्ज स्ट्रक्चर

देश की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo ने फ्यूल सरचार्ज में बड़ा बदलाव किया है। पहले जहां ₹425 का फ्लैट सरचार्ज लगता था, अब इसे दूरी के आधार पर तय किया गया है।

घरेलू उड़ानों के लिए नया सरचार्ज:

0–500 किमी: ₹275 501–1000 किमी: ₹400 1001–1500 किमी: ₹600 1501–2000 किमी: ₹800 2000 किमी से ज्यादा: ₹950

इस बदलाव से छोटी दूरी के यात्रियों को कुछ राहत मिली है, लेकिन लंबी दूरी की उड़ानें महंगी हो गई हैं।

इंटरनेशनल रूट्स पर बड़ा असर

अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा गया है। यूरोप जैसे लॉन्ग-हॉल रूट्स पर IndiGo ने फ्यूल सरचार्ज को ₹10,000 तक बढ़ा दिया है। नई दरें 2 अप्रैल से लागू हो चुकी हैं।

क्यों बढ़ता है फ्यूल सरचार्ज

एविएशन विशेषज्ञों के मुताबिक, किसी भी एयरलाइन की कुल ऑपरेटिंग लागत में फ्यूल का हिस्सा करीब 40% होता है। ऐसे में ATF कीमतों में मामूली बदलाव भी सीधे किराए पर असर डालता है। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होता है, तो एयरलाइंस बेस किराया बढ़ाने के बजाय फ्यूल सरचार्ज जोड़ देती हैं, जिसे बाद में घटाया या हटाया भी जा सकता है।

सरकार के दखल से मिल सकती है राहत

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार के हस्तक्षेप के बाद एयरलाइंस को अपने बढ़े हुए सरचार्ज पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। सरकार की कोशिश है कि एयरलाइंस पूरा बोझ यात्रियों पर न डालें, बल्कि इसे संतुलित तरीके से समायोजित करें। यदि बातचीत सफल रहती है, तो आने वाले दिनों में कुछ रूट्स पर किराए में राहत देखने को मिल सकती है।