Thursday, February 26, 2026

आयुर्वेद में तुलसी को सिर्फ पौधा नहीं, बल्कि प्राकृतिक औषधि माना गया है। बदलते मौसम और प्रदूषण के कारण जब इम्यूनिटी कमजोर होती है, तब तुलसी शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में मदद करती है।

Editor Name: Swadesh News

हम अक्सर संक्रमण और अंदरूनी सूजन को नजरअंदाज कर देते हैं। तुलसी में मौजूद एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण शरीर को बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करते हैं।

तुलसी को “क्वीन ऑफ हर्ब्स” कहा जाता है। इसमें एडाप्टोजेनिक गुण पाए जाते हैं, जो मानसिक तनाव कम करते हैं। यह दिमाग और नर्वस सिस्टम को संतुलित रखने में सहायक मानी जाती है।

तुलसी में यूजेनॉल, कैम्फर, लिनालूल और फ्लेवोनोइड्स जैसे तत्व होते हैं। ये इम्यून सिस्टम को मजबूत करते हैं और मुंह व गले की सेहत सुधारने में मदद करते हैं। खांसी, जुकाम और गले की खराश में भी यह लाभकारी है।

तुलसी के पत्ते सीधे चबा सकते हैं। तुलसी का पानी बनाकर पी सकते हैं या चाय में मिलाकर इसका सेवन कर सकते हैं। नियमित और सीमित मात्रा में सेवन फायदेमंद हो सकता है।

लसी कई फायदे देती है, लेकिन किसी भी जड़ी-बूटी का नियमित सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। डायबिटीज, हृदय रोग या अन्य गंभीर बीमारियों में खुद से इलाज न करें।