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यादें : गुम हुई ‘चांदनी’

यादें : गुम हुई ‘चांदनी’
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श्रीदेवी, किसने यह हक दिया, तुम्हें ? ऐसा ‘सदमा’ तुम हमें दोगी? बेशक तुम ‘चांदनी’ हो और ‘रूप की रानी’ भी, पर तुम्हारा कोई भी चाहने वाला ऐसा ‘हिम्मतवाला’ नहीं है जो तुम्हारी ‘जुदाई’ को बर्दाश्त कर सके।
यह ‘लम्हे’ वाकई अंदर तक तोड़ रहे हैं। अभी-अभी तो तुम अपने चाहने वालों को सिखा रहीं थीं ‘इंग्लिश विंग्लिश’, एक ‘मॉम’ बनकर। अचानक ‘आखिरी रास्ता’ क्यों चुन लिया। गायब तो ‘मिस्टर इंडिया’ होता था ‘जूली’, तुमने ऐसा क्यों किया जवाब दो।
खबर आई है कि दुबई से कि तुम्हारे दिल ने देर रात अचानक धड़कना बंद कर दिया। ‘खुदा गवाह’ है, तुम तो हम सबके दिलों में धड़कती थी? अब कौन कहेगा, कौन गाएगा, ‘मेरे हाथों में नौ-नौ चूडियां हैं’ ये तुमने ठीक नहीं किया श्रीदेवी। महज चार साल की उम्र में जब बच्चे ठीक से बोल भी नहीं पाते, तब तुम रुपहले पर्दे पर सिर्फ आई ही नहीं, छा गई। आज एक पीढ़ी प्रौढ़ हो गई है, जो आज भी याद करता है अपने युवा मन को, जो तुम्हारे रंगीन फिल्मी सफर के साथ झूमा है और एक पीढ़ी आज ऐसी भी है जो किशोर वय की है, कच्ची उम्र की है, जो तुम्हें देखकर सीख रही है, खुद को तराशने का हौसला।
याद आता है ‘मॉम’ का तुम्हारा वह संवाद जो तुम अपने पति से कहती हो, ठीक उस समय जब बेटी आर्या तुमसे दूर जा रही है, रिश्ते को निभा नहीं रही है। तुम्हारे पति (फिल्म में) कहते हैं, मैं समझाता हूं उसे। तुम कहती हो हमें उसे समझाने की नहीं उसे समझने की जरूरत है। ‘मॉम’ तुम पर्दे पर इतनी संवेदनशील थीं, समझदार थीं, अब बताओ हमें किस तरह समझाओगी कि तुम तो ‘हवा हवाई’ हो गई? ये बिलकुल ठीक नहीं किया, तुमने? पर्दे पर तुम अपनी सौतेली बेटी के लिए दुनिया से टकराती हो और असल जिंदगी में जब तुम्हारी अपनी बेटी ‘जान्हवी’ एक उड़ान भरने की तैयारी में है तो ऐसा ‘सदमा’।
ये अच्छा नहीं किया तुमने। हम सब तुम्हारे चाहने वाले हैं और तुम हमसे इतनी दूर चली गई हो कि हम लाख चाहकर भी अब तुमसे मिल नहीं पाएंगे। पर तुमको हम भुला भी न पाएंगे। तुम्हारी शोख अदाएं तुम्हारा चुलबुलापन, तुम्हारा अद्वितीय नृत्य, भाव भंगिमाएं और दूसरी पारी में शानदार प्रभावी एवं रुला देने वाला भावुक अभिनय। ईश्वर से झगड़ना किसी के बस की बात नहीं, पर एक साथ दो पीढ़ी जब तुम्हें पर्दे पर देखकर खुश हो रही थी उसे रुला कर ईश्वर तुमने भी ठीक तो नहीं किया। अलविदा श्रीदेवी, तुम बॉलीवुड को श्रीहीन कर गर्इं। अलविदा।
एक बात और... तुम तो ‘नागिन’ भी बनी थीं, फिर काल को क्यों नहीं डसा? आखिर पलों में तुम्हारे पास खुशी (बेटी) भी थी, फिर ये गम क्यों दे गई? बताओ न श्रीदेवी।

Updated : 26 Feb 2018 12:00 AM GMT
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