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सोनचिरैया अभयारण्य से मुक्त होंगे 25 गांव

सोनचिरैया अभयारण्य से मुक्त होंगे 25 गांव

वन विभाग के प्रस्ताव पर राज्य शासन ने जताई सहमति, जल्दी जारी हो सकती है अधिसूचना

ग्वालियर, न.सं.| घाटीगांव क्षेत्र के उन गांवों के लिए अच्छी खबर है, जो सोनचिरैया अभयारण्य की वजह से पिछले करीब 37 सालों से कई प्रतिबंधों का सामना करते आ रहा है। वन विभाग ने सोनचिरैया अभयारण्य घाटीगांव की सीमा में बसे कुल 55 में से 25 गांवों को वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 20 से मुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिला प्रशासन और वन विभाग ने संयुक्त रूप से हाल ही में इस संबंध में एक प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा है, जिस पर राज्य शासन ने सहमति जताई है, इसलिए माना जा रहा है कि जल्दी ही इस प्रस्ताव को स्वीकार कर अधिसूचना जारी की जा सकती है।

यहां उल्लखनीय है कि घाटीगांव अभयारण्य में चूंकि वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 लागू है। इस अधिनियम की धारा 20 के तहत इस अभयारण्य के अंतर्गत बसे गांवों में राजस्व जमीन का क्रय-विक्रय, नवनिर्माण, निस्तार आदि अधिकार प्रतिबंधित हैं। इस कारण किसान अपनी जमीन का क्रय-विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते गांवों में विकास कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। अभयारण्य के अंतर्गत बसे कई गांव सड़क सुविधा से भी वंचित हैं, जबकि अभयारण्य में पिछले करीब एक दशक से सोनचिरैया भी नहीं दिखी है। इस कारण पिछले कुछ सालों से ग्रामीणजनों की ओर से इस अभयारण्य को समाप्त करने की मांग पुरजोर तरीके से की जा रही है। बताया गया है कि ग्रामीणों की इस मांग का समर्थन करते हुए म.प्र. शासन की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने भी राज्य और केन्द्र शासन को कई बार पत्र लिखकर इस अभयारण्य को समाप्त करने की मांग की थी। उन्हीं की पहल पर वन विभाग द्वारा पिछले साल अभयारण्य से लगे 18 राजस्व गांवों को अभयारण्य से अलग करने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा गया था, लेकिन कुछ कमियों के चलते उक्त प्रस्ताव वापस भेजकर दोबारा प्रस्ताव मांगा गया था।

बताया गया है कि इस बार वन विभाग और जिला प्रशासन ने 18 गांवों की वजाय 25 गांवों (86.077 वर्ग किलो मीटर क्षेत्र) को अभयारण्य से अलग करने का प्रस्ताव राज्य शासन को भेजा है। खास बात यह है कि यह प्रस्ताव प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा उक्त 25 गांवों के ग्रामीणों से चर्चा कर उनकी परेशानियों का उल्लेख करते हुए तैयार किया गया है। वन विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो प्रथम दृष्टया राज्य शासन ने इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई है। निकट भविष्य में यह प्रस्ताव विचार के लिए राज्य वन्यप्राणी बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा, जहां इसे स्वीकृति मिलना तय माना जा रहा है। इसके बाद यह प्रस्ताव अंतिम निर्णय के लिए केन्द्र शासन को भेजा जाएगा, जहां केन्द्रीय वन्यप्राणी बोर्ड इस प्रस्ताव पर विचार कर निर्णय करेगा।

सोनचिरैया अभयारण्य घाटीगांव से नोटिफिकेशन के लिए जिन गांवों का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें नयागांव, रायपुर, पनिहार, बरई, जखौदी, घाटीगांव, धुंआ, खुड़ावली, प्रयागपुरा, चितेरा, समेड़ी, बसईकलां, कोटा-लश्कर, बरा, ओडपुरा, महाराजपुरा, रामपुरा, बिठौली, सौजना, तिघरा, कैंथा, सुजवाया, मालीपुरा, चक-गिरवाई नम्बर-1, गिरवाई आदि गांव शामिल हैं। अभयारण्य से डीनोटिफिकेशन किए जाने के बाद इन गांवों में वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 20 का प्रभाव समाप्त हो जाएगा। इसके बाद इन गांवों के ग्रामीणजनों का अपनी जमीन का क्रय-विक्रय, नवनिर्माण, निस्तार आदि का अधिकार पुन: बहाल हो जाएगा। यहां बताना उपयुक्त होगा कि सोनचिरैया अभयारण्य घाटीगांव का कुल क्षेत्रफल 512 वर्ग किलो मीटर है। यदि उक्त प्रस्ताव को स्वीकार कर प्रस्तावित 25 गांवों को इससे अलग किया जाता है तो इसका 86.077 वर्ग किलो मीटर क्षेत्रफल कम हो जाएगा।

इनका कहना है
‘‘वन विभाग और जिला प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से अभयारण्य से 25 गांवों के डीनोटिफिकेशन के लिए एक प्रस्ताव तैयार कर राज्य शासन को भेजा गया है, जो अभी विचाराधीन है। शासन स्तर पर इस प्रस्ताव पर जल्दी ही निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।’’

विक्रम सिंह परिहार
वन मंडल अधिकारी, ग्वालियर
ये 25 गांव होंगे मुक्त



Updated : 2018-01-07T05:30:00+05:30
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