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साढे छह किलो के ट्यूमर को चिकित्सकों ने निकाला

साढे छह किलो के ट्यूमर को चिकित्सकों ने निकाला
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मामला कमलाराजा अस्पताल का
ग्वालियर। जयारोग्य चिकित्सालय से जुड़े कमलाराजा अस्पताल के स्त्री रोग चिकित्सा विभाग में एक महिला के ओबेरियन से 6.5 किलो का ट्यूमर आॅपरेशन कर निकाला गया, ट्यूमर दो साल में ही इतना बड़ा हो गया था। चिकित्सकों का कहना है कि ट्यूमर के कारण महिला अपनी सामान्य जिन्दगी नहीं जी पा रही थी, आॅपरेशन के बाद महिला की हालत बिल्कुल ठीक है।

डबरा निवासी 30 वर्षीय हेमा पत्नी अमर सिंह के पेट में विगत दो वर्ष पहले सूजन आई थी, जिस कारण हेमा को पेट में दर्द व सांस लेने में तकलीफ शुरू ुहुई। जिसका उपचार हेमा ने डबरा में ही लिया और किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह नहीं ली। इस कारण हेमा के पेट में सूजन बढ़ती गई और उसे सांस लेने व खाना खाने तक में तकलीफ शुरू हो गई। इसी के चलते हेमा के पति उसे जयारोग्य चिकित्सालय लेकर पहुंचे और गायनिक विभाग की डॉ. यशोधरा गौर को दिखाया। डॉ. यशोधरा ने महिला का अल्ट्रासाउण्ड कराया तो पता चला कि महिला को ओबेरियन ट्यूमर है, जिस कारण महिला अपनी सामान्य जिन्दगी नहीं जी पा रही थी। महिला की परेशानी देखते हुए डॉ. यशोधरा ने
परिजनों को पूरी स्थिति से अवगत कराया और बताया कि महिला का आॅपरेशन करना पड़ेगा, जिसमें खतरा भी है। परिजनों की सहमति के बाद हेमा को 15 जुलाई को भर्ती कर उसकी जांच कराई। जांचों के बाद डॉ. यशोधरा ने अपनी टीम के साथ 26 जुलाई को उसका सफल आॅपरेशन कर करीब 6.5 किलो का ट्यूमर निकाला। आॅपरेशन के बाद महिला की हालत अब ठीक है और उसे एक-दो दिन में डिस्चार्ज भी कर दिया जाएगा।

2 घण्टे चला था आॅपरेशन

डॉ. यशोधरा ने बताया कि महिला में खून की बहुत ज्यादा कमी थी और ट्यूमर इतना बड़ा था कि आॅपरेशन बहुत ही मुश्किल था। इसी के चलते महिला का आॅपरेशन करीब दो घण्टे तक चला और ट्यूमर को बाहर निकाला गया। उन्होंने यह भी बताया कि महिला को कैंसर की भी संभावना हो सकती है, इसलिए उसके ट्यूमर को जांच के लिए भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही महिला की बीमारी स्पष्ट हो सकेगी।

चिकित्सकों ने ही कराई खून की व्यवस्था

चिकित्सक ने बताया कि महिला की आॅपरेशन के पहले जब जांचे कराई गई थी तो महिला में सिर्फ 5 प्वाइंट ही खून था। इसके चलते महिला के परिजनों को 5 बोतल खून की व्यवस्था कराने की बात कही। लेकिन परिजन के साथ इतने लोग नहीं थे जो खून दान दे सकें, जिस कारण परिजनों द्वारा सिर्फ तीन बोतल खून की ही व्यवस्था हो पाई और दो बोतल खून डॉ. यशोधरा द्वारा नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया। इसके बाद महिला का आॅपरेशन हो सका।

Updated : 2017-08-05T05:30:00+05:30
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