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अश्विनी लोहानी बने रेलवे बोर्ड के नये चेयरमैन

अश्विनी लोहानी बने रेलवे बोर्ड के नये चेयरमैन

कानपुर। देश में लगातार हो रहे ट्रेन हादसों को देखते हुए अश्विनी लोहानी को रेलवे का नया चेयरमैन बनाया गया है। लेकिन शायद ही कुछ लोगों को पता होगा कि लोहानी को बचपन से ही ट्रेन बहुत पसंद थी। उनके साथी अशोक कटियार का कहना है कि हम लोग बचपन में खिलौने की ट्रेन से खूब खेलते थे। अगर ट्रेन लड़ जाती थी तो बहुत दुख मनाते थे। पर अब देखना होगा कि लोहानी बढ़ रहे रेल हादसों को रोकने में कहां तक कामयाब हो पाते हैं। पिछले तीन साल में करीब तीन दर्ज ट्रेन हादसे हुए और करीब तीन सौ यात्रियों को जान गवानी पड़ी। यही नहीं करीब एक हजार से ज्यादा मुसाफिर घायल हो गये। रेलवे ने बेपटरी रेल को दुरूस्त करने के लिए कानपुर से शिक्षा ग्रहण करने वाले अश्वनी लोहानी को रेलवे बोर्ड का चेयरमैन बनाया है।

कनपुरियों को जब इसकी भनक हुई तो उनकी खुशी दुगुनी हो गई। लोगों का कहना है कि पहले हमारे शहर के रामनाथ कोविंद देश के प्रेसीडेंट चुने गए। अब यहां से पढ़े लिखे लोहानी को रेलवे के सबसे बड़े ओहदे पर बैठाया गया है। लोहानी का बचपन हर्षनगर में गुजरा, उन्होंने किराए के मकान में रहकर शिक्षा-दीक्षा ली। लोहानी की मुंहबोली भाभी शोभा कटियार कहती हैं कि वो हमारी शादी में शामिल हुए थे और मुंह दिखाई के तौर पर गणेश प्रतिमा दी थी। किराए के मकान में रहे 30 साल अश्वनी लोहानी के पिता बसंत कुमार लोहानी कानपुर के हर्ष नगर स्थित पेट्रोल पंप के सामने वाली गली में रामसनेही कटियार के मकान में किराये पर करीब 30 वर्ष तक रहे थे। बचपन में लोहानी आरएस कटियार के बेटे सुबोध कटियार के बहुत करीबी थे। सुबोध कटियार अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन अश्वनी का उनके साथ बहुत समय बीता है।

सुबोध कटियार के छोटे भाई की पत्नी शोभा कटियार कहती हैं कि अश्वनी भाई साहब ने एक किताब लिखी है। इसमें उन्होंने हमारे बड़े भाई सुबोध को भी जगह दी है। आज भी जब वह कानपुर आते हैं तो घर जरूर आते हैं। शोभा ने बताया कि दो साल पहले वो सुबोध जी के निधन की सूचना पर घर आए थे। घाट तक साथ गए और अपने दोस्त के अंतिम संस्कार के दौरान फूट-फूटकर रोए थे। शोभा कहती हैं कि वो किराएदार नहीं, बल्कि हमारे घर के एक सदस्य की तरह रहते थे। आरएस कटियार के दूसरे बेटे अशोक कटियार ने बताया कि लोहानी का बचपन में सबसे प्रिय खेल था खिलौने की ट्रेन चलाना। अगर हम उनकी ट्रेन पर टक्कर मार दे तो बहुत नाराज होते थे। ऐसे में हमे उम्मीद है कि बढ़ रहे ट्रेन हादसों को वह जरूर कंट्रोल करेंगे।

उत्तराखंड से कानपुर आए थे इनके पिता

अश्वनी लोहानी के पिता बसंत कुमार लोहानी उत्तराखंड के रहने वाले थे। नैनीताल और अल्मोड़ा में उनका घर है। उन्होंने इंग्लैंड की लीड्स यूनिवर्सिटी से टेक्सटाइल इंजीनियरिंग के बाद पीएचडी की। इसके बाद शहर के गवर्नमेंट सेंट्रल टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट (जीसीटीआई) में पढ़ाने लगे। वह यहां हर्ष नगर में आरएस कटियार के मकान मे किराये पर रहते थे। बसंत कुमार के परिवार में बेटा अश्वनी और बेटी कुमकुम थी। रिटायरमेंट के बाद इलाहाबाद, लखनऊ में रहे और बाद में अपने बेटे अश्वनी के साथ दिल्ली में रहने लगे। 2014 में उनकी मृत्यु हो गई।

सेंट एलॉयसिस हाईस्कूल से प्रारंभिक शिक्षा

अश्वनी लोहानी का एडमीशन कैंट के सेंट एलॉयसिस हाईस्कूल में कक्षा पांच में 18 जुलाई 1967 को हुआ था। उन्होंने यहां पर सीनियर कैंब्रिज (इंटरमीडिएट समकक्ष) तक पढ़ाई की। इस स्कूल में 10 दिसंबर 1973 तक पढ़े। उनकी दिलचस्पी मैकेनिकल इंजीनियरिंग में थी, इसलिए उन्होंने कानपुर के टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट में बीटेक में एडमीशन तो लिया लेकिन तीन महीने बाद ही छोड़ दिया क्योंकि उन्हें बिहार के जमालपुर में इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ मेकैनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इजीनियरिंग में दाखिला मिल गया। उन्होंने वहां से इलेक्ट्रॉनिक्स और टेलीकॉम इंजीनियरिंग की।

बेटी की शादी में शामिल होगा कटियार परिवार कटियार परिवार की बहू ने बताया कि आशू भाई साहब ने पंद्रह दिन पहले फोन कर अपनी बेटी की शादी की जानकारी हम लोगों को दी थी। शादी अगले माह दिल्ली में होनी है। उन्होंने पूरे परिवार को इनवाइट किया है। हम सब आशू भाई साहब की बेटी की शादी में शामिल होने के लिए अभी से तैयारी कर रहे हैं। रेल एक्स्पर्ट राहुल अस्थाना कहते हैं कि अश्वनी लोहानी एक तेज तर्रार अफसर हैं और उनका फोकस कानपुर और उसके आसपास हुए रेल हादसों पर हो सकता है।

Updated : 2017-08-27T05:30:00+05:30
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