Top
Home > Archived > सोम डिस्टलरीज को बचाने के लिए अड़े सरकार के लिक्विडेटर

सोम डिस्टलरीज को बचाने के लिए अड़े सरकार के लिक्विडेटर

सोम डिस्टलरीज को बचाने के लिए अड़े सरकार के लिक्विडेटर


ग्वालियर,न.सं.। लगभग सौ करोड़ रुपये सरकारी धन हड़पने वाली सोम डिस्टलरीज को नीलाम कर वसूली कराने का जिम्मा कम्पनी कोर्ट द्वारा नियुक्त जिस आॅफीशियल लिक्विडेटर को सौंपा गया था, वही आॅफीशियल लिक्विडेटर न्यायालय की आड़ लेकर अब सोम डिस्टलरीज को बचाने में लगे हैं। खास बात यह है कि जिन ओएल को सोम की सभी संपत्तियों और लेखा दस्तावेजों को तुरंत अपने आधिपत्य में लेना चाहिए, वह सोम को संचालन की खुली छूट दिए हैं।

उल्लेखनीय है कि सरकार के लगभग सौ करोड़ रुपये दबाए बैठी सोम डिस्टलरीज एण्ड ब्रेवरीज लिमिटेड से कर्ज की राशि ब्याज सहित वसूलने के लिए कम्पनी कोर्ट ने आॅफीशियल लिक्विडेटर नियुक्त किया था। कम्पनी कोर्ट से नियुक्त आॅफीशियल लिक्विडेटर को तुरंत सोम डिस्टलरीज एण्ड ब्रेवरीज लिमिटेड के आधिपत्य की सभी संपत्तियों और लेखा संबंधी दस्तावेजों को अपने आधिपत्य में लेना था। न्यायालय के आदेशानुसार छह सप्ताह अर्थात 42 दिन में कम्पनी संचालकों द्वारा शासकीय धन जमा नहीं करने की स्थिति में कम्पनी की सभी संपत्तियों को राजसात कर इसकी नीलामी करानी थी। इस नीलामी से प्राप्त राशि से कर्ज ली गई राशि को ब्याज सहित वसूलकर मध्य प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम लिमिटेड (एमपीएसआईडीसी) को सौंपना था। कम्पनी कोर्ट के आदेश के विरुद्ध कम्पनी संचालकों ने दिल्ली उच्च न्यायालय की युगल पीठ और सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की। हालांकि दोनों ही न्यायालयों ने कम्पनी कोर्ट के आदेश को यथावत रखते सोम डिस्टलरीज के संचालकों की याचिका को अस्वीकार कर दिया था। खास बात यह रही कि सर्वोच्च न्यायालय से याचिका अस्वीकृत हो जाने के बाद करीब आठ माह में आॅफीशियल लिक्विडेटर ने सोम डिस्टलरीज की संपत्तियों और लेखा को अपने आधिपत्य में नहीं लिया।

सोम से सरकारी कर्ज वसूली में एक बड़ा मोड़ तब आ गया जब सोम डिस्टलरीज के संचालकों ने जबलपुर उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश करा लिया। एमपीएसआईडीसी के अधिकारियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर दूसरे उच्च न्यायालय द्वारा स्थगन पर आपत्ति दर्ज कराई तो जबलपुर उच्च न्यायालय ने अधिकारियों के तर्क को उचित माना। इस दौरान अधिकारियों ने आॅफीशियल लिक्विडेटर से सोम पर कार्रवाई की बात कही तो लिक्विडेटर ने अधिकारियों को जवाब दिया कि उन्हें जबलपुर उच्च न्यायालय ने कार्रवाई से रोका है। अधिकारियों ने लिक्विडेटर के समक्ष यह भी कहा कि रोक शासन पर लगाई है, आॅफीशियल लिक्विडेटर की कार्रवाई पर नहीं। लेकिन लिक्विडेटर अधिकारियों और सरकार के अभिभाषक की यह बात मानने को तैयार नहीं है। हालांकि अधिकारी अगली पेशी में आॅफीशियल लिक्विडेटर की बहानेवाजी को न्यायालय के समक्ष रखने की बात कह रहे हैं।

संपत्तियों को ठिकाने लगाने में जुटे संचालक!

सोम डिस्टलरीज को राजसात कर वसूली के आदेश हो जाने के बाद सोम डिस्टलरीज के संचालक सोम के नाम की संपत्तियों को जल्दी से जल्दी ठिकाने लगाने के प्रयास में हैं। वहीं कम्पनी कोर्ट द्वारा नियुक्त आॅफीशियल लिक्विडेटर कम्पनी से वसूली करने को राजी नहीं हो रहे हैं। कम्पनी संचालक निकट भविष्य में इस कम्पनी की अचल संपत्तियों को औने-पौने दामों पर बेचकर राशि को शराब निर्माण में खर्च दिखाकर एवं घाटा बताकर ठिकाने लगाने के प्रयास में हैं। वर्तमान में कम्पनी की करोड़ों की अचल संपत्तियों को कोड़ियों में लाने की दिशा में काम जारी है। खास बात यह है कि कम्पनी की संपत्तियों की कीमत जितनी कम होगी, उसका पूरा घाटा सरकारी खजाने को होना तय है।

इनका कहना है

‘सोम डिस्टलरीज पर कार्रवाई को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध जबलपुर उच्च न्यायालय ने स्थगन दे दिया है। आॅफीशियल लिक्विडेटर को हमने अवगत कराया है कि न्यायालय का आदेश शासन के लिए है, उनके लिए नहीं, लेकिन वह इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। अगली पेशी में न्यायालय को इससे अवगत कराएंगे तथा सोम डिस्टलरीज पर शीघ्र कार्रवाई के लिए प्रयास करेंगे। ’

डी.पी.आहूजा
प्रबंध संचालक एम.पी.एसआईडीसी

***

और पढ़...

घूसखोर लुटवा रहे हैं सरकार का खजाना, एसआईडीसी के प्रबंध संचालक डीपी आहूजा मौन

सोम को समर्पित सरकार, शराब फैक्ट्री पर न्यौछावर सरकारी खजाना

Updated : 2017-06-05T05:30:00+05:30
Next Story
Share it
Top