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सहा. प्राध्यापक के लिए अब एस.आर. शिप जरूरी

सहा. प्राध्यापक के लिए अब एस.आर. शिप जरूरी


ग्वालियर, न.सं.। प्रदेश भर के चिकित्सा महाविद्यालयों में जहां सहायक प्राध्यापकों की कमी है, वहीं अब सहायक प्राध्यापकों की भर्ती के लिए मेडिकल काउंसिल आॅफ इण्डिया ने नए आदेश जारी किए हैं। जिसके चलते नए नियमों के तहत अब ऐसे लगभग 300 आवेदकों को परेशानी होगी जिन्होंने सहायक प्राध्यापक के लिए आवेदन किए थे।

जानकारी के अनुसार अभी तक प्रदेश के किसी भी चिकित्सा महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक बनने के लिए चिकित्सक पीजी के बाद सीधे आवेदन कर सकते थे, लेकिन अब एमसीआई द्वारा 5 जून को जारी किए गए आदेश के तहत अब चिकित्सक को सहायक प्राध्यापक बनने के लिए मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालय से कम से कम एक वर्ष का सीनियर रेसीडेंस का अनुभव प्रमाण पत्र लेना पड़ेगा। लेकिन अब सबसे बड़ी परेशानी ऐसे लगभग 300 चिकित्सकों को होगी जो पहले से ही सहायक प्राध्यापक के लिए आवेदन कर चुके थे, और अभी तक उनके साक्षात्कार नहीं लिए गए। शासन द्वारा प्रदेश भर में सहायक प्राध्यापकों के लिए भर्तियां निकाली थीं, जिसमें सैकड़ों चिकित्सकों ने भी आवेदन किए थे। जिसमें से कई चिकित्सकों के पास एक वर्ष का सीनियर रेसीडेंस का अनुभव भी नहीं है। जिस कारण अब उन चिकित्सकों को पहले एक वर्ष का एस.आर का अनुभव प्रमाण पत्र किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालय से लेना होगा उसके बाद ही वह भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकेंगे। जिस कारण अब प्रदेश में चिकित्सकों की कमी दूर होने की जगह और बढ़ जाएगी।

कई चिकित्सकों को जाना पड़ेगा बाहर, होगी परेशानी

एमसीआई के इस आदेश में सबसे ज्यादा परेशानी उन विभागों के चिकित्सकों को होगी जिनके विभाग में पूरे प्रदेश भर में एस.आर शिप की व्यवस्था नहीं है। प्रदेश के सागर, इंदौर, जबलपुर, रीवा, भोपाल एवं ग्वालियर चिकित्सा महाविद्यालय में रेडियोलॉजी, माइक्रोलॉजी, फार्माकलोजी, पैथोलॉजी, चर्मरोग, मनोरोग, न्यूरोलॉजी, एनोटॉमी, फोरेंसिक विभाग सहित अन्य विभागों में एसआर शिप की व्यवस्था ही नहीं है। जिस कारण अब इन विभागों के चिकित्सकों को अगर एसआर शिप करना होगा तो उन्हें दिल्ली सहित अन्य शहरों में जाना पड़ेगा, जिस कारण अब इन विभागों में चिकित्सकों की भारी कमी सामने खड़ी हो सकती है।

कुछ विभागों में होगी सबसे ज्यादा परेशानी

एमसीआई के आदेश के बाद अब सबसे ज्यादा परेशानी उन विभागों के चिकित्सकों को होगी जिन्हें एस.आर. शिप के लिए भटकना पड़ेगा। चिकित्सा महाविद्यालय में कई ऐसे विभाग भी हैं, जिनमें एस.आर. शिप की व्यवस्था कुछ ही महाविद्यालयों में ही है।

चिकित्सकों का होता है एक वर्ष का अनुबंध

प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में अध्ययनरत पीजी छात्र जब पीजी में प्रवेश लेते हैं तो उन्हें एक अनुबंध पर भी हस्ताक्षर करना पड़ता है। अनुबंध के अनुसार चिकित्सक को पीजी करने के लिए एक वर्ष तक चिकित्सा महाविद्यालय में कम से कम एक वर्ष तक सीनियर रेसीडेंस के पद पर काम करना पड़ता है, अगर चिकित्सक ऐसा नहीं करता है तो उसे लगभग 10 लाख रूपए भुगतने पड़ते हैं। लेकिन गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय सहित प्रदेश में कई महाविद्यालय ऐसे हैं जिनमें कई विभागों में एस.आर. शिप की व्यवस्था ही नहीं है। लेकिन अगर महाविद्यालय के सभी विभागों में एस.आर. शिप की व्यवस्था की जाती है तो विभाग में सहायक प्राध्यापक की कमी तो दूर होगी ही, साथ ही छात्र भी परेशानी से बचेंगे।

Updated : 2017-06-29T05:30:00+05:30
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