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हड़ताल स्थगित ,मामला डॉ. जुगरान के निष्कासन का

हड़ताल स्थगित ,मामला डॉ. जुगरान के निष्कासन का
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एमटीए दो फाड़, पीछे हटे चिकित्सक

ग्वालियर/सुजान सिंह। जयारोग्य चिकित्सालय के शव विच्छेदन गृह में विगत दिवस शव के साथ हुई दुर्दशा के मामले में फॉरेनसिक विभागाध्यक्ष डॉ. जुगरान को निलंबित कर दिया गया था, जिसको लेकर मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने विरोध करते हुए हड़ताल करने का निर्णय लिया था। लेकिन शुक्रवार को जब संभाग आयुक्त ने हड़ताल को देखते हुए जयारोग्य में चिकित्सकों की वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए बैठक बुलाई तो एमटीए पीछे हट गया और हड़ताल स्थगित कर दी गई। जिससे अब यह साफ हो गया है कि एमटीए में इन दिनों दो गुट बने हुए हैं और एमटीए के चिकित्सक डॉ. जुगरान को छोड़ सिर्फ अपने विरोधियों को टारगेट करने में लगे हुए हैं। एमटीए द्वारा हड़ताल की घोषणा करने के बाद सम्भाग आयुक्त एस.एन. रूपला शुक्रवार को जिलाधीश डॉ. संजय गोयल के साथ गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय पहुंचे और अस्पताल में हड़ताल को देखते हुए वैकल्पिक व्यवस्था करने को लेकर एक बैठक ली। जिसमें तय किया गया कि जिला अस्पताल सहित अन्य शासकीय अस्पतालों से चिकित्सकों को जयारोग्य में भेजा जाएगा। करीब दो घंटे तक चली बैठक में एक चर्चा यह भी सामने आई कि एक बार एमटीए से भी बात कर लेनी चाहिए, जिस पर श्री रूपला ने कहा कि हमने तो अपनी व्यवस्था कर ली है अगर चिकित्सकों को हड़ताल पर जाना है तो चले जाएं। इसके बाद एमटीए के अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल व सचिव डॉ. संजय धवले सम्भाग आयुक्त से मिलने पहुंचे और कहा कि डॉ. जुगरान को बहाल किया जाना चाहिए, जिस पर श्री रूपला ने कहा कि यह एक शासकीय प्रक्रिया है, डॉ. जुगरान को शासकीय प्रक्रिया के तहत ही बहाल किया जाएगा। इसी बीच हड़ताल के ऊपर भी चर्चा हुई तो महाविद्यालय के अधिकारियों ने सख्त शब्दो में कहा कि अगर हड़ताल के दौरान किसी मरीज को हानि पहुंचती है तो इसकी जिम्मेदारी विभाग के विभागाध्यक्ष व एमटीए की होगी। जिसे सुन एमटीए के चिकित्सक लौट गए। देर शाम तक परिसर में हड़ताल को लेकर चिकित्सकों में गहमा गहमी चलती रही और एमटीए के आधे चिकित्सक हड़ताल का समर्थन करते नहीं दिखे। जिस कारण देर शाम एमटीए प्रशासन के सामने झुक गया और हड़ताल स्थगित कर दी।

एमटीए पर भी हुई चर्चा:- सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैठक में यह भी चर्चा सामने आई कि एमटीए का कार्यकाल पूरा हो चुका है, और कार्यकारिणी भंग हो चुकी है। इसके चलते एमटीए के दुबारा से चुनाव कराए जाएंगे।

बैठक में नहीं हुआ था हड़ताल का निर्णय:- इस मामले में यह बात भी चिकित्सकों में चर्चा का विषय बनी हुई है कि विगत दिवस एमटीए की बैठक में हड़ताल को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी। चिकित्सकों का कहना है कि जब एमटीए की बैठक हुई थी तो उसमें हड़ताल को लेकर कोई चर्चा नहीं की गई थी। हड़ताल का निर्णय एमटीए के अध्यक्ष व सचिव द्वारा ही लिया गया है, इसलिए अधिकांश चिकित्सक हड़ताल के समर्थन में नहीं हैं।

फिर उठाए जांच कमेटी पर सवाल

बैठक में डॉ. सुनील अग्रवाल ने फिर से जांच कमेटी को गलत ठहराते हुए कहा कि इस मामले की जांच महाविद्यालय के पूर्व अधिष्ठाता से कराई जानी चाहिए। जिस पर जिलाधीश डॉ. गोयल ने कहा कि अगर कोई शासकीय सेवा में नहीं होता है, उससे जांच नहीं कराई जा सकती। अधिष्ठाता डॉ. एस.एन. अयंगर महाविद्यालय के प्रमुख हैं, और आर्थोपेडिक विभागाध्यक्ष डॉ. समीर गुप्ता बहुत वरिष्ठ चिकित्सक हैं, लेकिन आप को उनकी जांच पर भी भरोसा नहीं है। इस पर डॉ. अग्रवाल चुप हो गए और उनके पास कुछ कहने को नहीं रहा।

अगर हड़ताल होती तो चढ़ जाती डॉ. जुगरान की बलि

अगर एमटीए द्वारा हड़ताल की जाती तो डॉ. सार्थक जुगरान की बली चढ़ना तय था। सूत्रों के अनुसार हड़ताल के पक्ष में खुद डॉ. जुगरान भी नहीं थे। अगर हड़ताल होती और जांच बैठती तो जांच लम्बे समय तक चलती। इस कारण डॉ. जुगरान के पदोन्नति में भी कई परेशानियां आतीं, लेकिन इस मामले में अब यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या सच में एमटीए डॉ. जुगरान के समर्थन में था या सिर्फ अपने व्यक्तिगत फायदे के लिए इस मुद्दे को इतना तूल दे रहा था।

कार्यकारिणी भंग होने के बाद भी नहीं कराए चुनाव

इस मामले के बाद अब चिकित्सकों में एमटीए के चुनाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। विगत वर्ष 2016 में जनरल बॉडी की बैठक आयोजित हुई थी, जिसमें तय किया गया था कि दिसम्बर माह तक एमटीए की यही कार्यकारिणी रहेगी और जनवरी 2017 में एमटीए के चुनाव दोबारा कराने का निर्णय लिया गया था, जिसकी जिम्मेदारी एमटीए के अध्यक्ष व सचिव की होती है, लेकिन इस मामले में सबसे बड़ी बात यह है कि एमटीए के पदाधिकारियों को अपने पद से इतना लगाव हो गया है कि न तो उन्होंने चुनवा की बात रखी और न ही किसी से चर्चा की। इसको लेकर अब एमटीए के चिकित्सको में दोबारा चुनाव को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

फिर खराब हुए फ्रिज अधिष्ठाता को लिखा पत्र

शव विच्छेदन गृह की व्यवस्थाएं सुधर नहीं पा रही हैं। शुक्रवार को फिर से फ्रिज खराब हो गया और सिर्फ एक ही फ्रिज चालू था। इस कारण शव विच्छेदन गृह में पहुंचे शवों को बाहर ही रखना पड़ा। वहीं संभाग आयुक्त के निर्देशों के बाद कैजुअल्टी में पदस्थ डॉ. जे.पी. गोयल एवं दो कर्मचारी मधुसुदन शर्मा एवं तामसिंह को स्थानांतरित कर शव विच्छेदन गृह में भेज दिया गया है।

Updated : 2017-05-27T05:30:00+05:30
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