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डॉ. जुगरान को फंसाकर बच निकले मगरमच्छ

डॉ. जुगरान को फंसाकर बच निकले मगरमच्छ

- सुजान सिंह

कहीं यह मानव अंग तस्करी का मामला तो नहीं?

ग्वालियर, न.सं.। जयारोग्य चिकित्सायल में विगत दिवस मृतका रक्षा कटारे के शव से आंख गायब हो जाने के मामले में फोरेंसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सार्थक जुगरान को निलम्बित तो कर दिया गया, लेकिन इस मामले में अब यह सवाल उठ खड़े हुए हैं कि क्या इस मामले में केवल डॉ. जुगरान को बली का बकरा बनाकर बड़े मगरमच्छों को बचाया जा रहा है? क्या चूहा इस तरह से किसी की आंख को खा सकता है? कहीं यह मामला मानव अंगों की तस्करी से तो नहीं जुड़ा है?

उल्लेखनीय है कि विगत 20 मई को शिवपुरी निवासी बृजेश अवस्थी की 26 वर्षीय विवाहित बेटी रक्षा कटारे के शव की आंख गायब होने का मामला सामने आया था, जिसको लेकर अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया था। इस मामले में अधिकारी अपने बचाव की तैयारी में जुट गए और पूरा मामला फोरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. सार्थक जुगरान के ऊपर थोप दिया गया। इस मामले में संभागायुक्त एस.एन. रूपला कि जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि महिला की आंख को चूहे ने ही खाया था और डॉ. जुगरान को दोषी बताते हुए संभागायुक्त द्वारा उन्हें निलम्बित कर दिया। लेकिन यह बात किसी को भी हजम नहीं हो रही है कि चूहा आंख के अगल-बलग मांस को कुतरे बिना सिर्फ आंख की पुतली को खा सकता है, गौर तलब बात यह कि क्या चूहा भी इतना बड़ा कारीगर हो सकता है कि आंख कि पुतली को इतनी होश्यारी से निकाल सके। जयारोग्य चिकित्सालय में दान में दी गर्इं आंखों को कचरे में फेंकने का भी एक मामला पहले भी सामने आ चुका है। लेकिन इस मामले में तो संभागायुक्त व अन्य अधिकारियों ने पूरा दोष केवल डॉ. जुगरान पर डालते हुए यह सिद्ध कर दिया कि इस काण्ड में डॉ. जुगरान ही दोषी है।

पिता ने लगाया था मानव अंग तस्करी का आरोप

इस मामले में मृतका रक्षा के पिता बृजेश अवस्थी ने अपने बयान में कहा था कि उनकी बेटी का शव बहुत अच्छी तरह से कपड़े से बंधा हुआ था, फिर चूहा कपड़े को काटकर आंख कैसे खा गया। यहां तक कि पिता ने मानव अंग तस्करी का भी आरोप लगाया था। इसके बाद से ही अस्पताल परिसर में यह चर्चा चल पड़ी है कि कहीं अस्पताल में शवों के अंगों को निकालकर तस्करी तो नहीं की जा रही है।

चार बजे के बाद अधीक्षक कार्यालय में रहती है चाबी

डॉ. जुगरान ने अपने बयान में कहा था कि शाम चार बजे के बाद शव विच्छेदन गृह की चाबी अधीक्षक कार्यालय में ही रहती है और रक्षा कटारे का शव जब विच्छेदन गृह में पहुंचा था, तब शाम के चार बज चुके थे, लेकिन फिर भी इस मामले में दोषी सिर्फ डॉ. जुगरान को ही ठहराया गया।

भोपाल में क्यों हुई थी अलग कार्रवाई

पिछले वर्ष भोपाल में भी कुछ इसी तरह का मामला सामने आया था, जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चिकित्सा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव प्रभांशु कमल, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. उल्का श्रीवास्तव और संचालक चिकित्सा शिक्षा जी.एस. पटेल को हटा दिया था, लेकिन ग्वालियर में सामने आए इस मामले में बड़े मगरमच्छों को पूरी कार्रवाई से ही दूर रखा गया है, जिससे तमाम अनसुलझे सवाल खड़े हो रहे हैं।

हड़ताल कि तैयारी में लगे चिकित्सक, सम्भाग आयुक्त को नहीं सूचना

डॉ. जुगरान के निलंबित का विरोध कर रहे चिकित्सक डॉ. जुगरान का निलंबन वापस लेने को लेकर हड़ताल कि तैयार में लगे हुए है, लेकिन अभी तक सम्भाग आयुक्त को इसकी कोई सूचना ही नहीं है। एमटीए के चिकित्सकों ने विगत दिवस महाविद्यालय के अधिष्ठाता को सम्भाग आयुक्त के नाम पर ज्ञपन देते हुए काम बंद करने कि चेतावनी दी थी, लेकिन अधिष्ठाता द्वारा अभी तक ज्ञापन सम्भाग आयुक्त तक पहुंचाया ही नहीं गया है। जिसको लेकर अब यह सबाल खड़े हो रहे है कि आखिर क्यों अधिष्ठाता द्वारा सम्भाग आयुक्त तक ज्ञापन नहीं पहुंचाया गया। वहीं डॉ. जुगरान के समर्थन में प्राइवेट नर्सिंग होम एसोसिएशन, आईएमए सहित नर्सिंग एसोसिएशन ने भी एमटीए को समर्थन दिया है।

Updated : 2017-05-26T05:30:00+05:30
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