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भारतीय परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय राजनीति का उदय

*विनोद कुमार सर्वोदय

वर्षों से हमारे स्वतंत्र भारत की प्रतिष्ठा कुशल नेतृत्व के अभाव में धूमिल हो रही थी। अनेक षड्यंत्रकारियों के घावों से घायल हो रही माँ-भारती को स्नेह लेप लगाने वाले भी परिस्थितिवश विवश हो चले थे। अराष्ट्रीयता, राष्ट्रीयता पर भारी हो गयी... धर्मनिरपेक्षता, मुस्लिम तुष्टीकरण का पर्याय बन गयी...अल्पसंख्यकवाद, बहुसंख्यकों के लिए बाधक बन गया... तो मानवाधिकार के कारण आतंकवाद पर अंकुश नहीं लग पाया ...साथ ही सारे राष्ट्र में हिंदुओं को ही साम्प्रदायिक बना दिया गया। यह कैसी विडंबना है कि जिस भारत भूमि पर सम्राट विक्रमादित्य, आचार्य चाणक्य, सम्राट चंद्रगुप्त, महाराणा प्रताप, भामाशाह, माता जीजाबाई, वीर शिवाजी, वीर सावरकर व नेताजी सुभाष आदि अनमोल रत्न हुए हों, उस बगिया को उजड़ते हुए देखना हमारी भीरुता व कायरता का बोध करा रही थी। देश का राष्ट्रवादी समाज स्वार्थी व सत्तालोलुप नेताओं की जकड़ से छटपटा रहा था। विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजनीति राष्ट्रीय पटल पर दूषित हो गई थी। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भारतीय जनमानस कब तक और क्यों कर अपमानित होने को विवश होता रहता ?

ऐसी अनेक कुंठाओं के चलते राष्ट्रीय जनमानस ने बड़ी शालीनता के साथ लोकतांत्रिक परम्पराओं को निभाते हुए राष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दी है। जिसके परिणामस्वरुप मई 2014 के लोकसभा चुनावों में नरेन्द्र मोदी के रुप में राष्ट्र को एक महानायक मिला। राष्ट्रवादियों की इस ऐतिहासिक जीत ने देश को अंधकार में धकेल रही भ्रष्ट राजनीति को नियंत्रित करते हुए सकारात्मक व स्वस्थ राजनीति को प्रोत्साहित किया है। जिससे राष्ट्रीय राजनीति व चिंतन को भारतीय परिप्रेक्ष्य में विचार करने का प्रोत्साहन मिला और राष्ट्रवादियों में स्वाभिमान जागा। वर्षों बाद मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने विश्व पटल पर अपनी दृढ़ता व कार्यकुशलता का परिचय कराया है।
पिछले माह हुए प्रदेशीय चुनावों में राष्ट्रवादी भाजपा की महाविजय इस विमर्श का स्पष्ट संकेत है कि देश के भूमिपुत्र अपनी संस्कृति, सभ्यता और धरोहर को सुरक्षित रखते हुए स्वाभिमान से जीना चाहते हैं। उनको ऐसा वातावरण मिले जिससे उनका शासकीय, धार्मिक व सामाजिक कार्यों में उत्पीड़न न हो सके। वे आत्मग्लानि से बाहर स्वच्छंद जियो और जीने दो के संदेश के साथ अपना जीवन यापन कर सकें। इसी चिंतन व मंथन से भाजपा के शीर्ष नेतृत्व द्वारा एक कर्मठ व दृढ़ इच्छाशक्ति के धनी संत आदित्यनाथ योगी को राष्ट्र को उचित दिशा देने वाले उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री चुना गया। विश्वास नहीं हो रहा था कि एक चिरपरिचित संकल्पित हिंदुत्ववादी नेता को राज्य की सत्ता मिल रही है। भाजपा के शीर्ष मानी जा रही मोदी-शाह की जोड़ी जो वर्षों से अनेक मिथ्या आरोपों को झेलती रही, उसमें 2002 के गुजरात दंगे व 2004 का इशरतजहां एनकाउंटर सबसे प्रमुख थे। ऐसे में इस जोड़ी का यह निर्णय सामान्य नहीं था। यह अनेक विवादों को जन्म देकर विपक्षियों और विरोधियों को उकसाने के लिये पर्याप्त था। परंतु महाविजय के इस महानिर्णय से सम्पूर्ण राष्ट्र में एक ऐसी सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ कि मोदी जी को महानायक कहने वालों की प्रसन्नता आज चरम पर है। साथ ही भाजपा के चाणक्य अमित शाह के संगठनात्मक कौशल और धरातल से जुड़े रहकर जनमानस की भावनाओं को समझने का अद्भुत समन्वय प्रशंसनीय है। प्रसंगवश यहां अब यह उल्लेख करना भी आवश्यक है कि अगर 2004-2014 की कांगे्रसनीत सप्रंग सरकार को भारत को गर्त में ले जाने का दोषी माना जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। आपको स्मरण होगा कि सोनिया मंडली किस कुटिलता से गुजरात के मुख्यमंत्री मोदी जी व उनके सहयोगी अमित शाह को जेल भिजवाने के लिये देशद्रोही आतंकियों का सहारा लेने से भी नहीं चूकी थी। उसके लिये उन्होंने अपने विश्वसनीय तत्कालीन गृहमंत्री चिदंबरम के कार्यालय का भरपूर दुरुपयोग करके लश्कर-ए-तैयबा की फिदायीन आतंकी इशरतजहां सबंधित अभिलेखों में अपने अनुसार छेड़छाड़ करवायी थी ।

आज आध्यात्मिक, धार्मिक, राजनैतिक व सामाजिक मूल्यों के धनी संत योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री के रुप में पाकर उत्तर प्रदेश के छोटे-बड़े, पढ़े-अनपढ़ व निर्धन-धनवान आदि सभी राष्ट्रवादी अभिभूत हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त देश के तथाकथित सेक्युलरों को छोड़ कर भारत भक्तों और बुद्धिजीवियों का उत्साहवर्धन हुआ है। 19 मार्च को योगी जी के शपथ लेने के साथ ही मेरे अनेक साथियों व शुभचिंतकों के सैकड़ों दूरभाष व असंख्य व्हाट्सअप संदेशों ने उत्तर प्रदेश में भाजपा की अभूतपूर्व 312 सीटों की महाविजय की प्रसन्नता को कई गुना और बढ़ा दिया। प्रात:काल पार्क में मिलने वालों से लेकर पूरे दिन मिलने वाले अनेक युवा व बुजुर्ग परिचित-अपरिचित सभी मोदी-शाह की जोड़ी द्वारा योगी जी को मुख्यमंत्री बनाने से प्रसन्नतापूर्वक आश्चर्यचकित हो रहे थे।

नि:संदेह एक साधारण से दिखने वाले युवक ने अपना जीवन धर्म की सेवा व साधना के लिये समर्पित करते हुए भगवा धारण किया। 'भगवा' मात्र रंग ही नहीं हमारी महान संस्कृति का सूचक और वाहक है। जिसका संदेश है...असतो मा सद्गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्माअमृतं गमय अर्थात हे भगवान मुझको असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर एवं मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो। जिसको अपनाते हुए युवा अजय सिंह अपनी वर्षों की अथक तपस्या से योगी आदित्यनाथ बन गये। महंत अवैद्यनाथ के उत्तराधिकारी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी जी ने अभी अपने जीवन के पांच दशक भी पूर्ण नहीं किये हैं। फिर भी उनकी भूमि से जुड़े रहते हुए जीवन की वास्तविकता को समझ कर आगे बढ़ते रहने की जिजीविषा सराहनीय है। उनका उत्साहवर्धन उनकी प्रशासकीय सूझ-बूझ में स्पष्ट झलकता है । वे भारतीय परम्पराओं, संस्कृति व धर्म की रक्षा के लिये राष्ट्र रक्षा को आवश्यक मानते हैं। परंतु इसके लिये वे ढोंगी धर्मनिरपेक्षता से दूर रहते हंै। वे पक्षपात व तुष्टिकरण किसी का नहीं, के पथ पर अग्रसर रहने के लिये प्रतिबद्ध हैं। संभवत: महर्षि अरविंद के सन 1926 में कहे गए वचन कि मुसलमानों को तुष्ट करने का प्रयास मिथ्या कूटनीति है। सीधे हिन्दू-मुस्लिम एकता की कोशिश करने के बजाय यदि हिन्दुओं ने एक ओर ध्यान करके अपने को केवल राष्ट्रीय कार्यों में लगाकर राष्ट्र के विकास की राह पर चलते रहने का विचार किया होता तो मुसलमान भी अपने आप धीरे-धीरे राष्ट्रीय कार्यों में लगते। आज इस अनमोल वचन के दर्शन मोदी जी के कार्यों में स्पष्ट हो रहे हंै और भविष्य में इसी का अनुसरण योगी जी के कार्यों में संभावित होगा।

यहां यह भी लिखना अनुचित नहीं होगा कि तुष्टिकरण की नीतियां केवल कट्टरपंथियों को ही प्रोत्साहित करती आ रही हैं जिससे मजहबी आतंकवाद को भी बढ़ावा मिलता आ रहा है। अत: जो लोग सद्भाव की बात नहीं समझते उन्हें उनकी ही भाषा में समझाना चाहिये तभी शीघ्र समझ में आता है, नहीं तो एक मरता रहेगा और दूसरा मारता रहेगा, यह साहसिक विचार भी मोदी व योगी के साथ-साथ सभी राष्ट्रवादियों का उत्साहवर्धन बनाये हुए है। योगी जी की सरकार के गठन को अभी एक माह भी नहीं हुआ है फिर भी उनके ठोस प्रशासकीय निर्णय प्रदेश के अनेक नगरों को प्रभावित करके सामान्य नागरिकों को स्वाभिमान से जीने का वातावरण दे रहे है। अवैध मांस, गौमांस व रोमांस पर आवश्यक प्रतिबंध के साहसिक निर्णय ने तो हरियाणा व झारखंड आदि प्रदेशों की सरकारों को भी प्रभावित किया है। अब भारत माता को अपने पुत्रों और भक्तों पर गर्व करने का समय आ रहा है। समस्त भारतवासियों ने अब सत्ता के शीर्ष पर विराजमान मोदी और योगी में आशा की किरण के बिखरते रंगों में अपने अनेक सपने संजोये हैं। अत: जब उद्देश्य श्रेष्ठ है एवं दिल में प्रबल भावना है तो किये गए कार्यों का प्रभाव तो परिलक्षित होना ही चाहिये ।

Updated : 2017-04-12T05:30:00+05:30
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