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अमेरिका सरकार ने भारत को दिलाया भरोसा, एच-1बी वीजा नियमों को कड़ा करना उसकी प्राथमिकता में नहीं

अमेरिका सरकार ने भारत को दिलाया भरोसा,  एच-1बी वीजा नियमों को कड़ा करना उसकी प्राथमिकता में नहीं

वॉशिंगटन। भारतीय आईटी कंपनियों की एच-1बी वीजा को लेकर चिंताओं के बीच अमेरिका सरकार ने भारत को भरोसा दिलाया है कि एच-1बी वीजा नियमों को कड़ा करना उसकी प्राथमिकता में नहीं है। हालांकि यह ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन पॉलिसी के बड़े एजेंडे का एक हिस्सा रहेगा। अमेरिका की ओर से यह भरोसा ऐसे वक्त दिया गया है, जब वहां एच-1बी वीजा का लेकर कार्यकारी आदेश जारी किए जाने पर बहस चल रही है और मीडिया में भी इसे प्रमुखता से जगह दी जा रही है।

इस बीच अमेरिका ने एच-1बी वीजा की प्रीमियम प्रॉसेसिंग को निलंबित कर दिया है। फिलहाल याचिकाकर्ता आई-907 फॉर्म नहीं भर पाएंगे। 3 अप्रैल, 2017 से यूएससीआईएस ने सभी एच-1बी वीजा की प्रीमियम प्रॉसेसिंग को निलंबित कर दिया है, यह निलंबन 6 महीने तक के लिए है।

विजिटिंग कॉमर्स सेक्रटरी रीता टेवटिया ने कहा, ‘भारत के टेक सेक्टर का अमेरिका में योगदान महत्वपूर्ण है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि एच-1बी वीजा का मुद्दा प्रमुखता में नहीं है। इमिग्रेशन के मुद्दे पर अमेरिका काम कर रहा है। हर मुद्दा अपने आप में अलग है।’ टेवटिया ने कहा कि अब तक इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है, इमिग्रेशन के बड़े एजेंडे का यह भी एक हिस्सा है।

विदेश सचिव एस. जयशंकर के साथ एच-1बी वीजा पर ट्रंप प्रशासन से बातचीत के लिए पहुंचीं रीता ने कहा कि भारत ने अमेरिका के साथ पूरी ताकत से मुद्दे को उठाया है। अमेरिकी अधिकारियों ने ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों, कॉमर्स सेक्रटरी विलियम रॉस, होमलैंड सिक्यॉरिटी सेक्रटरी जॉन केली और कांग्रेस लीडरशिप से मुलाकात में यह संदेश देने का प्रयास किया कि एच-1बी वीजा ट्रेड और सर्विस कैटिगिरी में आता है।

इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को ही मदद मिलती है और वह दुनिया की प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था के तौर पर मजबूत होती है। जयशंकर ने कहा, ‘यदि ट्रंप प्रशासन अमेरिकी कंपनियों को वापस स्वदेश लाना चाहता है, विदेशी निवेश में इजाफा करना चाहता है और नजदीक भविष्य में ग्रोथ को बढ़ाना चाहता है तो उसे अपनी अर्थव्यवस्था को प्रतिस्पर्धी बनाना होगा। ऐसा न करने की स्थिति में वह ग्रोथ की दिशा को खो देगा।’

Updated : 2017-03-04T05:30:00+05:30
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