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हर माह 1.70 करोड़ खर्च, फिर भी 700 बच्चे कुपोषित

सुपोषण शिविरों में नहीं पहुंचते चिकित्सक

स्वदेश शर्मा/मुंगावली। विकास खण्ड में देखा जाए तो कुपोषण को दूर करने के लिये प्रतिमाह 1 करोड़ 70 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। कुपोषण मिटाने पर करोड़ों खर्च होने के बाद भी नतीजा अभी काफी पीछे है। महिला बाल विकास से मिले आकड़ों को देखें तो वह चौकाने वाले हैं। महिला बाल विकास अधिकारियों के मुताबिक ब्लॉक में 700 कुपोषित बच्चे हैं। यदि गांव-गांव जाकर पुन: सर्वे कराया जाये तो यह संख्या 1 हजार को भी पार कर सकती है। जिसका आंकलन इससे किया जा सकता है कि जब गांवों में कुपोषण की स्थिति का जायजा लेने वीडसरकार, बरखेडाडांग, तिन्सी एवं कुकावली में जाकर देखा गया तो यहीं एक सैकड़ा कुपोषित बच्चे मिल गए। इनमें से हम चंद नाम भी बताते हैं जो करोड़ों खर्च के बाद कुपोषण की जिंदगी जी रहे हैं। जिसमें तिन्सी निवासी लालाराम का बेटा विष्णु कुपोषण का शिकार है। जिसको दो बार भर्ती कराने के बाद भी कुपोषण दूर नही हुआ है। जिसकी माता का कहना है कि अब इसको भर्ती नही कर रहे। इसी गांव के बलराम का तीन वर्षीय पुत्र लवकुश कुपोषण का शिकार है। इसके अलावा इस गांव में ही कई अन्य बच्चे एवं बच्चियां कुपोषित है। तो कुकावली पंचायत के कुम्हर्रा कालोनी में रहने वाले प्रमोद, राजेश दोनों भाई कुपोषण का शिकार है, जबकि अनिकेश भी कुपोषित है।

इस प्रकार किया जा रहा पैसा खर्च
क्षेत्र में कुपोषण दूर करने केलिये 265 आंगनवाड़ी केन्द बनाए गए हैं। जिन पर कार्यकर्ता एवं सहायिका को नियुक्त किया गया है। जिनमें एक आंगनबाडी कार्यकर्ता का मानदेय 5000 रुपए एवं सहायिका का मानदेय 2500 रुपए है। जिनका कुल 20 लाख रुपये प्रतिमाह होता है। इनके अलावा सुपरवाईजर पर लगभग 05 लाख रुपए, प्रत्येक आंगनबाडी केन्द्र पर 50 बच्चे दर्ज हैं। जिनके कुपोषण आहार पर पचास हजार रुपए के अनुमान से 1 करोड़ 32 लाख 50 हजार रुपए बनता है। इसके अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में संचालित होने वाले पोषण पुनर्वास केन्द्र पर लाखों रुपये प्रतिमाह खर्च किये जा रहे हैं। कुल मिलाकर देखा जाये तो अन्य गतिविधियों के खर्च को देख जाये तो यह आंकड़ा बढ़ भी सकता है।

नही मिली प्रोत्साहन राशि, कैसे करें कार्य
इस मामले में महिला बाल विकास प्रभारी वीरेन्द्र रघुवंशी ने बताया कि पूर्व में जिन कार्यकतार्ओं ने बच्चों को भर्ती कराया गया। उनको मिलने वाली प्रोत्साहन राशि नही दी गई। जिसके चलते कार्यकर्ता हतोत्साहित हैं। साथ ही फरवरी माह में पांच गांवों में सुपोषण शिविर लगाये गए। जिनमें बच्चों की जांच करने के लिये चिकित्सक भेजने के लिये बीएमओ वायएस तोमर को कहा पर बारह दिनों में एक भी दिन कोई डॉक्टर शिविर में नही आया, वहीं मेडीकल आॅफिसर दिनेश त्रिपाठी ने कहा कि दो माह से पोषण पुर्नवास केन्द्र में एक भी बच्चा भर्ती नही था और कोई भी आंगनवाडी कार्यकर्ता इसमें रूचि नही ले रहीं हैं। इनके बयानों के मुताबिक दोनों विभाग की खींचतान में मासूमों की जान से खिलवाड़ हो रहा है।

Updated : 2017-03-23T05:30:00+05:30
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