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केन्द्र सरकार , साडा सहित तीन को नोटिस, चार सप्ताह में दें जवाब, सिविल हवाई अड्डा का निर्माण हो रहा है या नहीं

उच्च न्यायालय में याचिका पर हुई सुनवाई

ग्वालियर| उच्च न्यायालय की खण्डपीठ, ग्वालियर ने हवाई अड्डा के निर्माण पर प्रस्तुत की गई याचिका में सुनवाई करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार,भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और साडा बताए कि हवाई अड्डा का निर्माण हो रहा है या नहीं। युगल पीठ ने कहा है कि हवाई अड्डा का निर्माण होने से ग्वालियर से लगे कई जिलों को इसका फायदा मिलेगा। इस दिशा में गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। न्यायालय ने इन सभी को नोटिस देने के निर्देश दिए हैं और चार सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं। बता दें कि नागरिक हवाई अड्डा का निर्माण अटकने पर यशवंत जैन ने जनहित याचिका प्रस्तुत की है। याचिका में उल्लेख है कि लंबे समय से नागरिक हवाई अड्डा का निर्माण ग्वालियर में प्रस्तावित है। इसके लिए चुनी गई दो जमीनें एक के बाद एक विवाद में पड़ चुकी हैं। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) प्रस्तावित हवाई अड्डा के लिए प्राथमिक रिपोर्ट दे चुका है लेकिन जब तक जमीन का मामला नहीं सुलझेगा तब तक हवाई अड्डा की योजना परवान नहीं चढ़ पाएगी। इस मामले में शासकीय अधिवक्ता प्रवीण नेमास्कर और याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सुनील जैन ने न्यायालय के समक्ष अपने-अपने तर्क पेश किए।

अभी वायुसेना के हवाले है वर्तमान हवाई अड्डा
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता के अनुसार वर्तमान विजयाराजे विमान हवाई अड्डा महाराजपुरा में स्थित है। यहां का हवाई यातायात पूरी तरह वायुसेना स्टेशन के रनवे पर निर्भर है। वायुसेना अपनी शर्तों और सुविधा के हिसाब से ही नागरिक विमानों को उतरने की अनुमति देती है। इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि यहां से ज्यादा शहरों के लिए हवाई सेवा उपलब्ध नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर के हवाई अड्डा की जरूरत को पूरा करने के लिए विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) को चुना गया था।

जमीन कम है हवाई अड्डा के लिए
बता दें कि कुलैथ ग्राम की जमीन को हवाई अड्डा के लिए चुना गया था। क्योंकि कुलैथ की जमीन मौसम और हवा के लिहाज से हवाई अड्डा के लिए बेहतर है,लेकिन 300 हेक्टेयर में फैली इस जमीन के साथ दिक्कत यह है कि यहां 86 हेक्टेयर जमीन पर जंगल है और किसी भी तरह के निर्माण के लिए वन विभाग की अनुमति लेनी होगी। अगर जमीन मिल भी जाती है तो भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय, गृह मंत्रालय, मौसम विभाग, और वायुसेना से अनापत्ति प्रमाणपत्र लेना होगा। मामला यहीं पर वर्ष 2012 से अटका हुआ है।

Updated : 2017-02-08T05:30:00+05:30
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