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न संकेतक न गति सीमा के बोर्ड, आखिर कैसे रुकेगी स्कूल बसों की गति...?

न संकेतक न गति सीमा के बोर्ड, आखिर कैसे रुकेगी स्कूल बसों की गति...?
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-मासूम बच्चों की जान के साथ हो रहा है खिलवाड़
-प्रशासन और पुलिस के नियमों की अनदेखी

ग्वालियर| माता-पिता अपने मासूमों को इस उम्मीद से बस से स्कूल भेजते हैं, ताकि वे सुरक्षित विद्यालय पहुंचें, लेकिन बस चालकों की लापरवाही से उनकी जान हमेशा खतरे में रहती है। कारण, शहर की सड़कों पर न तो संकेतक चिन्ह लगे हैं और न ही चालकों को नियमों का पालन कराने वाले गति सीमा बोर्ड हैं। ऐसे में प्रश्न खड़ा हो गया है कि आखिर स्कूली बसों की गति कैसी रुकेगी, जिससे नौनिहालों की जान सुरक्षित रहे।

प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों से चिंतित पुलिस प्रशासन ने चालकों के लिए कई नियम बनाए हैं, लेकिन हादसों का ग्राफ लगातर बढ़ता ही जा रहा है। हाल ही में हाइवे पर हुए हादसों में करीब एक दर्जन लोगों की जान जा चुकी है। शहर के स्कूलों में कई बसें संचालित हैं, जो सुबह से ही सड़कों से लेकर गली-मौहल्लों में बच्चों को लेने के लिए दौडने लगती हैं। चालक लापरवाही से बस चलाते हैं, जिसका खामियाजा उन स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ता है, जो बस में सवार होते हैं। बीते रोज हुए हादसे में चालक की लापरवाही से करीब आधा सैकड़ा स्कूली बच्चों की जान जोखिम में फंस गई थी।

इस प्रकार की घटनाओं के लिए बस चालकों के साथ प्रशासन भी कुछ हद तक दोषी है। हाइवे से लेकर शहर की सड़कों पर न तो संकेतक हैं और न गति सीमा के बोर्ड लगे हैं। कुछ स्थानों पर लगे भी हैं तो वह बदहाली का शिकार हैं। हाइवे पर चालक को अधिकतम 40 कि.मी. की गति से वाहन चलाना चाहिए, उसके भी संकेत बोर्ड दिखाई नहीं देते हैं। इस स्थिति में प्रश्न खड़ा होता है कि आखिर बसों की गति कैसी रुकेगी।
पुलिस विभाग भी सड़क हादसों को लेकर कतर्इं संवेदनशील दिखाई नहीं देता है, जबकि पुलिस महानिदेशक ऋषि कुमार शुक्ला स्वयं बढ़ते सड़क हादसों पर चिंता व्यक्त कर चुके हैं। लोक निर्माण विभाग भी हाइवे पर संकेतक बोर्ड, दिशा सूचक, गति सीमा के बोर्ड लगाने पर ध्यान नहीं दे रहा है।

हादसे के बाद ली सुध, चिरवाई नाका पर लगाए बेरीकेट्स
चिरवाई नाका पर चारों ओर से वाहनों का आवागमन होता है। नई सड़क बन जाने के कारण चालक तेजी से गाड़ी को निकालते हैं। स्कूली बस व वीडियो कोच के टकराने के बाद पुलिस प्रशासन की नींद खुली और चिंता करते हुए घटना स्थल पर बेरीकेट्स लगाकर हादसों को रोकने के प्रयास किए। हादसे के बाद ही सही पुलिस को सुध आ जाने से मौके पर मौजूद ग्रामीण और स्थानीय दुकानदारों ने राहत की सांस ली है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक सिंह और डीएसपी मनोज वर्मा ने शनिवार शाम को किस अवस्था में बेरीकेट्स लगे हैं, चिरवाई नाका पहुंचकर इसका मुआयना किया।

जिगजैक बनाया
चिरवाई नाके पर पुलिस ने जिस तरह से बेरीकेट्स लगाए हैं, उसे जिगजैक कहते हैं। चालक को वाहन की गति जिगजैक में उलझकर कम करना ही पड़ती है, जिससे हादसों से बचाव होता है।

अपने बोर्ड लगाकर नियमों का मजाक उड़ा रहे स्कूल
हाइवे पर जितने भी स्कूल हैं, उन्होंने सड़क किनारे ही अपने विद्यालय के नाम लिखकर बड़े-बड़े बोर्ड लगाए हुए हैं। स्कूल प्रबंधन ने स्कूल का विज्ञापन करने के लिए नियमों की अनदेखी की है। उन्होंने विद्यालय की ओर जाने वाला संकेतक ऐरो को तो दिखाया है, लेकिन विद्यालय के पास वाहन चालक को कितनी गति में वाहन चलाना है और आगे स्कूल है, ऐसे कोई बोर्ड नही लगाए हैं।
विक्की फैक्ट्री से बेला की बावड़ी तक स्पीड ब्रेकर नहीं
विक्की फैक्ट्री से लेकर बेला की बावड़ी तक हाइवे पर स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए गए हैं। शिवपुरी लिंक रोड पर कई विद्यालय, महाविद्याल, वाहनों की एजेंसी, मंदिर, फार्म हाउस, बैंक, मकान आदि बने हुए हैं। इस हाइवे पर कुछ स्थान तो ऐसे हैं, जहां लोगों की जान की सुरक्षा को देखते हुए स्पीड ब्रेकर बनाना बेहद जरूरी है। सड़क पर स्पीड ब्रेकर बनाने के लिए कमेटी बनी हुई है, जो मानक तय करने के बाद ही स्पीड ब्रेकर बनाने की अनुमति देती है।

भ्रमित करने वाली है चिरवाई नाका पर बनी रोटरी:-
चिरवाई नाका पर बनी रोटरी भ्रमित करने वाली है। उसकी न तो ऊंचाई है और न ही उसे इस ढंंग से बनाया गया है कि वाहन चालक उसका चक्कर लगाकर इस्तेमाल करें। इस पर कोई भी दिशा संकेतक आदि नहीं लगाया गया है। सिर्फ उसे चारों ओर से काले-पीले रंग से पोत दिया गया है, जो डिवाइडर जैसा प्रतीत हो रहा है।
बस चालकों का कोई सत्यापन नहीं
सूत्र बताते हैं कि शहर में संचालित स्कूल बसों के चालक नशा करके भी बस चलाते हैं, जिनको कोई भी देखने वाला नहीं हैं। चालक पर ड्रायविंग लायसेंस, पुलिस बैरीफिकेशन, पहचान पत्र आदि प्रमाण हैं या नहीं, इसका कोई लेखा जोखा किसी के पास नहीं हैं। बस चालक बच्चों के साथ हैवानियत करने से भी नहीं चूकते हैं। ऐसे चुनिंदा उदाहरण पिछले दिनों सामने आए थे।
विद्यालय जल्दी पहुंचना हादसों का सबसे बड़ा कारण
बच्चों को समय पर विद्यालय पहुंचाने और प्रबंधन की डांट से बचने के लिए चालक अंधाधुंध गति से बस को दौड़ाते हैं, जिसका खामियाजा मासूम बच्चे और बेकसूर लोगों को भुगतना पड़ता है। जल्दबाजी की आपाधापी में बस चालक कई बार लोगों को रौंद चुके हैं। सुबह से ही गली-मौहल्लों में बसे फर्राटे भरने लगती हैं। प्रदूषण को भी ये बसें बढ़वा दे रही है। इन बसों का संधारण कभी-कभी ही कराया जाता है।

अब स्कूल बस ने गाय को कुचला लोगों ने लगाया जाम
लापरवाह स्कूल बस चालक ने एक बार फिर उसी स्थान पर गाय को कुचल दिया, जहां पर दो दिन पहले हादसा हुआ था। बस की टक्कर से गाय के पैर टूट गए। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने हाइवे पर जाम लगा दिया। घायल गाय को अस्पताल भेजने के बाद पुलिस ने जाम को खुलवाया। चिरवाई नाका के पास भारतीयम विद्या निकेतन के पास तेज गति से जा रही बस ने गाय को टक्कर मार दी। इसके बाद बस को लेकर चालक मौक से फरार हो गया। हादसे में गाय के दोनों पैर लहुलुहान हो गए। घटना का पता चलते ही ग्रामीणों ने जाम लगा दिया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घायल गाय को टैÑक्टर-ट्रॉली से पशु अस्पताल ले जाया गया।

बताया गया है कि टक्कर मारने वाली बस पीले रंग की और किसी विद्यालय की थी। हादसे के बाद शिवपुरी लिंक रोड़ पर जाम लग गया। ग्रामीण लगातार हादसों से आक्रोशित हो गए और उन्होंने जाम लगा दिया। पुलिस ने काफी माथापच्ची के बाद जाम खुलवाया। पुलिस हादसे की जांच-पड़ताल कर रही है।

Updated : 5 Feb 2017 12:00 AM GMT
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