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डबरा-भितरवार में 300 से ज्यादा फर्जी ट्रांसफार्मर

डबरा-भितरवार में 300 से ज्यादा फर्जी ट्रांसफार्मर

*ट्रांसफार्मरों की गणना कराने के बाद हुआ खुलासा
*कई दोषी मैदानी अधिकारी व कर्मचारियों को बचाया
*काफी समय से चल रहा है यह फर्जीवाड़ा

ग्वालियर| म.प्र. मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के पास अधिकारी व कर्मचारियों की बड़ी फौज मौजूद है। बावजूद इसके डबरा और भितरवार क्षेत्र में 300 से ज्यादा फर्जी विद्युत ट्रांसफार्मर लग गए, जिनसे पिछले करीब चार सालों से कृषि पम्पों के लिए निरंतर बिजली की आपूर्ति होती रही और किसी को कानों-कान खबर नहीं लगी। यह बात किसी के गले नहीं उतर रही है। जब इन अवैध ट्रांसफार्मरों का खुलासा हुआ तो अब पांच अधिकारियों को बली का बकरा बनाकर वरिष्ठ अधिकारी स्वयं को और अपनों को बचाने में जुट गए हैं।

अवैध ट्रांसफार्मरों का यह कोई पहला मामला नहीं है। वर्ष 2014 में भी श्योपुर जिले में सैकड़ों की संख्या में अवैध ट्रांसफार्मरों का खुलासा हुआ था। इससे पहले करीब पांच साल पूर्व ग्वालियर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में करीब पांच हजार की संख्या में अवैध ट्रांसफार्मर पकड़ में आए थे। बावजूद इसके कम्पनी ने कोई सबक नहीं लिया। इसी का परिणाम है कि अब डबरा और भितरवार क्षेत्र में अवैध ट्रांसफार्मर सामने आ गए। इन अवैध ट्रांसफार्मरों का खुलासा तब हुआ, जब मुख्य अभियंता के आदेश पर ट्रांसफार्मरों की गणना कराई गई, तब पता चला कि डबरा और भितरवार क्षेत्र में 300 से ज्यादा ऐसे ट्रांसफार्मर हैं, जो कम्पनी के रिकार्ड में दर्ज नहीं हैं।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि 300 से ज्यादा अवैध ट्रांसफार्मर रातों-रात नहीं रखे गए होंगे। निश्चित रूप से लम्बा समय लगा होगा। इन ट्रांसफार्मरों को विद्युत लाइन से जोड़ने के लिए बिजली की आपूर्ति भी बंद कराई गई होगी। बिना बिजली आपूर्ति रोके ट्रांसफार्मरों को विद्युत लाइन से जोड़ पाना संभव नहीं है। ऐसे में साफ है कि इन अवैध ट्रांसफार्मरों को रखवाने में मैदानी अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक की पूरी भूमिका रही होगी, लेकिन कम्पनी ने इस मामले में केवल निर्माण संभाग एक कार्यपालन यंत्री व एक कनिष्ठ यंत्री सहित दो मैदानी कनिष्ठ यंत्रियों को ही दोषी माना और उन्हें निलम्बित कर दिया, जबकि जिस डबरा संभाग के अंतर्गत अवैध ट्रांसफार्मर लगे हैं, उस संभाग के कार्यपालन यंत्री सहित अन्य विद्युत वितरण केन्द्रों के उन सहायक यंत्रियों, कनिष्ठ यंत्रियों, लाइनमैनों को साफ-साफ बचा दिया, जो इस घपले के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं।

इस तरह लगाए गए फर्जी ट्रांसफार्मर
बिजली कम्पनी में ‘स्वयं की ट्रांसफार्मर योजना’ का दुरुपयोग हो रहा है। चूंकि इस योजना में ट्रांसफार्मर रखवाने की जो प्रक्रिया है, उसमें तीन से चार माह का समय लग जाता है। नियम यह है कि बिजली कम्पनी विधिवत रूप से टेण्डर निकालकर ठेकेदार को पूरा सामान उपलब्ध कराती है, उसके बाद ही ट्रांसफार्मर रखा जाता है। तत्पश्चात संबंधित किसान को विधिवत रूप से कनेक्शन दिया जाता है, जबकि किसान जल्द से जल्द ट्रांसफार्मर रखवाना चाहते हैं, इसके चलते होता यह है कि किसान आवेदन देने के साथ निर्धारित शुल्क जमा कराकर बाजार से ट्रांसफार्मर खरीद लेते हैं और संबंधित अधिकारी व ठेकेदार से मिलकर ट्रांसफार्मर रखवा कर विद्युत लाइन से जुड़वा लेते हैं और बिजली का उपयोग शरू कर देते हैं। इसके बाद जब तक मामला पकड़ में नहीं आता है, तब तक किसान चोरी से बिजली का उपयोग करते रहते हैं। सूत्रों के अनुसार गर्मियों के दिनों में अधिकांश अवैध ट्रांसफार्मर फसल कटने के बाद हटा लिए जाते हैं और रबी के सीजन में दोबारा रखवा लिए जाते हैं। बिजली चोरी का यह खेल अधिकारी व कर्मचारियों की मिली भगत से चलता है।

कार्यालय में बैठकर बनाए पंचनामा
सूत्रों के अनुसार डबरा संभाग में जब ट्रांसफार्मरों की गणना कराई गई तो 300 से ज्यादा फर्जी ट्रांसफार्मर सामने आए। इसके बाद संबंधित अधिकारियों ने स्वयं को बचाने के लिए मौके पर जाने की बजाय आनन-फानन में कार्यालय में ही बैठकर फर्जी ट्रांसफार्मरों के पंचनामा तैयार कर संबंधित किसानों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिए, जिनसे अब वसूली की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही इन अवैध ट्रांसफार्मरों की जांच के लिए पांच जांच समितियां भी बनाई गई हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ ऐसे किसानों ने भी ट्रांसफार्मर रखवा लिए हैं, जिन्होंने केवल आवेदन दिया है और शुल्क जमा नहीं कराया है, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने उनके पंचनामा और प्रकरण नहीं बनाए हैं।

अब ठाकुर होंगे ओएण्डएम के अधीक्षण यंत्री
संचारण संधारण वृत्त ग्वालियर (ओएण्डएम) के अधीक्षण यंत्री अब आर.एन.एस. ठाकुर होंगे, जो वर्तमान में भोपाल में पदस्थ हैं। श्री ठाकुर को यहां अधीक्षण यंत्री का चालू प्रभार दिया गया है। यहां बता दें कि अवैध ट्रांसफार्मरों का मामला सामने आने के बाद ओएण्डएम के अधीक्षण यंत्री सुनील कुमार खरे से चालू प्रभार वापस लेते हुए उनका कार्यपालन यंत्री पद पर राजगढ़ स्थानांतरण कर दिया गया है।
इनका कहना है
इस मामले में किसी को नहीं बचाया जा रहा है। निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। जांच में जो भी अधिकारी व कर्मचारी दोषी पाए जाएंगे, उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा जिन ठेकेदारों ने अवैध ट्रांसफार्मर लगाए हैं, उनके खिलाफ भी पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

मनोज द्विवेदी
जनसम्पर्क अधिकारी
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी, भोपाल

Updated : 2017-02-01T05:30:00+05:30
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