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सिन्हा कर रहे मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार

सिन्हा कर रहे मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने को साकार
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-देश की एक लाख ग्राम पंचायतें हुई हाईटेक
-13 को राज्यों के संचार मंत्रियों की बैठक में होगी मंत्रणा
नई दिल्ली। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा परिवर्तन आने वाला है। सुदूर गांवों में रहने वालों की जहां उचित सलाह नहीं मिलने के कारण बीमारी से होने वाली मौत थमेगी, वहीं गांव के नौनिहाल मैट्रो शहर के स्कूलों जैसी पढ़ाई कर सकेंगे। यदि राज्य सरकारों ने गंभीरता से कदम बढ़ाया तो भारत दुनिया के हाइटेक देशों में शुमार हो जाएगा। सोमवार को केन्द्रीय संचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा द्वारा देशभर के संचार मंत्रियों की बुलाई गई बैठक में इसी मसले पर मंत्रणा की जानी है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का डिजिटल इंडिया का सपना साकार रूप लेने लगा है। देश की ढाई लाख ग्राम पंचायतों में लगभग एक लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट सुविधा से जोड़ने का काम पूरा कर लिया गया है। बाकी डेढ़ लाख ग्राम पंचायतों को दिसम्बर 2018 तक इंटरनेट से जोड़ दिया जाएगा। भारतनेट के इस काम में पिछले साल से ज्यादा तेजी आई है। संचार मंत्रालय का काम संभालने के बाद मनोज सिन्हा द्वारा इस योजना की समीक्षा करके काम को और तेज करने पर जोर दिया गया। नतीजा, 2014 से 2016 तक जहां साढ़े 13 हजार किमी आप्टिकल फाइवर लाइन डाली गई, वहीं 2016 से अक्टूबर 2017 तक 25 किमी का आंकड़ा पार हो गया है। इस दौरान 45, 850 जगहों पर इंटरनेट सुविधा दुरुस्त कर दी गई है, जहां किसी भी राज्य सरकार की तरफ से मांगे जाने पर तुरंत नेट कनेक्टविटी दे दी जाएगी। गांवों में इंटरनेट क्रांति लाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा अब राज्य सरकारों के साथ समन्वय की पहल शुरू की गई है। 13 नवम्बर को दिल्ली में सभी राज्य के संचार मंत्रियों की बैठक होने वाली है। इस बैठक में केन्द्रीय संचार राज्यमंत्री मनोज सिन्हा द्वारा भारतनेट के कामकाज का ब्यौरा देकर राज्य सरकारों को इस सुविधा को लेने से होने वाले लाभ के बारे में बताया जाएगा।
दिसम्बर 2018 तक देश की सभी ढाई लाख ग्राम पंचायतों को इंटरनेट सुविधा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें दूसरे चरण में बाकी की डेढ़ लाख ग्राम पंचायतों तक नेट पहुंचाने का काम तेज कर दिया गया है। दरअसल, भारतनेट परियोजना के तहत देश की सभी ग्राम पंचायतों तक इंटरनेट सुविधा पहुंचाने का काम आसान नहीं है। देश की भौगोलिक स्थिति ऐसी है, जिसमें गांवों की बसाहट के हिसाब से सभी पंचायतों को नेट से जोड़ने के लिए तीन तरह की योजना पर काम किया जा रहा है। संचार विभाग के अधिकारी के अनुसार समतल क्षेत्र वाली सवा लाख ग्राम पंचायतों में आप्टिकल फाइबर डाली जा रही,लगभग 20 हजार पंचायतों को रेडियो प्रणाली के जरिए इंटरनेट से जोड़ा जा रहा है तथा सुदूर बसाहट वाली करीब 3 हजार पंचायतों को सेटेलाइट के जरिए इंटरनेट से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

राज्य सरकारों द्वारा इसे गंभीरता से लिया गया तो देश के गांवों में बड़ा परिवर्तन आ जाएगा। संचार विभाग के अधिकारी के मुताबिक भारतनेट राज्य सरकार की कनेक्टविटी व्यवस्था से दो कदम आगे की योजना है। इसमें प्रत्येक ग्राम पंचायतों में इंटरनेट सुविधा शुरू करने से गांव के लोगों को ब्लाक और जिला जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खेती तथा घर से संबंधित दस्तावेज लोगों को घर बैठे ही मिल जाएंगे। आन लाइन पंजीयन की व्यवस्था हो जाएगी, इससे जनगणना की मशक्कत खत्म हो जाएगी। इसके अलावा भारतनेट का दूसरा बड़ा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार का मिलेगा। अधिकारी के अनुसार देश के अधिकांश विद्यालय इस समय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। इस सुविधा से ई-शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सकता है। बड़े शहरों के विद्यालय से समन्वय कर वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए गांव के नौनिहालों को अच्छी शिक्षा देने का रास्ता बनाया जा सकता है। इसके अलावा इंटरनेट सुविधा से ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारी का पता नहीं चल पाने के कारण होने वाली मौत को भी रोका जा सकता है। टेली मेडिसिन सुविधा से उम्दा चिकित्सकों से तत्काल सलाह लेकर मरीज को बचाया जा सकता है। राज्य सरकारों द्वारा सुविधा दिए जाने के बाद गांव में शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय वस्तुओं की आॅन लाइन मार्केटिंग होने लगेगी। इंटरनेट कारोबार का रूप ले लेगा। स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। कम्प्यूटर ट्रेनिंग के लिए कौशल विकास योजना में इसीलिए प्रशिक्षण का प्रावधान किया गया है।

ग्रामीण क्षेत्र में अक्सर फोन-मोबाइल जैसी सुविधा होने के बाद भी कनेक्टविटी की दिक्कत रहती है। कारण, बिजली बंद होने की समस्या है, लेकिन भारतनेट में ऐसा प्रावधान किया गया है, जिससे बिजली बंद होने का इंटरनेट पर प्रभाव नहीं पड़े। एक अधिकारी ने बताया कि भारतनेट में सब ओपन सर्विस सेंटर सोलर पैनल वाले बनाए गए हैं। इसकी सर्विसिंग के लिए बीएलई के लोगों से समझौता किया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में कभी भी इंटरनेट की व्यवस्था में खराबी न आए।

Updated : 2017-11-11T05:30:00+05:30
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