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नयति अस्पताल ने मथुरा में रचा इतिहास, 6 माह के बच्चे के दिल का किया सफ ल ऑपरेशन

नयति अस्पताल ने मथुरा में रचा इतिहास, 6 माह के बच्चे के दिल का किया सफ ल ऑपरेशन
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मथुरा। नयति मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के चिकित्सकों ने दिल की बीमारी से पीडि़त 6 माह के शिशु का सफल ऑपरेशन कर एक बार फिर नया आयाम स्थापित किया। पूर्व में भी अस्पताल में 9 माह के बच्चे का सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया जा चुका है।

जैंत निवासी फतेह सिंह का नाती युवराज पैदा होते ही विभिन्न प्रकार की बीमारियों से घिरा गया जिसकी वजह से परिवारीजन काफी परेशान थे। उन्होंने बच्चे के इलाज के लिए मथुरा, आगरा ही नहीं दिल्ली तक के सभी छोटे-बड़े अस्पतालों के चक्कर काटे किन्तु बच्चे के स्वास्थ्य में कोई लाभ न मिल सका। दिल्ली के एक बड़े अस्पताल ने जांच करके बच्चे के दिल में कई छेद बताए किन्तु डॉ. अभी बच्चे की कम उम्र को देखते हुए ऑपरेशन करने में झिझक रहे थे तथा खर्चा भी बहुत ज्यादा था। जिसके बाद फतेह सिंह को किसी ने नयति अस्पताल में दिखाने की सलाह दी। यहां पर डॉ. वेणुगोपाल राव से मिलकर अपने बच्चे का ऑपरेशन नयति में ही कराने का फैसला किया।

अस्पताल की चेयरपर्सन नीरा राडिया ने कहा कि पिछली बार हमारी टीम ने जब 9 माह के बच्चे का ऑपरेशन किया था तब भी वो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक अनूठी बात थी लेकिन आज हमारी टीम ने छ: माह के बच्चे का सफल ऑपरेशन करके इस क्षेत्र के लोगों को भरोसा दिलाने का प्रयास किया है कि हमारे अस्पताल में विश्वस्तरीय डॉक्टरों तथा नर्सिंग स्टाफ के अलावा विश्वस्तरीय उपकरण भी है, जिनकी वजह से यहां के लोगों को दिल्ली, मुम्बई तथा अन्य महानगरों का इलाज यहीं मिल पाएगा और खर्चा भी दिल्ली मुम्बई से काफी कम होगा।

उन्होंने अस्पताल के छ: माह पूरे होने पर कहा कि मथुरा में हॉस्पिटल स्थापित करते समय हमें व हमारे डाक्टरों को यहां के वातावरण व लोगों के व्यवहार को लेकर तरह-तरह की आशंका थी लेकिन यहां आने के बाद मुझको और मेरी टीम को लगता ही नहीं कि हम अभी कुछ ही माह पहले मथुरा आए है। यहां के लोग इतने मिलनसार है कि कई डॉक्टरों से यहां के लोगों का पारिवारिक रिश्ता बन गया है और मथुरा, आगरा, भरतपुर, अलीगढ़, हाथरस आदि के डॉक्टरों का भी हम पर विश्वास बढ़ा है। शुरुआत में तो उन लोगों को अपने मरीज यहां भेजने में झिझक होती थी, लेकिन अब वे अपने मरीजों को हमारे अस्पताल में भेजने से कतई नहीं झिझकते और हम भी उन्हें उनके मरीजों से मिलने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। अस्पताल के सीईओ डॉ. आरके मनि ने कहा कि धीरे-धीरे हम ब्रज तथा आसपास के लोगों का विश्वास हासिल करने में सफल हो रहे हैं।

जिसका जीता-जागता उदाहरण दिल्ली से लौटकर आया 6 माह का युवराज है। जहां दिल्ली के बड़े अस्पतालों में इसके इलाज पर काफी खर्चा बताया गया था। वही इलाज हमारे यहां वहां के खर्चे से एक चौथाई से भी कम में हो गया। नयति अस्पताल बड़ा जरूर है लेकिन यहां के खर्चे दिल्ली, मुम्बई आदि से बहुत कम है।

Updated : 2016-09-09T05:30:00+05:30
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