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कूनो में कब आएंगे शेर!

कूनो में कब आएंगे शेर!

बजट और क्षेत्र विस्तार के प्रस्ताव भी अटके

ग्वालियर। श्योपुर जिले के कूनो वन्यप्राणी अभयारण्य में पिछले करीब 20 सालों से प्रस्तावित बब्बर शेरों को बसाने की योजना पर अब तक असमंजस के बादल छाए हुए हैं। वर्ष 2013 के अपै्रल माह में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश उपरांत भी इस मामले में स्थिति स्पष्ट नहीं है। यही नहीं, अभयारण्य के क्षेत्र विस्तार और बजट के लिए भेजे गए प्रस्ताव भी अभी तक अटके हुए हैं। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय इस संबंध में कोई निर्णय लेगा तभी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

उल्लेखनीय है कि सन् 1996 के दशक में कूनो अभयारण्य में गुजरात के गिरि राष्ट्रीय उद्यान के बब्बर शेरों को बसाने की योजना पर काम शुरू हुआ था, लेकिन गुजरात सरकार ने इसके लिए शेर देने से साफ मना कर दिया था। इसके बाद यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में पहुंचा।

इस पर 15 अपै्रल 2013 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आगामी छह माह में गुजरात के गिरि राष्ट्रीय उद्यान से बब्बर शेरों को कूनो अभयारण्य में बसाने का आदेश दिया था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश अनुसार इसके लिए केन्द्र स्तर पर विशेषज्ञों की एक समिति गठित की गई, लेकिन तीन साल से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी यह समिति अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाई है। बताया गया है कि मई 2016 में इस समिति की आखिरी बैठक हुई थी, जिसमें बड़े निर्णय की उम्मीद थी, लेकिन इस बैठक में भी नतीजा पूर्व बैठकों की तरह शून्य ही रहा।

प्रस्तावों को भी नहीं मिली स्वीकृति

वन विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से गठित विशेषज्ञों की समिति ने बब्बर शेरों को बसाने की दृष्टि से कूनो अभयारण्य का एरिया बढ़ाने का निर्देश दिया था। इस पर वन विभाग द्वारा 23 जून 2016 को 350.577 वर्ग कि.मी. एरिया बढ़ाने का प्रस्ताव भेजा गया। इससे पहले पिछले वर्ष तमाम व्यवस्थाओं की दृष्टि से 68 करोड़ का प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन इन दोनों प्रस्तावों को भी अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। बताया गया है कि वर्तमान में कूनो अभयारण्य का क्षेत्रफल 344.686 वर्ग कि.मी. है। एरिया बढ़ाने के लिए भेजा गया प्रस्ताव यदि स्वीकृत होता है तो उसके बाद इसका एरिया बढ़कर 695.263 वर्ग कि.मी. हो जाएगा।

इनका कहना है
विशेषज्ञ समिति की आखिरी बैठक मई में हुई थी, जिसमें कोई निर्णय नहीं हो पाया था। इस मामले में केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय निर्णय लेगा और गुजरात सरकार शेर देने के लिए हामी भरेगी, उसके बाद ही कूनो अभयारण्य में शोरों को बसाने की प्रक्रिया आगे बढ़ पाएगी।

जितेन्द्र अग्रवाल
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी)
वन विभाग, भोपाल

Updated : 2016-09-21T05:30:00+05:30
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