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पाकिस्तान ने लांघी लक्ष्मण रेखा

उरी में आतंकी हमला कर पाकिस्तान ने अब तो लक्ष्मण रेखा ही पार कर दी। जिस तरह से कायराना हरकत कर अलसुबह सो रहे जवानों पर आतंकियों ने हमला किया है, उसे कभी भी माफ नहीं किया जा सकता है। ऐसे में पाकिस्तान को सबक सिखाना अब जरूरी हो गया है। चारों ओर से यही आवाज आ रही है कि किसी भी तरह से पाकिस्तान से बदला लिया जाए। अब बयानों का सिलसिला बंद होना चाहिए और बदला लेने की कार्रवाई शुरू होना चाहिए। भारत ने भी इस दिशा में विचार करना शुरू कर दिया है।

सेना ने तो यहां तक कह दिया है कि वह जवाब देने के लिए तैयार है और इसके लिए स्थान व समय खुद तय करेंगे। उरी में हुए हमले के बाद सेना ने मारे गए आतंकवादियों से जो सामान जब्त किया है, उससे साफ है कि कहीं न कहीं इस हमले के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। हर बार की तरह पाकिस्तान एक बार फिर से यह जताने का प्रयास कर रहा है कि इस हमले में उसका कहीं कोई लेना देना नहीं है, लेकिन भारतीय सेना ने वे सारे सबूत एकत्रित कर लिए हैं जिससे यह साबित होता है कि इस हमले में पाकिस्तान का ही हाथ है। उरी की इस घटना से पूरा देश स्तब्ध है और सब यही जानना चाहते हैं कि अब भारत क्या करने वाला है। सोमवार को दिन भर इसे लेकर बैठकों का सिलसिला चलता रहा। केंद्रीय गृहमंत्री ने जहां सेना के साथ बैठकें कर इस बात के संकेत दे दिए हैं कि वह चुप बैठने वाले नहीं हैं।

इसके तत्काल बाद सभी मंत्री प्रधानमंत्री के साथ बैठे और उन्हें सारी घटना से अवगत कराया। इस बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर वस्तुस्थिति से अवगत कराया। प्रधानमंत्री की राष्ट्रपति से हुई मुलाकात के बाद समझा जा रहा है कि भारत पाकिस्तान के खिलाफ बड़े कदम उठाने वाला है। पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई से पहले भारत की रणनीति यह है कि वह पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमजोर करे और उसे अलग थलग करने की दिशा में कदम उठाए जिससे पाकिस्तान आर्थिक रूप से कमजोर होने के साथ साथ सामरिक रुप से भी कमजोर हो।

भारत की मंशा यह भी है कि जिस तरह से पाकिस्तान अन्य देशों से आर्थिक मदद लेता है, वह भी बंद हो। हालांकि इसकी उम्मीद कम है कि भारत के इन हथकंडों के बाद पाकिस्तान अपनी हरकतें बंद कर दे, क्योंकि पाकिस्तान की कथनी और करनी में हमेशा अंतर देखा गया है। बहरहाल केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाने का मन बना लिया है लेकिन सरकार इस मामले में जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहती है। सरकार की मंशा है कि इस मामले में सबकी रजामंदी हो, सरकार विपक्ष के साथ भी बैठक कर इस मुद्दे पर कड़ी कार्रवाई कर सकती है।

Updated : 2016-09-21T05:30:00+05:30
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