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कभी रहती थीं सेनाएं, आज है बाजार

कभी रहती थीं सेनाएं, आज है बाजार

शहर के प्रमुख बाजारों में से एक खासगी बाजार। इस बाजार का नाम स्टेट काल में महाराज जयाजीराव सिंधिया के दरबार में प्रधान रहे दादा खासगी वालों के नाम पर है। साथ ही मोटे गणेश जी के मंदिर ने भी इसे विशेष पहचान दी है। यहां मुख्य रूप से मोबाइल, किराना, हलवाई आदि की दुकानें हैं।


अरूण शर्मा/ग्वालियर। शहर के ह्रदय स्थल महाराजबाड़ा से सटा खासगी बाजार शहर के ऐतिहासिक और प्रमुख बाजारों में से एक है। इसका नाम दादा खासगी वालों के नाम पर है जो कि महाराज जयाजीराव सिंधिया के प्रधान हुआ करते थे। बताया जाता है कि उस समय सिंधिया राजवंश की सेनाएं भी यहां रहा करती थीं। यह बाजार आकार में अधिक बड़ा नहीं है और मात्र 50 या 60 दुकानें ही यहां पर हैं। इनमें मोबाइल, किराना, हलवाई, आदि की दुकानें प्रमुख हैं। यहां प्रतिदिन लाखों रुपए का कारोबार होता है। इस बाजार में कई परिवार भी निवास करते हैं। लेकिन यहां अधिक शोरशराबा नहीं है। यह लगभग 10 से 15 सकरी गलियों और मोहल्लों से जुड़ा हुआ है।

मोटे गणेश जी से भी है पहचाने:-
खासगी बाजार में सैंकड़ों वर्ष पुरानी मोटे गणेश जी की प्रतिमा है। यहां सुबह से लेकर शाम तक दर्शनों के के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। खासगी बाजार की पहचान इस मंदिर से भी है। महाराजबाड़ा के साथ ही यह सुभाष मार्केट, अग्रसेन मार्केट, नेहरू मार्केट, लाला का बाजार, तारागंज, समाधिया कॉलोनी, ढोली बुआ का पुल, लक्ष्मीगंज सब्जी मण्डी, छत्री बाजार से भी जुड़ा हुआ है।

बाजार की विशेषताएं
* अब भी सरदार खासगी वालों के वंशज यहां रहते हैं।
* मोटे गणेश जी के मंदिर के साथ ही यहां सिंधी समाज की धर्मशाला,मंसूर साहब की दरगाह भी है।
* यहां जैन, विट्ठल, शंकर जी का विशेष मंदिर भी है।
* इस बाजार में कई सरकारी इमारतें भी हैं।
ये हैं प्रमुख समस्याएं
* यातायात जाम की समस्या
* यह कुछ सकरा बाजार भी है।

इनका कहना है
‘यह बाजार सिंधिया स्टेट के समय का प्राचीन बाजार है। पर्यटन की दृष्टि से इस बाजार को अधिक सुन्दर बनाया जा सकता है।’
सुधीर गुप्ता
क्षेत्रीय नागरिक एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष नगर निगम
‘यह बाजार बहुत पुराना है। इस बाजार में सडक़, बिजली एवं पानी आदि की उचित व्यवस्था है।’

सीताराम अग्रवाल, निवासी

‘खासगी बाजार एक ऐसा बाजार है जो कई बाजारों से जुड़ा हुआ है। इस बाजार में दूध-दही, किराना आदि का काम अधिक होता है।’

लक्ष्मणदास अग्रवाल
क्षेत्रीय नागरिक

‘यहां मोटे गणेशजी का प्रसिद्ध मंदिर है। मंदिर मेंं दर्शनों के लिए शहर से ही नहीं बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।’

शिवराम कुशवाह
फूल विक्रेता

Updated : 2016-09-14T05:30:00+05:30
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