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सावन का दूसरा सोमवार: शिवालयों में उमड़ें श्रद्धालु

सावन का दूसरा सोमवार: शिवालयों में उमड़ें श्रद्धालु
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सावन का दूसरा सोमवार: शिवालयों में उमड़ें श्रद्धालु

ग्वालियर। सावन माह में हर सोमवार को की जाने वाली शिव पूजा आम दिनों की पूजा की तुलना में 108 गुना अधिक प्रभावी मानी जाती है। सभी श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। इस वर्ष सावन के महीने में चार सोमवार हैं, जिसमें दूसरा सोमवार एक अगस्त को है। पंडितों की मानें तो सावन का महीना शिव भक्तों के लिए खास होता है। हर तरफ शिव भक्त कांवडिय़ों को जल लेकर शिवधाम की ओर बम-बम भोले के नारों के साथ देखे जा रहा है। ज्योतिषाचार्य पं. सतीश सोनी ने बताया कि सावन का दूसरा सोमवार शिव भक्तों को बेहतर स्वास्थ्य और बल प्रदान करने वाला माना गया है।

इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग है। इसके साथ ही इस दिन बृज नामक योग भी बन रहा है। इन दोनों योगों के कारण सावन का दूसरा सोमवार विशेष फलदायक बन गया है। इस दिन भगवान शिव की पूजा से बल एवं स्वास्थ्य की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है। सावन के सोमवार को भगवान शिव को भांग, धतूरा एवं शहद अर्पित करना उत्तम फलदायी रहेगा।

गरीब बच्चों के लिए सावन की सौगात :- सावन का महीना स्कूलों में पढऩे वाले गरीब नन्हें-मुन्ने बच्चों के लिए बेलपत्र कमाई का जरिया बन जाता है। छोटे-छोटे बच्चे भोले बाबा को चढ़ाए जाने वाले बेलपत्र झोले में भरकर मंदिरों पर बेचते हैं। बेलपत्र बेचने वाले बच्चों ने बताया कि वे पांच रुपए में दस बेलपत्र बेच लेते हैं। भोले बाबा की कृपा से सावन माह में प्रतिदिन 100 रुपए की कमाई हो जाती है। पूरे सावन माह में यह बच्चे सुबह-सुबह घर से निकल कर बेलपत्र तोडऩे चले जाते हैं। सोमवार के दिन इनकी व्यस्तता ज्यादा हो जाती है।
सोमवार को शिव मंदिरों में बच्चे बेलपत्र एवं फूल बेचते हैं। बच्चों ने बताया कि बेलपत्र एवं फूल बेचकर जो कमाते हैं, उससे स्कूल ड्रेस एवं घर के लिए सामान खरीदते हैं। उन्होंने बताया कि पेड़ों से बेलपत्र तोडऩे से पहले भोले बाबा का स्मरण करते हैं। बेलपत्र बेचने वाले बच्चों में कुछ बालिकाएं भी शामिल रहती हैं। अचलेश्वर मंदिर के पास तो बड़ी संख्या में बच्चे बेलपत्र बेचते हैं। वैसे तो बेलपत्र का उपयोग साल भर शिव भक्त करते ही हैं, परन्तु सावन माह में बेलपत्र की मांग कई गुना बढ़ जाती है।

बम-बम भोले में बसी है आस्था
बम-बम भोले बस यही तीन शब्द हैं, जिनके सहारे कांवडिय़े आगे बढ़े जा रहे हैं, लेकिन यह केवल तीन शब्द नहीं हैं। इन शब्दों में अपार आस्था, दिल की गहराइयों में बसी भोले की भक्ति, लाखों मनोकामनाएं और उनके पूरा होने की उम्मीद छिपी है।

प्रसाद हैं पैरों के छाले
हाइवे पर कांवड़ लाने वाले भक्तों की संख्या के साथ ही उनकी सेवा करने वालों की संख्या भी बढ़ गई है। कांवड़ लेकर आने वाले लोगोंं के पैरों में पैदल चलते-चलते छाले पडऩे लगे हैं। भक्तों को पैरों में छाले और बदन दर्द परेशान कर रहा है, लेकिन वह इसे भोले बाबा का प्रसाद मानकर अपनी यात्रा पूरी करने में जुटे हैं।

Updated : 2016-08-01T05:30:00+05:30
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