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सोनचिरैया अभयारण्य में तेंदुए ने फिर से दी दस्तक

सोनचिरैया अभयारण्य में तेंदुए ने फिर से दी दस्तक

फते का पुरा में किया गाय के बछड़े का शिकार

ग्वालियर। आदमखोर तेंदुआ के मरने के बाद भी ग्रामीणों के सिर से खतरा अभी टला नहीं है। सोनचिरैया अभयारण्य में एक के बाद एक तेंदुआ सामने आ रहे हैं। अभयारण्य के अंतर्गत झाला-लखनपुरा के आसपास एक और तेंदुआ देखा गया है, जिसने गाय के एक बछड़े का शिकार भी किया है। तेंदुआ की फिर से दस्तक से अभयारण्य के अंदर बसे गांवों में एक बार फिर दहशत फैल गई है।

सोनचिरैया अभयारण्य में तेंदुओं की संख्या अचानक बढ़ गई है। वन विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार अभयारण्य में इस समय तेंदुआ छह से सात की संख्या में हैं। इन्हीं में से किसी एक तेंदुआ ने गुजरे रविवार को अभयारण्य के अंतर्गत झाला-लखनपुरा के पास स्थित फते का पुरा गांव में जगदीश सिंह गुर्जर की गाय के बछड़े का शिकार कर लिया। इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिन्होंने जांच-पड़ताल के बाद इस इलाके में तेंदुआ की मौजूदगी की पुष्टि की और ग्रामीणों से सावधान रहने तथा अकेले जंगल में नहीं जाने की सलाह दी। वन विभाग के अधिकारियों ने गाय के बछड़े के मालिक को नियमानुसार मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया है। उल्लेखनीय है कि गुजरे गुरुवार व शुक्रवार की रात सोनचिरैया अभयारण्य क्षेत्र के ही तिलावली गांव में

एक आदमखोर तेंदुआ ने घर में घुसकर अचानक हमला कर दो परिवारों के दस लोगों को घायल कर दिया था और एक गाय व तीन बकरियों को मार दिया था वहीं दो भैंसों और छह बकरियों को घायल कर दिया था। इसके बाद शुक्रवार व शनिवार की रात में तिलावली गांव से आठ कि.मी. की दूरी पर स्थित निरपत पुरा गांव में भी इसी तेंदुआ ने एक ग्रामीण कप्तान सिंह को घायल करने के साथ-साथ पांच भैंसों और दो गायों को घायल कर दिया था। इसके बाद शनिवार को सुबह निरपत पुरा गांव के पास ही स्थित सांक नदी में उक्त आदमखोर तेंदुआ मृत हालत में पड़ा मिला था। उसकी मौत ग्रामीणों द्वारा पहुंचाई गई गंभीर चोट, अत्यधिक भूख और गर्मी के कारण होना बताई जा रही है। तेन्दुआ के हमले में घायल सभी ग्रामीणों का जयारोग्य अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें कप्तान सिंह व ब्रजेन्द्र सिंह की हालत अभी तक गंभीर बनी हुई है।

डेढ़ साल पूर्व भी मारा गया था तेंदुआ
जानकारी के अनुसार मोहना रेंज की करहिया वन चौकी के अंतर्गत आने वाले जंगल में करीब डेढ़ साल पूर्व फरवरी माह में गायों पर हमला करने पर किसी चरवाहे ने कुल्हाड़ी से हमलाकर एक तेंदुआ को मार दिया था। इस पर वन विभाग ने अज्ञात व्यक्ति के विरुद्ध वन अपराध दर्ज किया था। सूत्रों के अनुसार जांच-पड़ताल में तेंदुआ को मारने वाले व्यक्ति का नाम भी सामने आ गया था, लेकिन अभी तक उसे पकड़ा नहीं जा सका है।

बरई के पास भी देखा गया था तेंदुआ
करीब दो माह पूर्व सोनचिरैया अभयारण्य के अंतर्गत बरई के पास भी तेन्दुआ देखा गया था। बताया गया है कि रात के समय लोगों ने बरई गांव के तालाब पर तेंदुआ के गुर्राने की आवाज सुनी थी, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई थी। इसकी सूचना वन विभाग को दी गई थी। इस पर वन अमले ने बरई के आसपास के जंगलों में सर्चिंग भी की थी, लेकिन तेंदुआ कहीं नजर नहीं आया था।
अचानक कहां से आ गए तेंदुआ
वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो सोनचिरैया अभयारण्य में एक मादा और एक नर केवल दो ही तेंदुआ थे, लेकिन अचानक यहां तेंदुओं की संख्या कैसे बढ़ गई। वर्तमान में यहां आधा दर्जन से अधिक वयस्क तेंदुओं की मौजूदगी बताई जा रही है। माना जा रहा है कि यह तेंदुआ श्योपुर जिले के कूनो अभयारण्य या राजस्थान के रणथम्भौर अभयारण्य से विचरण करते हुए यहां आ पहुंचे हैं।

कभी-कभी बाघ भी देता है दस्तक

वन विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार इन दिनों सोनचिरैया अभयारण्य में जहां तेंदुओं का खौफ है, तो इधर बेहट के जंगल में कभी-कभी बाघ (टाइगर) भी दस्तक दे देता है। बताया गया है कि राजस्थान के रणथम्भौर अभयारण्य से आया एक बाघ लम्बे समय से दतिया जिले के सेंवढ़ा के जंगलों में विचरण कर रहा है और बेहट का वन क्षेत्र सेंवढ़ा से लगा हुआ है, इसलिए कभी-कभी विचरण करता हुआ बाघ बेहट रेंज के जंगलों तक आ जाता है।

Updated : 2016-05-24T05:30:00+05:30
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